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गुरुवार, 22 जुलाई 2010

मानसून ने बढ़ा दिए मंहगाई में सब्जियों के दाम

-उत्तरी भारत में चौथे दिन भी बरसात की रिमझिम जारी
-टमाटर सहित कई सब्जियों के भाव दो गुणा बढे़  
बठिंडा। बढ़ती महंगाई से पहले ही आम आदमी परेशान है और अब मॉनसून आग में घी का काम कर रहा है। जी हां, बारिश की फुहारें भले आपको तपती गर्मी से राहत दे रही हों पर भारी बारिश के  चलते खेतों में पानी भरने और यातायात बाधित होने से सब्जियों खासकर टमाटर की कीमतों में आग लग गई है। सबसे ज्यादा परेशानी पंजाब और हरियाणा में हुई बारिश के  कारण रही है। हरियाणा में सडक़ों पर पानी भरने से कई ट्रक रास्ते में फंसे है। जिससे दिल्ली में सब्जियों की आवक कम हो गई है। भारी बारिश से खेतों मे पानी भर गया है, जिसके  कारण सब्जियों की खेती को नुकसान हुआ है। यही वजह है कि बीते कुछ दिनों में सब्जियों की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। कुछ दिनों पहले तक २० रुपए किलो के  भाव बिकने वाला टमाटर अब ४० रुपए किलो के भाव तक बिक रहा है। टमाटर के  अलावा तोरी, लौकी, भिंडी, शिमला मिर्च, प्याज जैसी दूसरी सब्जियों के  दाम में भी तेजी देखी जा रही है और ये सभी सब्जियां २५ से ५० फीसदी तक महंगी हो गई हैं। एक हफ्ते के  भीतर में ही १५ रुपए किलो बिकने वाली भिंडी अब २५ रुपए किलो के  भाव बिक रही है। ३० रुपए किलो के  भाव बिकने वाला शिमला मिर्च ४५ रुपए किलो बिक रहा है। प्याज भी १० रुपए प्रति किलो से बढक़र १५ रुपए प्रति किलो के भाव पर पहुंच गया है। लौकी का भाव १५ रुपए से बढक़र २२ रुपए किलो हो गया है। लेकिन ज्यादा चिंता आने वाले दिनों को लेकर हो रही है। जानकार यह कह रहे हैं कि अगर पंजाब हरियाणा में हालात जल्दी नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में सब्जियों की कीमत में और इजाफा देखना को मिल सकता है।
मानसून के  दोबारा सक्रिय होने के  बाद लगातार चौथे दिन उत्तर भारत में बारिश हो रही है। बठिंडा में भी वीरवार की सुबह बरसात हुई जबकि पूरा दिन आसमान पर बादल छाए रहे। बारिश से हिमाचल व पंजाब के  कई हिस्सों में यातायात बाधित हुआ है। हिमाचल के  कई हिस्सों में संपर्क मार्गों पर लहासे गिरने से यातायात बाधित हुआ है। दूसरी तरफ बरसात के बाद सब्जियों के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। पंजाब में लगातार बारिश जारी है और राज्य की बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। नदी में पानी बढऩे और गाद की वजह से बिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन रुका पड़ा है। इधर, चंडीगढ़ समेत पंजाब और हरियाणा में रुक रुककर बारिश जारी है। चंडीगढ़ में सुबह से ही आसमान पर छाए बादल दोपहर बाद बरसने शुरू  हो गए है। पंजाब और हरियाणा में भी बिखरे रूप से बारिश हो रही है। बारिश से पंजाब और हरियाणा में किसानों को राहत मिली है। लेकिन पिछले दिनों बाढ़ से प्रभावित इलाकों के  लोगों को फिर बाढ़ की चिंता भी सता रही है। मानसून की इस बारिश से लोगों को गरमी और उमस से भी राहत मिली है। पंजाब में ज्यादातर हिस्सों में वीरवार को दो बजे तक पारा ३० डिग्री से नीचे चल रहा है। मौसम विभाग के  चंडीगढ़ केंद्र के  निदेशक सुरिंद्र पाल के  मुताबिक मानसून के  सक्रिय होने के  साथ ही हिमाचल में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का भी प्रभाव है। इसलिए उत्तर भारत में बारिश हो रही है। उनका कहना है कि अभी अगले एक दो दिनों तक उत्तर भारत में बारिश जारी रहेगी।

बठिंडा महानगरी में जाम हुआ आम, लोग परेशान

-ट्रैफिक लाईटें होने के बावजूद भी जाम की स्थिति विकराल 
बठिंडा। महानगरी में रोजाना लगते भारी जाम आम लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं। हालांकि पूरा दिन ट्रैफिक पुलिस धूप व बरसात की परवाह न करते हुए अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद देखी जा सकती है, बावजूद जहां विभिन्न मार्गो पर विशेष कर श्री हनुमान चौक सहित रेलवे स्टेशन के  साथ लगते क्षेत्र पर अकसर जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। जाम लगने का मुख्य कारण हालांकि ट्रैफिक लाईटों का बंद होना है वही विभिन्न चौकों में निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज तथा हर वाहन चालक को पहले जाने की जल्दी भी जाम जैसी विकट स्थिति बनते रहने का बड़ा कारण है। बस स्टेंड स्थिति विभिन्न चौक में कभी लाईट गुल होने से ट्रैफिक लाईन बंद रहती है तो कभी तकनीकि खराबी आने से कई दिनों तक ट्रैफिक लाईट नहीं जल पाती है। वर्तमान में हाजीरत्न चौक से डबवाली रोड़ की तरफ जाते रोड़, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड के चौक, श्री हनुमान चौक के इलावा नहर पुल के पास हर समय जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। जिसमें वाहनों को हार्न बजाते व एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ करते सुगमता से देखा जा सकता है। वैसे शहर की पुरानी बनावट भी रोजाना लगते जाम का एक कारण है। बठिंडा से बाहर जाने के लिए किसी भी हाईवे पर ट्रैफिक की तुलना में जरूरत से कहीं कम चौड़ा राजमार्ग है। शहर के भीतरी इलाकों में तो स्थिति इससे भी बदतर है जिसमें मोहना चौक, किला रोड, धोबी बाजार व किकर बाजार रोड में भारी वाहनों की रोक के बावजूद व्यापारी माल से लदे ट्रक खडे़ कर देते हैं जो पूरी सड़क को रोककर रखते हैं।  डबवाली रोड पर तो हर ३० मिनट बाद रेलवे फाटकों का बंद होना जाम को बढ़ावा दे रहा है। यहां अकसर लगने वाले जाम में वीआईपी ही नहीं, बल्कि मरीजों को ले जाने वाली एंबूलेंस गाडिय़ां भी फंसी देखी जा सकती हैं। इन्हें पहले निकालने के  चक्कर में ट्रैफिक पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ट्रैफिक पुलिस का कहना कि ट्रैफिक पुलिस के  जवान अपनी ड्यूटी पर पूरा दिन मुस्तैद रहते हैं लेकिन सख्ती के बावजूद जल्दी जाने के  चक्कर में वाहन चालक सहयोग नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे ओवरब्रिज तथा बाईपास का निर्माण होने के बाद ही इस समस्या से स्थायी छुटकारा मिल सकेगा।

सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं प्रेस लिखे वाहन

-कई लोगों का तो प्रेस और पत्रकारिता से दूर का भी संबंध नहीं
-अपने फायदे के साथ लोगों पर रौब झाड़ने के लिए करते हैं गलत इस्तेमाल 
बठिंडा। व्यवसायिक फायदा उठाने व लोगों पर रौब झाड़ने के लिए इन दिनों मीडिया के लिए प्रयुक्त होने वाले प्रेस का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। मोटरसाइकिलों से लेकर कारों में प्रेस लिखकर गाड़ी सड़कों पर आवागमन करती आसानी से दिखाई देते हैं। इसमें ज्यादातर लोग ऐसे है जिनका मीडिया से दूर-दूर तक का कुछ नहीं लेना है लेकिन उन्होंने कार व मोटरसाइकिल में आगे व पीछे बडे़-बडे़ अक्षरों में प्रेस लिखकर लगा रखा है। इसमें कई लोग तो ऐसे है जो मीडिया कर्मी के रिश्तेदार या फिर दोस्तों की श्रेणी या फिर जानपहचान वालों में होते हैं। इस तरह के वाहनों को पुलिस कर्मचारी भी जांच पड़ताल नहीं करते हैं जिससे कई बार उक्त लोग इन वाहनों का इस्तेमाल गैरकानूनी कार्यों के लिए करते हैं। पिछले दिनों प्रेस लिखे कई ऐसे वाहन पुलिस ने पकडे़ हैं जिसमें गैरकानूनी तौर पर दवाईयां या फिर टैक्स चोरी का सामान लादकर लाया जा रहा था। इस मामले में बठिंडा जिले के विभिन्न सामाचार पत्रों के प्रतिनिधि जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई करने की मांग कर चुके हैं लेकिन इसमें आज तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। तीन साल पहले पुलिस प्रशासन ने प्रेस लिखे ऐसे वाहनों की जांच पड़ताल करवाने व इन्हें जब्त करने का अभियान शुरू किया था। इसके तहत सभी अखबारों के प्रतिनिधियों से उनके यहां काम करने वाले लोगों की सूचि मांगी गई थी। इसमें पत्रकार का नाम, पता, फोन नंबर के इलावा इस्तेमाल किए जा रहे वाहन का नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस का नंबर मांगा गया था। इस मुहिम में प्रशासन की तरफ से जायज पत्रकारों को एक परिचय पत्र जारी किया जाना था। इस परिचय पत्र के धारक ही अपने वाहनों में प्रेस लिख सकते थे लेकिन यह मुहिम भी प्रशासन पूरी नहीं कर सका और उसने फार्म जमाकर आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। फिलहाल प्रशासन की ढिली नीतियों के कारण सड़कों में बेखौफ दौड़ते प्रेस लिखे वाहन लोगों के साथ पुलिस कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। इस मामले में चिंताजनक पहलु यह है कि इस तरह के वाहनों से गौरकानूनी कार्यों के साथ असामाजिक तत्व व देश द्रोही तत्वों को संरक्षण मिल सकता है जो किसी भी समय प्रेस के नाम पर किसी अनहोनी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस तरह के तत्वों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को जल्द सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। यहां बताना जरूरी है कि अधितकर वाहन चालक को अपने वाहनों में प्रेस मात्र इसलिए लिखाकर रखते हैं कि किसी चौक व नाके में पुलिस कर्मी उन्हें नहीं रोकेगा व दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। इस क्रम में तत्कालीन एसपी सीटी निलाभ किशोर ने एक मुहिम के तहत प्रेस लिखे वाहनों की जांच शुरू की थी तो उसमें पाया गया कि ७० फीसदी लोगों ने अपने वाहनों में प्रेस इसलिए लिखाकर रखा है कि उन्हें कोई पत्रकार जानता है या फिर किसी अखबार व पत्रिका से उन्होंने जानपहचान के आधार पर प्रेस का कार्ड बनवा रखा है जबकि खबरे भेजने या फोटो खीचने जैसे कार्यों से उनका कोई भी लेना देना नहीं होता है। समाज सेवी राकेश नरुला का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अखबार प्रतिनिधियों को भी आगे आना होगा उन्हें ऐसे लोगों को परिचय पत्र जारी करने से गुरेज करना चाहिए जिनका पत्रकारिता से किसी तरह का लेना देना नहीं है व प्रेस लिखकर वह प्रेस का इस्तेमाल करते हैं। वही जिला प्रशासन को भी इस बाबत अखबार प्रतिनिधियों के साथ मिलकर ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे इस तरह के गौरखधंधे पर रोक लगे।