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सोमवार, 21 जून 2010

शराब पीने से रोका तो पत्नी का कर दिया बेरहमी से कत्ल

-गली दबाकर की हत्या, पुलिस ने किया मामला दर्ज
-लंबे समय से शराब पीकर कर रहा था महिला को प्रताडि़त 
बठिंडा। महिला ने पति को शराब पीने से रोका तो उसका बेरहमी से कतल कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ केस दायर कर गिरफ्तार कर लिया। जानकारी अनुसार राजस्थान के संगरिया वासी चौधर सिंह ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई कि उसकी बहन बिंदर कौर का 18 साल पहले भौखड़ा वासी परमजीत सिंह पुत्र कृष्ण सिंह के विवाह हुआ था। विवाह के कुछ समय तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। इसके बाद परमजीत सिंह शराब पीने का आदी हो गया। शराब पीकर वह बिंदर के साथ अकसर मारपीट करता था व उसे जान से मारने की धमकी देता था। बिंदर कौर उसे शराब पीने से रोकती थी लेकिन वह उसकी बात मानने से इंकार कर उससे मारपीट करता था। इसी तरह रविवार रात्रि परमजीत सिंह शराब पीकर घर आया तो बिंदर कौर ने उसे शराब छोडने व परिवार की तरफ ध्यान देने के लिए कहा। इससे आग बबूला हुआ परमजीत सिंह अपना आपा खो बैठा व उसका गला दबाकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी घटनास्थल से फरार हो गया। चौधर सिंह को आसपास के लोगों ने फोन पर सूचित किया। इसके बाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ़्तार कर जांच शुरू कर दी है।

मोबाइल लक्की ड्रा के नाम पर मारी 1.10 लाख की ठग्गी
-एक मिलियन डालर के पुरस्कार को लेकर भेजा था एसएमएस
-दिल्ली वासी सिदार्थ के खिलाफ दर्ज किया पुलिस ने केस 
बठिंडा। मोबाइल फोन पर लक्की ड्रा निकालने की एवज में एक लाख दस हजार रुपये की जलसाजी मारने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इसमें पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए टीम का गठन किया है। जानकारी अनुसार फिल्ड हैल्थ आर्गोनाइजेशन कैंञ्ट बठिंडा वासी नायब जनता कुमार को दिल्ली वासी सिदार्थ उमेश सिंह ने छह मार्च 2010 को एक एसएमएस भेजा। इस मेसिज में कहा गया कि कोका कोला कंपनी की तरफ से एक लक्की ड्रा स्कीम चलाई जा रही थी। इस स्कीम के तहत आपके मोबाइल नंबर को लक्की ड्रा में शामिल किया गया था। इसमें एक मिलियन डालर का पुरस्कार नायब जनता कुमार को निकला है। पुरस्कार देने की शर्त के अनुसार एक लाख दस हजार 90 रुपये की स्कोयर्टी उनके पास जमा करवानी होगी। इसके लिए बकायदा एक खाता नंबर दिया गया व इसमें राशि जमा करने के लिए कहा गया। एसएमएस के बाद फोन वार्ता करने के बाद नायब जनता कुमार को विश्वास हो गया कि उक्त लक्की ड्रा सही में उसे निकला है। सिदार्थ की बातों पर विश्वास कर उसने एक लाख दस हजार 90 रुपये की राशि उसकी तरफ से बताए गए खाते में जमा कर दिए। इसमें तीन माह बीचने के बाद जब सिदार्थ ने न तो फोन उठाया और न ही स्कीम के बारे में अगली कोई जानकारी दी तो उन्हें शक हुआ। इसके बाद जनता कुमार बहिरा ने उक्त नंबर के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि सिदार्थ उमेश सिंह सी-सात चौथी मंजिल इगनो रोड दिल्ली में रहता है। वह पिछले लंबे समय से लोगों के साथ इसी तरह की जालसाजी कर रहा है। इसके बाद मामले में बैंक रसीद व भेजे गए एसएमएस के आधार पर पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद सिदार्थ उमेश सिंह के खिलाफ जालसाजी का केस दायर कर लिया। इसमें गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम का गठन भी किया गया है।
@Post By Punjab Ka Sach 

प्रशासन की मौजूदगी में खेला गया मौत का खेल, प्रबंध रहे ना-काफी

पहले की स्थिति पर विशेष रिपोर्ट
सीएम से खफा तीन एआईई अध्यापकों ने लगाई आग
-साथी अध्यापकों ने बचाया, एक की हालत खराब
पिछले 24 घंटे से चढे़ है पानी की टैंकी पर, प्रशासन नहीं कर रहा बातचीत
-कई गांवों में अभी भी रुकी पड़ी है पानी की सप्लाई, लोग हुए परेशान
                        फोटो : बब्बल
बठिंडा। मांगों को लेकर एक बार फिर संघर्ष कर रहे अध्यापक सोमवार सांय से पानी की टैंकी में चढ़े पडे़ हैं। इसमें सोमवार की रात को घटित एक घटनाक्रम में चार अध्यापकों ने स्वयं पर तेल छिड़क दिया जबकि तीन ने स्वयं को आग लगाने का प्रयास किया। इस दौरान टैंकी पर चढ़ी एक अध्यापिका राखी को पिछले 16 घंटे से कपड़ों में आग लगने के बावजूद पानी की टैंकी पर चढ़ी है। उसका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी वह इसी तरह पानी की टैंकी पर चढ़ी रहेगी। दूसरी तरफ तीन अन्य अध्यापक रेखा रानी वासी अबोहर, कमल शर्मा वासी जीरा व सुखजीत सिंह वासी साहनेवाल ने भी स्वयं पर केरोसीन का तेल छिड़क लिया। इसमें रेखा पानी, कमल शर्मा ने भी स्वयं को आग लगाई जिसमें मौके पर खडे़ लोगों ने उनके कपड़ों में लगी आग को बुझा दिया जबकि सुखजीत सिंह को भी वहां से तत्काल उठाकर सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां कुञ्छ समय पर उक्त अध्यापकों को भर्ती करने के बाद वहां से अन्य स्थान में स्थान्तरित कर दिया गया। फिलहाल पानी की टैंकी पर चढ़ी राखी सोमवार को चार घंटे से अधिक समय तक पानी की टैंकी में बेहोशी की हालत में पड़ी रही इस दौरान उसे किसी तरह का प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया जा सका जबकि मंगलवार की सुबह जब राखी को टैंकी से नीचे उतरकर उपचार करवाने के लिए कहा गया तो उसने तब तक टैंकी से नीचे नहीं उतरने की बात कही जब तक उनकी सभी मांगों को पूरा नहीं किया जाता व सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी नहीं की जाती है।  गौरतलब है किञ् इस बार पिछले एक दिन से अलटरनेटिव इनोवैटिक एजूकेशन (एआईई) से जुडी 12 महिला अध्यापक गोनियाना मंडी के नजदीक स्थित भौकड़ा पानी की टैंकी में चढ़े पडे़ हैं। उक्त लोग पहले की तरह इस बार भी कैरोसीन का तेल लेकर ऊपर चढे़ है व चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह आत्मदाह करने का प्रयास जारी रखेंगे। फिलहाल जिला प्रशासन के अधिकारी पानी की टैंकी के नीचे इकट्ठा होकर उनसे वार्ता करने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि अलटरनेटिव इनोवैटिक एजूकेशन से जुडे़ अध्यापकों का पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से चंडीगढ़ में मिला था। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचित किया गया कि उनकी मांगों को लेकर अधिसूचना शिक्षा विभाग के डायरेक्टर की तरफ से जारी की जाएगी। जब इस बाबत अध्यापकों ने शिक्षा विभाग से बात की तो उन्होंने इस बाबत किसी तरह की अधिसूचना मिलने से इंकार कर दिया। इसके बाद अध्यापकों का आक्रञेश ड्डूञ्ट पड़ा व उन्होंने बठिंडा में टीचर होम में आयोजित रैली के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया। एआईई अध्यापक किसी तरह गोनियाना रोड स्थित पानी की टैंकी के पास पहुंच गए। इसमें 12 महिला अध्यापक पानी की टैंकी में चढ़ गए। 
फोटो : बब्बल
इसके बाद पानी की टैंकी में बने वाटर सप्लाई दफ्तर में काम कर रहे कर्मचारी वहां से फरार हो गए, जिससे आसपास के गांव में पानी की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गई। इससे आक्रञेशित गांव गिलपत्ती व भौकडा की पंचायत सौ के करीब लोगों को  साथ लेकर पुलिस थाना गोनियाना पहुंचे व पानी की सप्लाई बहाल करने की मांग की। इसमें पुलिस ने किसी तरह की सहायता करने से इंकार कर दिया व कहा कि वह इस बाबत आक्रञेशित अध्यापकों से मिले। गांव वासी जब अध्यापकों से मिले तो उन्होंने कहा कि पानी की सप्लाई से उनका कोई लेना देना नहीं है, वह तो अपना आंदोलन कर रहे हैं व पानी की सप्लाई वाटर वर्क्स के कर्मी के भागने से बांधित हुई है। फिलहाल जिला प्रशासन जहां पानी की टैंकी पर चढे़ अध्यापकों से बातचीत शुरूञ् कर रहा है वही गर्मी के मौसम में आधा दर्जन के करीब गांव में रुकी पानी की सप्लाई को बहाल करवाने के प्रयास में जुटा है। इन गांवों में लगभग तीस हजार की आबादी रहती है। डीसी गुरकृतकृपाल सिंह का कहना है कि पानी की टैंकी पर चढ़े अध्यापकों की मांगों को बातचीत चल रही है। उक्त अध्यापक ईटीटी में बिना शर्त दाखिला देने की मांग कर रहे हैं इसमें अधिसूचना राज्य सरकार की तरफ से जारी की जानी है।

दिन के तापमान में फिर से हुई बढ़ोतरी, गर्मी से हुए लोग बेहाल

-दिन का तापमान 46.8 डिग्री तक पहुंचा, बाजारों में कर्फ्यू की स्थिति
-अस्पताल में मरीजों की तादाद बढ़ी डाक्टर ने दिए बचने के सुझाव 
बठिंडा। पिछले दस दिन तक मौसम में रही ठंडक के बाद दो दिन से तापमान फिर से चर्म पर पहुंच गया है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को जहां तापमान 40 डिग्री के आसपास था वही रविवार को तापमान 45 डिग्री व सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री पहुंचने ने आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित होकर रह गया। वही गर्मी के साथ लगने वाले बिजली कटों के कारण लोग बेहाल होकर रह गए है। बढ़ती गर्मी के कारण व्यापारिक प्रतिष्ठनों में भी मंदी की मार पड़ रही है। दिन के समय सड़कों में कर्फ्यू की स्थिति है। वही गर्मी के कारण अस्पतालों में मरीजों की तादाद फिर से बढ़ने लगी है। इसमें अधिकतर मरीज तेज बुखार, आंखों में जलन व नाक से खून निकलने वाले पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में पेट दर्द व चक्कर खाकर गिरने वाले मरीजों की तादाद भी बढ़ी है। सिविल अस्पताल में गर्मी से संबंधित दो सौ के करीब मरीज पिछले दो दिन में पहुंचे हैं। इसमें बच्चों के साथ बुजुर्ग लोगों की तादाद अधिक है। बच्चों के माहिर डाक्टर एनडी गोयल का कहना है कि गर्मी के कारण तेज बुखार, नाक से खून निकलने, एकाएक बेहोशी की स्थिति बनने के साथ आंखों में लाली की शिकायतें ज्यादा आती है। गर्मी केञ् दौरान पानी का सेवन अधिक मात्रा में करे वही दिन के समय घर, दफ़्तर से बाहर निकलते हुए सिर को टोपी से ढककर रखे या छाते का इस्तेमाल करे। निबू पानी के साथ ग्लूकोज का पानी अधिक पिए। सिर में गर्मी लगने पर ठंडे पानी की पट्टी रखे व सिर को ठंडे पानी से धोए। गौरतलब है कि पिछले 15 दिनों से मौसम में एकाएक तबदीली चल रही है। इसमें आसमान में बादल छाने के साथ बरसात होने के कारण तापमान में दस डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई थी। जून माह के शुरू में तो तापमान 38 डिग्री तक रहा जबकि पिछले दो दिन से तापमान एक बार फिर से बढ़ने लगा है। आज सोमवार का तापमान 46.8 डिग्री व न्यूनतम तापमान 29 डिग्री तक दर्ज किया गया। सोमवार को बढ़ती गर्मी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सुबह दस बजे के करीब ही तापमान 42 डिग्री के करीब रहा। इस बीच महानगर में दिन के समय बिजली कटों का सिलसिला भी तेज हो गया है। दिन में बाहरी क्षेत्रों में तो सात से आठ घंटे के बिजली कट लग रहे हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह सिलसिला 16 घंटे तक पहुंच गया है। बठिंडा की तहसील रामपुरा, भुच्चों, मौड़ व गोनियाना मंडी के साथ भगता में दिन के समय 16 घंटे के बिजली कट लग रहे हैं।

नाबालिग के अपहरण केस में नहीं दर्ज हो रहा मामला

बठिंडा। 12 साल की नाबालिग लड़की को भगाने वाले युवक के भाई को मौड़ मंडी पुलिस ने हिरासत में ले लिया लेकिन आरोपी लड़के के खिलाफ 48 घंटे बाद भी केस दायर नहीं किया है। इसे लेकर लड़की के परिजनों ने पुलिस के आला अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कर इंसाफ की गुहार लगाई है। जानकारी अनुसार प्रताप सिनटेस मिल मौड़ मंडी में काम करने वाले  राम लाल की 12 वर्षिय बेटी को उसके पड़ोस में बनी पानी की फैक्ट्री में काम करने वाला एक युवक एक माह पहले बहला फुस्लाकर भगा ले गया था। 19 मई 2010 को लड़की के परिजनों ने मौड़ पुलिस के पास मामले की शिकायत दर्ज करवाई लेकिन पुलिस ने किसी तरह की प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद चार दिन पहले पुलिस ने लड़की का अपहरण करने वाले लड़के के भाई को हिरासत में ले लिया लेकिन आरोपी लड़के को पकड़ने के लिए किसी तरह का प्रयास नहीं किया जा रहा है। लड़की के परिजनों का कहना है कि पुलिस मामले को दबाने के साथ दूसरे पक्ष के साथ समझौता करने के लिए दबाब डाल रहे हैं। उन्होंने एसएसपी बठिंडा से मामले में हस्तक्षेप करने व नाबालिग लड़की को भगाने वालों को गिरफ्तार करने की मांग की है।  


कार में नशीली दवा लादकर ले जा रहे दो गिरफ्तार
-नौजवानों को नशे के तौर पर बांटी जानी थी खेप  
बठिंडा। कार में नशीली दवाओं की खेप लादकर ले जा रहे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उक्त लोगों से भारी तादाद में नशीली दवा बरामद की गई है। जानकारी अनुसार कोठे मान सिंह वाला वासी हरप्रीत सिंह व बूटर थकूहा वासी जसवीर सिंह मारुति कार में सवार होकर विर्क कला की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर नाकाबंदी कर रखी थी। जांच पड़ताल के दौरान कार से 101 नशीले टीके, चार शीशी लोमोटीन, चार सौ गोलियां सहित सैकड़ों प्रतिबंधित दवाएं लाद रखी थी। इसका समुचित बिल भी उक्त लोगों के पास नहीं मिला। गिरफ्तार लोगों ने बताया कि वह इसे आगे तस्करी के लिए ले जा रहे थे। इसमें मंहगे दाम में नशा नौजवानों को बेचा जाता था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जमीन पर कब्जा करने के लिए खराब की फसल
-पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ दर्ज किया मामला
बठिंडा। गांव गोनियाना खुर्द में आपसी रंजिश के चलते एक किसान की खेतों में खड़ी यंत्र की खेती को बरबाद कर दिया व जमीन में कब्जा करने की कोशिश की। जानकारी अनुसार बिंदर सिंह पुत्र मेजर सिंह वासी गोनियाना खुर्द ने पुलिस केञ् पास शिकायत दर्ज करवाई कि जगसीर सिंह पुत्र गुलजार सिंह, सुरजीत सिंह, गुरदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह, अवतार सिंह व सुखदेव सिंह उसकी जमीन पर अवैध कब्जा करना चाहते थे। इसी केञ् चलते विगत सांय उक्त लोग टैरेक्टर लेकर उसके खेतों में आ गए व वहां खड़ी फसल को खराब कर दिया। इसके बाद उक्त लोगों ने जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। इसके बाद मामला पुलिस के पास दर्ज करवाया गया। जिसमें पुलिस ने कब्जा धारकों के खिलाफ केस दायर कर जमीन से कब्जा छुड़वाया।  

बरसाती पानी की निकासी योजना पर भ्रष्टाचार का साया

-पहले भी पक्का करने की बन चुकी योजना
-लाखों का हुआ था मामले में घपला
बठिंडा। जून-जुलाई में संभावित मानसून के चलते जिला प्रशासन बरसाती पानी से निपटने के लिए बैठकों का सिलसिला शुरूञ् कर रहा है। दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर बरसाती पानी की निकासी को लेकर नगर निगम, कौंसिले व नगर पंचायते चुप्पी साधकर बैठे हैं। यही नहीं सरकार की तरफ से करोड़ों रुपया नहरों, रजवाहों व सीवरेज सफाई के लिए जारी किया जाता है लेकिन इस फंड का समुचित इस्तेमाल नहीं होने से बरसातों में लोगों के लिए आफत बनी रहती है। प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिले की सरहिंद कनाल की खस्ता हालत को सुधारने के लिए डेढ़ दशक से कोई काम नहीं किया जा सका है। इसके लिए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने वाले नहरी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते इसकी सफलता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। इससे पहले कैञ्प्टन सरकार के कार्यकाल में नहरों की दशा सुधारने के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया था। इसमें जिले में 25 करोड़ रुपये खर्च कर नहरों को पक्का करने और खस्ता हालत को सुधारने की योजना भी शुरू कर दी गई, लेकिन बरसात में विभिन्न स्थानों में नहरों के साथ पक्के किए रजबाहों के टूटने के सिलसिले ने उक्त योजना में व्याप्त खामियों को उजागर करके रख दिया। मामले की जांच भी की गई लेकिन राजनीतिक प्रभाव में दबा दिया गया। इसमें जिले भर में छह नहरी विभाग के अधिकारियों पर गाज गिरी और उनका तबादला कर इतिश्री कर दिया गया। गौरतलब है कि जिले की सरहिंद नहर को पक्का करने और इसकी सफाई कर पानी के बहाव को तेज करने की योजना पिछले डेढ़ दशक से कागजों में सिमटी पड़ी है। कागजों में तो हर साल पक्का करने के साथ उनकी सफाई करवाई जाती है। इसमें लाखों रुपया खर्च भी दिखा दिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से कोई भी काम नहीं हो पाता। विभाग नहरों के आसपास बनने वाली दीवार को पांच ड्डुञ्ट तक बनाता है। इसमें नियमानुसार टूटे हिस्से की बरसात से पहले मरम्मत करवाई जाती है। लेकिन बठिंडा सरहिंद नहर में ही पिछले 15 साल से टूटी दीवारों को पूर्व की तरह छोड़ दिया गया है। दरार पडऩे की स्थिति में स्थानीय लोग ही इसमें मिट्टी डालने का काम करते हैं। इसी तरह की स्थिति नगर निगम व कौंसिल क्षेत्रों की है जहां अभी तक सीवरेज सफाई का काम शुरू नहीं किया जा सका है। महानगर में बिना बरसात के ही कई क्षेत्रों में सीवरेज का गंदा पानी सड़कों में इकट्ठा होकर लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता है। इसमें प्रताप नगर मुチय सड़क, अमरपुरा बस्ती, लाल सिंह बस्ती, संगुआना बस्ती, सिरकी बाजार, माल रोड़ का मध्य हिस्सा, हाजीरत्न चौक, पावर हाऊस रोड, गुरु नानकपुरा क्षेत्र ऐसे हैं जहां बरसात के दौरान चार से पांच फुट तक पानी भर जाता है। नगर निगम कमिश्नर रवि भगत का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज सफाई का काम शुरूञ् करने की हिदायते जारी कर दी गई है, इसमें बरसात शुरू होने से पहले काम पूरा कर लिया जाएगा। जिलाधीश गुरकिरत कृपाल सिंह ने बताया कि बठिंडा शहर को बरसातों व बाढ़ से बचाने के लिए 12 सेंटरों में बांटा गया है जिसके तहत प्रत्येक क्षेत्र का इंचार्ज एक सेंटर अफसर लगाया गया है ताकि सेंटरों में आने वाली समस्याओं का पहले से ही प्रबंध किया जा सके। संबंधित क्षेत्र में संबंधित सेंटर अफसर व ड्यूटी अधिकारी से संपर्कञ् करके उन्हें क्षेत्र से संबंधित समस्याओं बारे अवगत करवाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नहरी विभाग के अधिकारियों को टूटी नहरों की मरम्मत करने के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध पहले से करने की हिदायतें जारी की गई है।

विशाल रक्तदान शिविर...आंकड़ों की दौड़

"आप रक्तदान न करें, तो बेहतर होगा" एक चौबी पच्चीस साल का युवक एक दम्पति को निवेदन कर रहा था, जिसके चेहरे पर चिंता स्पष्ट नजर आ रही थी, क्योंकि वो जिस रक्तदाता के साथ आया था, वो एक कुर्सी पर बैठा निरंतर उल्टियाँ कर रहा था, जिसको बार बार एक व्यक्ति जमीन पर लेट के लिए निवेदन कर रहा था। युवक की बात सुनते ही महिला के साथ आया उसका पति छपाक से बोला, यह तो बड़े उत्साह के साथ खून दान करने के लिए आई है। महिला के चेहरे पर उत्साह देखने लायक था, उस उत्साह को बरकरार रखने के लिए मैंने तुरंत कहा, अगर आप निश्चय कर घर से निकले हो तो रक्तदान जरूर करो, लेकिन यहाँ का कु-प्रबंधन देखने के बाद मैं आप से एक बात कहना चाहता हूँ, अगर पहली बार रक्तदान करने पहुंचे हैं तो कृप्या रक्तदान की पूरी प्रक्रिया समझकर ही खूनदान के लिए बाजू आगे बढ़ाना, वरना किसी छोटे कैंप से शुरूआत करें। वो रजिस्ट्रेशन फॉर्म के बारे में पूछते हुए आगे निकल गए, लेकिन मेरे कानों में अभी भी एक आवाज निरंतर घुस रही थी, वो आवाज थी एक सरदार जी की, जो निरंतर उल्टी कर रहे व्यक्ति को लेट के लिए निवेदन किए जा रहा था, लेकिन कुर्सी पर बैठा आदमी आर्मी पर्सन था, वो अपनी जिद्द से पिछे हटने को तैयार नहीं था। यह दृश्य पटियाला के माल रोड स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी के भीतर आयोजित पंजाब युवक चेतना मंच के विशाल रक्तदान शिविर का था। इस विशाल रक्तदान शिविर में जाने का मौका बठिंडा की एक प्रसिद्ध रक्तदानी संस्था के कारण नसीब हुआ, लेकिन विशाल रक्तदान शिविर के कु-प्रबंधन को देखने के बाद, मेरी आँखों के सामने उन अभिभावकों की छवि उभरकर आ गई, जो अंकों की दौड़ में बच्चों को लगाकर उनको मानसिक तौर से बीमार कर देते हैं, और उनको पढ़ाई बोझ सी लगने लगती है। इस शिविर में अंकों की नहीं, शायद आंकड़ों की दौड़ थी, दौड़ कोई भी हो, दौड़ तो आखिर दौड़ है। दौड़ में आँख लक्ष्य पर होती है, शरीर के कष्ट को रौंद दिया जाता है जीत के जश्न तले। इस शिविर में रक्तदाताओं के लिए उचित प्रबंध नहीं था, शिविर को जल्द खत्म करने के चक्कर में रक्तदातों को पूरी प्रक्रिया से वंचित रखा जा रहा था, जिसका नतीजा वहाँ उल्टियाँ कर रहे रक्तदाताओं की स्थिति देखकर लगाया जा सकता था। बाहरी गर्मी को देखते हुए भले ही रक्तदान शिविर का आयोजन एसी हाल में किया गया था, जो देखने में किसी सिनेमा हाल जैसा ही था, पुराने समय में जो स्थिति टिकट खुलते वक्त बाहर देखने को नसीब होती थी, कल वो मुझे इस एसी हाल के भीतर रिफ्रेशमेंट वितरण के मौके देखने को मिली, रक्तदाता रिफ्रेशमेंट के लिए एक दूसरे को धक्के मार रहे थे, यह विशाल शिविर के कु-प्रबंधन का एक हिस्सा था। विशाल शिविरों का आयोजन रक्तदान लहर को आगे बढ़ाने के मकसद से किया जाता है, लेकिन कल वाला रक्तदान शिविर तो रक्तदान की लहर को झट्का देने वाला ज्यादा लग रहा था, एक सौ फीसदी विकलांग रक्तदाता वहाँ की स्थिति देखकर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के बाद जमा करवाने का हौसला नहीं कर सका, जो इससे पहले दर्जनों बार खूनदान कर चुका है। ऐसे विशाल शिविर रक्तदान की लहर को प्रोत्साहन देने की बजाय ठेस पहुंचाते हैं। छोटा परिवार सुखी परिवार की तर्ज पर चलते हुए ऐसे विशाल शिविरों से तो बेहतर है कि छोटे शिविर लगाओ, ताकि रक्तदान की लहर को कभी वैसाखियों के सहारे न चलना पड़े, जो आज अपने कदमों पर निरंतर दौड़ लगा रही है। चलते चलते एक और बात जो रक्तदाताओं के लिए अहम है, "रक्तदान शिविरों में रक्तदान करने वाले व्यक्तियों को रक्तदान करने की पूरी प्रक्रिया से अवगत होना चाहिए, ताकि उक्त विशाल शिविर में हुई अस्त व्यस्तता से बचा जा सके।"

कुलवंत हैप्पी- 76967-13601