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सोमवार, 5 जुलाई 2010

बाहरी इलाको में नहीं दिखाई दिया बंद का कोई असर

-स्कूल रहे पूर्ण तौर पर बंद, लोगों को झेलनी पड़ी परेशानी  
बठिंडा। ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि के  खिलाफ बीजेपी सहित तमाम विपक्षी दलों की ओर से आयोजित भारत बंद से सोमवार को पंजाब सहित देश के  विभिन्न हिस्सों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। बंद का बस सेवा के साथ उड़ानों और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। पंजाब में बसों का आवागमन बंद रहा जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बठिंडा सहित राज्य के प्रमुख जिलों में शहरी इलाकों में बंद का असर रहा लेकिन ग्रामीण व बाहरी क्षेत्र में इसका असर न के बराबर रहा। बीजेपी समेत विपक्ष के कई नेता सडक़ों पर उतर चुके हैं और जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी तरफ सुरक्षा के लिहाज से सभी स्कूलों व कालेजों ने सोमवार को छुट्टी की घोषणा कर दी थी। वही आपात सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रही। लखनऊ में बीजेपी नेता अरुण जेटली और मुख्तयार अब्बास नकवी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख बाजारों में सरकार का पुतला जलाया व बढ़ी कीमतों को तत्काल वापिस लेने की मांग रखी। इस दौरान किसी तरह की अनहोनी को टालने के लिए सुरक्षा के कडे़ इंतजाम किए गए थे। वही पुलिस पार्टी विभिन्न स्थानों में गश्त लगाती रही। पंजाब के बस अड्डों से बसों का संचालन सुबह से प्रभावित है। यहां कई जगहों पर विभिन्न दलों के  कायकर्ताओं ने रेल सेवाओं को भी बाधित करने का प्रयास किया। दूसरी तरफ बठिंडा शहर के कुछ  इलाकों में बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद हैं जबकि बाहरी क्षेत्रों में काम धंधा रोजमर्जा की तरह चल रहा है। धोबी बाजार में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया व सरकार का पुतला जलाया। इस दौरान सुरक्षा के कडे़ इंतजाम रहे। बंद का शिव सेना सहित कई दलों ने समर्थन किया था। मुंबई में बीजेपी के सीनियर नेता किरीट सोमैया समेत पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को सोमवार को उस समय हिरासत में ले लिया गया जब वे ट्रेनों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। पुणे में बंद समर्थकों ने कई जगहों पर पथराव किया और 12 बसों को नुकसान पहुंचाया। बिहार में भी बंद का व्यापक असर दिख रहा है। पटना समेत राज्य के  कई क्षेत्रों में बंद समर्थकों ने रेलमार्ग और सड़क जाम कर बसों और ट्रेनों की आवाजाही को रोकने की कोशिश की। पटना के राजेंद्रनगर टर्मिनल के पास महिला बंद समर्थकों ने दानापुर-हावड़ा एक्सप्रेस को घंटों रोके रखा। बाद में पुलिस ने बंद समर्थकों को पटरी से हटाया और फिर यह रेलगाड़ी रवाना हो पाई। यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में बंद के कारण सभी प्राइवेट स्कूलों को सोमवार को बंद कर दिया गया है। बंद के  कारण राज्यभर में सुरक्षा के  व्यापक प्रबंध किए गए हैं। रेल प्रशासन ने रेलवे पुलिस बल को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। प्रदर्शनकारियों के स्टेशन पर आते ही रेलगाड़ियों का परिचालन बंद करने का निर्देश दिया गया है। 

हमें महंगाई से बचाने के लिए बंद कितना सार्थक

हरिदत्त जोशी
बठिंडा। दस साल से मंहगाई निरंतर बढ़ रही है, सरकार के साथ विपक्ष लंबे समय तक चुप्पी साधकर बैठा रहा लेकिन आज एकाएक भाजपा ने दूसरे दलों के साथ भारत बंद की घोषणा कर दी। इससे पहले भाजपा के साथ पूरे विपक्ष की चुप्पी यूपीए सरकार की मनमानी का समर्थन करते रहे जिसका नतीजा यह रहा है कि दाले बीस रुपये से एक सौ बीस रुपये तक पहुंच गई और रसोई गैस का सिलेंडर दो सौ से पौने चार सौ तक पहुंच गया। अगर समय पर यूपीए सरकार की मनमानी रोकी होती तो देश की जनता इतनी बेहाल नहीं होती। लोकतंत्र में संघर्ष और अपना विरोध जताने का सभी को अधिकार है लेकिन इस अधिकार की भी कुछ  सीमाएं है जिसे लाघकर आप किसी का हित नहीं कर सकते हैं। हाल में आप और हमको महंगाई से बचाने के  लिए जनता के  हितैषी आज सडक़ों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि अगर आज सारी दुकानें बंद रहें और गाड़ियां नहीं चलें तो महंगाई कम हो जाएगी। इसके  लिए वे रेलवे स्टेशनों और सड़कों पर रुकावटें खड़ी कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि आज देश भर में कोई भी पहिया न चले। जो लोग इस बात को नहीं मानते कि बंद आयोजित करने से कोई फर्क  पडता है, उनको ये सबक सिखाने के लिए तैयार खडे़ हैं। अब इन नौसखियों को कौन समझाएं कि लोगों को आंदोलन के लिए भड़काने वाले उनके दिग्गज सरकार के साथ मिले हुए है। सरकार की हर गतिविधि और निर्देशों में उनकी सहमती होती है अब आगे कुछ  राज्यों में चुनाव हा और जनता को बेवकूञ्फ बनाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं जो न तो देश के हित में है और न ही लोगों के हित में है। टेलीविजन खोलकर देखों तो खबरे आ रही है कि प्रदर्शनकारियों ने देश भर में हो हल्ला मचाया ,उन लोगों को थप्पड़ मारे जो ट्रेन पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। कहीं-कहीं वे बसों पर पथराव कर रहे हैं, कहीं-कहीं टायरों की हवा निकाल रहे हैं ताकि सडक़ों पर यातायात रुक जाए। पंजाब में तो बस सेवाएं ही बंद कर दी, इसमें लाखों लोग आवागमन नहीं कर पा रहे हैं। हजारों लोग ऐसे है जो अपना इलाज करवाने के लिए सीएमसी, डीएमसी या फिर पीजीआई में जाते हैं। अगर इन लोगों का शारीरिक नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेवारी किसकी होगी। क्या मंहगाई रोकने के इस ड्रामे से मंहगाई रूक जाएगी, कभी नहीं। न तो यूपीए सरकार गिरेगी और न ही मंहगाई रूपी दानव कम होगा।  इन सभी दलों के नेता अभी घरों में सुस्ता रहे हैं और टीवी चैनलों पर ये तस्वीरें देखकर हर्षित हो रहे हैं। वाह, क्या कमाल कर दिया। सडक़ों पर गाडिय़ों की कतार लग गई है। लोग परेशान हैं कि आगे भी नहीं जा सकते, पीछे भी नहीं। लेकिन यह तो इनकी सजा है जो इन हितैषियों ने उनके  लिए मुकर्रर की है। इन लोगों के डर से सभी लोग घरों में सिमट गए, स्कूल बंद हो गए। सड़कें  जाम हो गईं और मैं आपको गारंटी दे सकता हूं कि इस बंद से न महंगाई डरेगी न सरकार। तो ऐसे कितने भी बंद करा लो, यह यूपीए सरकार तो रहेगी और साथ में महंगाई भी रहेगी। लेकिन क्या यह जरूरी है कि महंगाई से परेशान जनता इस बंद नाम के तमाशे के कारण और परेशान हो।

हल स्थाई हो, अस्थाई नहीं

कुछ महीने पहले देश की एक अदालत ने केंद्र से राय मांगी थी कि क्या वेश्यावृत्ति को मान्यता दे दी जाए, यानि इसको अपराध के दायरे से बाहर कर दिया जाए, क्योंकि देश में वेश्यावृत्ति बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर अदालत द्वारा केंद्र से राय मांगने का सीधा अर्थ है, अगर किसी चीज को कानून रोकने में असफल हो रहा है तो उसको मान्य दे दी जाए, ताकि अदालत का भी कीमत समय बच जाए। किसी मुश्किल का कितना साधारण हल है, कि उसको वैध करार दे दिया जाए, जिसको रोकने में कानून असफल है। कोर्ट ने एक बार भी केंद्र से नहीं कहा कि वेश्यावृत्ति की पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए एक टीम का गठन किया जाए। कोर्ट ने सवाल नहीं उठाया कि क्यों कभी पुलिस प्रशासन ने कोर्ट में वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाओं के दूसरे पक्ष को उजागर नहीं किया। आखिर वेश्यावृत्ति हो क्यों रही है? आखिर क्यों देश की महिलाएं अपने जिस्म की नुमाईश लगा रही हैं?। अगर कोर्ट इन सवालों में से एक भी सवाल को केंद्र से पूछती तो केंद्र अदालती कटघरे में आ खड़ा नजर आता, क्योंकि वेश्यावृत्ति के बढ़ते रुझान के लिए हमारी सरकारें भी जिम्मेदार हैं, जो निम्न वर्ग को केवल वोटों के लिए इस्तेमाल करती हैं और उनके उत्थान के लिए कोई कार्य नहीं करती। ऐसे में पेट की आग बुझाने के लिए गरीब घरों की महिलाएं लोगों के बिस्तर गर्म करने के लिए निकल पड़ती हैं। अब तो वेश्यावृत्ति में कालेज की लड़कियां भी शुमार हो रही हैं, कारण है कि वो सुविधाओं भरी जिन्दगी जीना चाहती हैं। हम समस्याओं को जड़ से नहीं बल्कि बाहरी स्तर से हल करने के तरीके खोजते हैं। अभी कल की ही बात है, मेरा किसी काम को लेकर धोबियाना रोड़ पर जाना हुआ, श्री गुरूनानक देव स्कूल के पास सड़क पर दोनों तरफ आने जाने के लिए एक आधिकारिक रास्ता है, लेकिन उसको प्रशासन ने बंद कर दिया। बंद करने का कोई भी छोटा मोटा कारण हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी नेता के आगमन पर उसको बंद किया हो, और फिर प्रशासन को खुलवाना भूल गया हो। प्रशासन ने वो रास्ता तो बेरियर लगाकर बंद कर दिया, क्योंकि ट्रैफिक पुलिस के पास कर्मचारियों की कमी तो हो सकती है, पर बेरियरों की नहीं। इसका अंदाजा पॉलिथीनों की तरह जगह जगह बिखरे पड़े मुसीबतों को जन्म दे रहे बेरियरों से लगाया जा सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि वो रास्ता हादसों का कारण बन रहा हो इसलिए बंद कर दिया गया, लेकिन क्या ऐसा करना जायज है, अगर जायज है तो बरनाला रोड़ को सबसे पहले बंद कर देना चाहिए, जिसको खूनी रास्ते के नाम से भी पुकारा जाता है। प्रशासन ने उक्त दस बारह फुट के रास्ते को बंद कर दिया, लेकिन लोगों ने एक फूट चौड़ा रास्ता उससे थोड़ा से आगे डिवाईडर तोड़कर बना लिया। शायद प्रशासन भूल गया कि नदी के बहा को कभी दीवारें निकालकर नहीं रोका जा सकता, क्योंकि पानी अपने रास्ते खुद बनाना जानता है। जनता भी पानी के बहा जैसी है। गलियों में बने हम्प भी इसी बात की ताजा उदाहरण हैं। स्थानीय शहरी इलाकों की गलियों में बने हम्प लोगों के वाहनों की स्पीड को तो कम नहीं कर पा रहे, लेकिन लोगों का ध्यान जरूर खींच रहे हैं। जब मनचले वहां आकर जोर से ब्रेक मारते हैं, और ब्रेक लगने के वक्त निकालने वाली वाहन के पुर्जों की आवाज लोगों का ध्यान खींचती है। हम समस्या की जड़ को खत्म करने की बजाय बाहरी स्तर पर काम करते हैं, जिनके नतीजे हमेशा ही शून्य रहते हैं। मानो लो, देश भर के सरकारी स्कूलों की चारदीवारी को आलीशान बना दिया जाए, क्या वो देश की शिक्षा प्रणाली के दुरुस्त होने का प्रमाण होगा, नहीं क्योंकि वो सुधार केवल बाहरी रूप से हुआ है। अगर देश की शिक्षा प्रणाली का सुधार करना है तो उसकी जड़, मतलब टीचर को ऐसे प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वो एक पढ़े लिखे इंसान के साथ एक समझदार व्यक्ति को स्कूल से बाहर रुखस्त करे। वरना देश की अदालत हर बार किसी न किसी अपराध को अपराध मुक्त करने पर सरकार से राय मांगेगी।
कुलवंत हैप्पी 
76967-13601