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सोमवार, 26 जुलाई 2010

300 की भर्ती के लिए 2722 उम्मीदवार

महिला पुलिस भर्ती कैंप
एमबीए व एमए पास भी अजमा रही हैं भविष्य
बठिंडा : स्थानीय पुलिस लाइन स्थित पंजाब पुलिस पब्लिक स्कूल के खेलकूद परिसर में सात दिवसीय भर्ती शिविर का आज शुभारंभ किया गया। शिविर में आईजी पटियाला व रेंज भर्ती बोर्ड के चेयरमैन पीएस गिल व बठिंडा के एसएसपी सुखचैन सिंह गिल विशेष तौर पर पहुंचे, जिनकी देखरेख में भर्ती रैली का शुभारंभ किया। शिविर के दौरान 300 महिला पुलिस कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार भर्ती के लिए छह जिलों बठिंडा, मानसा, मुक्तसर, मोगा, फिरोजपुर, फरीदकोट से लगभग 2722 लड़कियों ने आवेदन पत्र दाखिल किए। इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास व 5.3 कद होना लाजमी है। रैली में इस बार एमबीए, एमए व अन्य डिग्री प्राप्त लड़कियों ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, जबकि भर्ती के लिए आवेदन करने वालों को बारहवीं कक्षा पास होना ही अनिवार्य था। इस रैली में ज्यादा पढ़ी लिखी लड़कियों का आना आपने आप में एक चौंकाने वाली बात ही नहीं बल्कि 300 सीटों के लिए इतने ज्यादा उम्मीदवार आना बेरोजगारी को उजागर करता है। भर्ती में ग्रामीण क्षेत्र से ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र से भी लड़कियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।

डिप्टी कमिश्नर को सौंपा मांग पत्र
बठिंडा : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा शिक्षा के व्यापारीकरण व शिक्षा का स्तर सही रखने के उदेश्य से एक 11 मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री पंजाब के नाम डिप्टी कमिश्नर गुरकृत कृपाल को सौंपा गया। इस मौके पर परिषद के सह मंत्री आशुतोष तिवारी ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का बुरा हाल है। जहां देखो शिक्षा को व्यापार बनाया जा रहा है। केजी से लेकर पीजी तक की फीस पर सरकार का कोई भी नियंत्रण नहीं है। इस मौके पर जिला संयोजक प्रतीक शर्मा ने कहा कि परिषद आने वाली 26 अगस्त को 11 मांगों को लेकर मिनी सचिवालय के बाहर विशाल धरना दिया जाएगा। इस मौके पर परिषद के हरियाणा संगठन मंत्री श्रीनिवास शर्मा व पंजाब केग संगठन मंत्री सूरज भारद्वाज व प्रदेश के छात्र नेता उपस्थित रहेंगे।
डिप्टी कमिश्नर को मांग पत्र सौंपने के बाद ऋषि, अमन, उनित, हिमांशु व नितिश आदि ने मांगों के बारे में बताते हुए कहा कि छात्र संघ चुनावों की तुरंत बहाली हो, क्योंकि एससी ने निर्देश दिए हुए हैं कि पंजाब व पूरे देश में लिंग दोह कमेटी की सिफारिशों को मुख्य रखते हुए चुनाव हो। इसके अलावा पंजाब की तीनों यूनिवर्सिटियों का शुल्क एक जितना हो, फीसों में जो अंतर है, उसे खत्म किया जाए।

शांतिमयी हुई खढ़्डों की बोली
बठिंडा : स्थानीय आईटीआई के समीप स्थित उद्योग भवन में डिप्टी कमिश्नर गुरकृत कृपाल सिंह की अध्यक्षता में खढ़्डों नीलामी की गई, जिसमें अलग अलग जिलों से बड़े बड़े ठेकेदार व उद्योगपति पहुंचे। इस मौके पर बठिंडा जिले के दो खढ़्डों की नीलामी 1.70 लाख तक पहुंची, जबकि फरीदकोट के 41 खढ़्डों की नीलामी 1.82 करोड़ तक पहुंची। बठिंडा क्षेत्र से बोली जीतने वाले दविंद्र सिंह ने बताया कि उक्त काम छह महीनों का है, लेकिन हाईकोर्ट से मंजूरी अभी आनी बाकी है। इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा एसडीएम बठिंडा, बीडीपीओ व अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

कैदियों की भूख हड़ताल नौवें दिन भी जारी रही

-कई कैदियों की हालत खराब, जेल प्रशासन के सभी प्रयास विफल   
बठिंडा। केंद्रीय जेल बठिंडा में १८ जुलाई से चल रही कैदियों की भूख हड़ताल नौंवे दिन भी जारी रही। इस दौरान कई कैदियों की हालत बिगड़ने से जहां जेल प्रशासन के हाथ पांव फूल गए है वही जिला प्रशासन की जान भी आफत में आई हुई है। जेल में कितने कैदी गंभीर है इसे लेकर प्रशासन किसी तरह का खुलासा नहीं कर रहा है। इसमें शनिवार की रात एक कैदी की मौत होने के बाद जेल प्रशासन ने रविवार की रात कैदियों को जबरन खाना खिलाने का प्रयास किया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। वही जेल प्रशासन ने कैदियों को उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन भी दिया लेकिन कैदी प्रेक्टिकल तौर पर हर मांग को पूरा करने के बाद ही भूख हड़ताल समाप्त करने पर अड़े़ हुए है। इससे पहले पिछले सप्ताह शुक्रवार को भी कैदियों को प्रशासन ने मनाने का प्रयास किया था व इस दौरान कैदियों ने भूख हड़ताल तोड़ खाना खा लिया लेकिन इसमें जमीनी स्तर पर किसी तरह की कार्रवाई न होने पर कैदियों ने अगले ही दिन फिर से भूख हड़ताल शुरू कर दी।
इसमें शनिवार की रात एक हवालाती गुरसेवक सिंह पुत्र रूप सिंह गांव माड़ी थाना नथाना की शनिवार रात रहस्यमयी हालतों में मौत हो गई थी। इसके बाद जेल में कैदियों ने रविवार को पूरा दिन जमकर हंगामा बरपाया। इस दौरान प्रशासन को स्थिति कंट्रोल करने के लिए भारी मश्कत करनी पड़ी थी। इसमें रविवार की रात प्रशासन ने डाक्टरों का एक पैनल गठित कर भूख हड़ताल पर चल रहे आठ सौ के करीब कैदियों की मेडिकल जांच करवाने का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली वही कैदियों को खाना खिलाने के लिए की गई कोशिश भी सफल नहीं हो सकी। गौरतलब है कि  १८ जुलाई को ट्रायल पर चल रहे १२० के करीब कैदियों ने हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था लेकिन तीन दिन बाद ही जेल के अन्य नौ सौ के करीब कैदी भी उनके साथ मिल गए। अब कैदी जेल में मूल सुविधा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। कैदियों का कहना है कि जेल में स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है वही खाना सही ढंग से नहीं मिलता है। जेल में स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। इन तमाम मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की जा रही है। जेल में कैदियों की मांगों को लेकर दौरा करने वाले एसडीएम केपीएस माही का कहना है कि कैदियों की मांगों को लेकर उन्होंने पूरी जांच की है व इसमें गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसमें कैदियों को पेश आ रही समस्या को जल्द हल कर दिया जाएगा। 


किराये पर हासिल की दुकान पर ही कब्जा कर बैठा

-मकान मालिक पर दबाब बनाने के लिए झूठी शिकायतों का पुलिंदा
-राजनीतिक दबाब में पुलिस भी दे रही है कब्जा जमाने वाले का साथ  
बठिंडा। गांधी मार्किट में पिछले लंबे समय से दुकान पर कब्जा जमाकर बैठे दुकानदार सीनाजोरी पर उतर आया। यही नहीं भगवान चाट के नाम से मशहूर दुकानदार पिछले लंबे से उक्त दुकान पर किराये पर रह रहा है लेकिन वर्तमान मे जब मकान मालिक ने अपनी हीं दुकान की छत्त पर निर्माण करने के लिए प्रयास किया तो दुकानदार गुंडागर्दी पर उतर आए। उन्होंने न सिर्फ मकान मालिक पर हमला किया बल्कि पुलिस के पास कब्जा जमाने की झूठी शिकायत दर्ज कर दबाब बनाने का प्रयास किया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामले में हैरानी इस बात से होती है कि पुलिस ने भी मामले में पूरी जांच पड़ताल किए बिना ही दुकान मालिक के साथ दो अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया। यही नहीं कोतवाली थाना के प्रभारी बलविंदर प्रेमी इस मामले में किसी तरह के प्रभावी तथ्य के बिना ही आला अधिकारियों के सामने कुछ व्यापारी नेताओं के दबाब में थपथपी लेने का प्रयास करते रहे। 
गौरतलब है कि गांधी मार्किट में भगवान चाट भंडार के नाम से एक दुकान किराये पर हासिल की थी। इसमें मकाम मालिक से कहा गया था कि जब भी उसे जरूरत होगी वह दुकान खाली कर देगा। वर्तमान में काम चलने के बाद भगवान चाट भंडार के मालिक के मन में बेइमानी आ गई व उसने दुकान कब्जा करने की नियत से पुलिस के पास झूठी शिकायते दर्ज करवानी शुरू कर दी। इसमें कमलदीप व बग्गा वर्तमान में दुकान के असल मालिक है। उन्होंने कुछ समय पहले भी भगवान चाट भंडार के मालिक से दुकान खाली करने का आग्रह किया लेकिन उसने दुकान खाली करने की बजाय बठिंडा के एक अकाली नेता के साथ पुलिस पर दबाब बनाना शुरू कर दिया।
यही नहीं तीन दिन पहले दुकान मालिक ने भगवान चाट भंडार को सूचित किया कि वह अपने व्यक्तिगत काम के लिए दफ्तर दुकान के ऊपरी छत्त पर बनाना चाहता है। इस बाबत उसे सूचित भी कर दिया गया कि सोमवार की सुबह वह काम शुरू करेंगे। इसमें भगवान चाट भंडार ने सहमती जता दी लेकिन मन में पाप के चलते एक साजिश के तहत भगवान चाट भंडार के मालिक व उसके नौकरो ने उस समय शोर मचाना शुरू कर दिया जब मालिक अपने साथियों के साथ दुकान के पास पहुंचे। दुकानदार ने मार्किट में शोर मचाया कि दुकान मालिक बंदूक की नोक पर कब्जा करना चाहता है। उसकी बात पर आसपास के दुकानदारों ने भी विश्वास कर लिया। इसके बाद मामला पुलिस कोतवाली के पास पहुंचा। पुलिस ने भी बिना किसी जांच पड़ताल के दुकान मालिक व राजनीतिक दबाब के बीच दोनों दुकान मालिक व उसके साथ खडे़ एक पत्रकार को हिरासत में ले लिया। यहां बताना जरूरी है कि उक्त पत्रकार मनीश कार्की पंजाब का सच अखबार का प्रसार प्रबंधक भी है, जो एक जिम्मेवारी वाला पद है और मौके पर उक्त पूरे घटनाक्रम को देख रहा था। इसमें हैरानी इस बात पर होती है कि पुलिस दावा कर रही है कि पत्रकार भी मामले में शामिल था। एक बार मान भी लेते है कि पत्रकार मौके पर उन लोगों के साथ था तो वहां वह कोई गलत काम नहीं कर रहा था वही अगर किसी मकान व दुकान मालिक की जमीन पर कोई जबरन कब्जा कर रहा है तो उसे रोकना या फिर जायज का पक्ष लेना कोई भी गलत काम नहीं होता है। दूसरी तरफ यह एक पत्रकार का फर्ज भी होता है। अब पुलिस अधिकारी व थाना प्रभारी कानून की पढ़ाई दूसरों को सिखाने लगे और मनमाने ढंग से दूसरों पर दबाब बनाने लगे तो उसे किसी भी हालत में सहन नहीं किया जा सकता है। दूसरी तरफ अगर अब शहर के कुछ व्यापारी व नेता नाजायज कब्जों को जायज ठहराने के लिए एकजुट हो जाए व कानून को छिंके पर टांग दे तो वह कहां तक जायज है। फिलहाल पुलिस के आला अधिकारियों को भी इस तरह के गंभीर मामलों में सोच समझ कर फैसला लेना होगा ताकि लोगों में कानून व इंसाफ का रुतबा बरकरार रहे। वही कानून और पुलिस अधिकारियों से ऊपर कुछ धार्मिक पंथों के नेता और लोगों की बात सुनने  वाले पुलिस अधिकारीं को भी इस तरह के मसलों को तूल देने से गुरेज करना चाहिए।