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बुधवार, 15 जनवरी 2014
प्रशासन को नहीं लगी भनक
सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत
रामपुरा फूल : बठिंडा-रामपुराफूल हाइवे पर मंगलवार रात अज्ञात
वाहन की टक्कर से स्कूटर सवार पति-पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के
अनुसार शुभकरण पाल (52) पुत्र कन्हैया लाल अपनी पत्नी सोनावती (50) के साथ
मंगलवार रात बठिंडा से लहरा थर्मल प्लांट जा रहे थे। जब वे थर्मल के नजदीक
पहुंचे तो उनके स्कूटर पीबीआर 630 को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इससे
दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। शुभकरण लहरा थर्मल प्लांट में कार्यरत थे।
सूचना मिलने पर मालवा सहारा क्लब व सहारा क्लब भुच्चों मंडी के सदस्यों ने
शवों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। उधर, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी
है।संवाद सहयोगी, रामपुरा फूल : बठिंडा-रामपुराफूल हाइवे पर मंगलवार रात
अज्ञात वाहन की टक्कर से स्कूटर सवार पति-पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार शुभकरण पाल (52) पुत्र कन्हैया लाल अपनी पत्नी सोनावती
(50) के साथ मंगलवार रात बठिंडा से लहरा थर्मल प्लांट जा रहे थे। जब वे
थर्मल के नजदीक पहुंचे तो उनके स्कूटर पीबीआर 630 को अज्ञात वाहन ने टक्कर
मार दी। इससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। शुभकरण लहरा थर्मल प्लांट में
कार्यरत थे। सूचना मिलने पर मालवा सहारा क्लब व सहारा क्लब भुच्चों मंडी
के सदस्यों ने शवों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। उधर, पुलिस ने मामले की
जांच शुरू कर दी है।
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हत्यारे पुलिस वाले पहुंचे सलाखों के पीछे
पुलिस वालों के परिजन फफक कर रोने लगे
फर्जी एनकाउंटर के शिकार युवक के परिजनों ने जताई खुशी
उम्रकैद की सजा सुनते ही पुलिसवालों के चेहरों से उड़ी हवाई, अदालत में छाई खामोशी
फर्जी एनकाउंटर
बठिंडा1मंगलवार का दिन अदालत के लिए खास था, क्योंकि सुरक्षा का कवच ओढ़े पुलिस कर्मियों को उनकी करनी की सजा सुनाई जानी थी। इस कारण सुबह से ही अदालत परिसर में गहमा-गहमी का माहौल रहा। जैसे ही एक बजा न्यायाधीश महिंदर पाल सिंह पाहवा ने फर्जी एनकाउंटर में दोषी ठहराए गए सभी पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुना दी। फैसला आते ही पुलिसकर्मियों के चेहरे लटक गए और उनके परिजन फफक-फफक कर रोने लगे। उधर, फर्जी एनकाउंटर का शिकार हुए युवक के परिजनों ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि अब दिल को सुकून मिला है। 1 सभी पुलिसकर्मियों को दस जनवरी को ही परमजीत सिंह को अगवा कर हत्या करने मामले में दोषी ठहरा दिया गया था। पुलिसकर्मियों व उसके परिजनों को उम्मीद थी कि मंगलवार को सजा सुनाए जाने के दौरान कुछ नरमी बरती जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न्यायाधीश पाहवा दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर दो नंबर अदालत में पहुंचे और बीस मिनट के बाद सभी दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों को सजा सुना दी। इसके साथ ही अदालत में विरानी छा गई और पुलिसकर्मी व उसके परिजन फैसले को सुनकर रोने लगे। काफी संख्या में पहुंचे पुलिसकर्मियों के परिजनों ने फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की। फैसले के साढ़े तीन घंटे बाद सभी आठ पुलिसकर्मियों को जेल भेज दिया गया। इस साढ़े तीन घंटे के दौरान परिजनों ने एक दूसरे से दुख सांझा किया। 1 शिकायतकर्ता पक्ष का एक ही कहना था कि उन्हें आखिरकार 22 वर्षो के बाद इंसाफ मिल गया। उन्होंने पुलिसकर्मियों के अत्याचार के दास्तान भी सुनाई। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि फर्जी एनकाउंटर का शिकार हुए परमजीत सिंह का पुत्र कमर सिंह ढिल्लो इंजीनियरिंग करके न्यूजीलैंड में रह रहा है, जबकि पुत्री गुरदास कौर एमएससी कर रही है। हालांकि सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों मौजूद नहीं थे। 122 वर्ष तक इंसाफ के लिए भटकते रहे परिजन 1 फर्जी एनकाउंटर के शिकार हुए परमजीत सिंह के परिजन 22 वर्षो तक इंसाफ के लिए भटकते रहे, लेकिन मंगलवार को उन्हें सही तरीके से इंसाफ मिला। 22 वर्षो के दौरान सेना के आला अधिकारियों से लेकर राजनीतिज्ञों के दरवाजे पर भी परमजीत के पिता गुरदित्त सिंह ने दस्तक दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंत में 23 मार्च 1999 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर थाना कोतवाली में केस दर्ज किया गया। हालांकि, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 26 जून 1996 को जिला सेशन केएस ग्रेवाल ने पूरे मामले की स्वयं जांच की थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस कहानी को पूरी तरह से निराधार बताया था। 1इसके बावजूद जिला पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करने की बजाए लापता होने का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। इसके बावजूद परमजीत सिंह के पिता ने हार नहीं मानी और दर्ज किए गए धारा में बदलाव के लिए लड़ाई लड़ते रहे। अंत में उनकी लड़ाई रंग लाई और सभी 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का भी मामला दर्ज किया गया। आज गुरदित्त सिंह नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे परमजीत सिंह पर आतंकवादी होने के दाग अदालत के फैसले से धुल गए।1पुलिस नहीं खोज पाई भगोड़े डीएसपी को1बठिंडा। परमजीत सिंह फर्जी एनकाउंटर मामले में भगोड़ा घोषित किए गए डीएसपी गुरजीत सिंह को पुलिस आज तक नहीं ढूंढ पाई है। भगोड़े डीएसपी को शेरपुर थाने में एक व्यक्ति की हुई हत्या के मामले में बरनाला अदालत द्वारा 2006 में उम्र कैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन 31 मई 2007 को बठिंडा सेंट्रल जेल से पैरोल लेने के बाद फरार हो गया। इसके बाद उस पर एक लाख का इनाम भी घोषित किया गया, लेकिन आज तक पुलिस उसे नहीं ढूंढ पाई।22 साल पुराने फर्जी मुठभेड़ में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस कर्मियों को बठिंडा अदालत परिसर से जेल ले जाती पुलिस। (दाएं) सजा सुनाए जाने के बाद इंस्पेक्टर बलजिंदर कुमार को अदालत परिसर से बाहर लाती व जेल ले जाती पुलिस। रणधीर बॉबीफर्जी मुठभेड़ मामले में बठिंडा अदालत द्वारा पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद जमा पुलिसकर्मी व परिजन।(दाएं) विजय चिन्ह बनाते परमजीत सिंह को खोने वाले परिजन। (दाएं) उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों के परिजनों की आंखों से आंसू निकल आए।बड़ी जिम्मेदारी निभाने को तैयार राहुल गांधी
नई दिल्ली : पूरे देश में चाहे जितना भी कांग्रेस विरोधी माहौल हो, लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार या पार्टी अ ध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं। पार्टी के कहने पर कुछ भी जिम्मेदारी उठाने को राहुल ने जैसे ही खुद को तैयार बताया, वैसे ही राहुल की भूमिका बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। 117 जनवरी को कांग्रेस कार्यकारिणी में परदा उठेगा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष से पदोन्नत कर उनकी ताजपोशी कार्यकारी अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में होगी या फिर प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जाएगा। हालांकि, भाजपा ने कांग्रेस के वंशवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि राहुल की बड़ी भूमिका से भी चुनावी नतीजों में कोई फर्क नहीं आने वाला है। जनवरी, 2013 में भी कांग्रेस महासचिव से कांग्रेस उपाध्यक्ष घोषित होने से पहले भी ठीक यही माहौल था। 1पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार कह रहे थे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाद नंबर दो राहुल गांधी ही हैं। ऐसे में उन्हें किसी पद और अन्य किसी घोषणा की जरूरत नहीं है, लेकिन जयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान राहुल की ताजपोशी उपाध्यक्ष के पद पर हुई।1जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : पूरे देश में चाहे जितना भी कांग्रेस विरोधी माहौल हो, लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार या पार्टी अ ध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं। पार्टी के कहने पर कुछ भी जिम्मेदारी उठाने को राहुल ने जैसे ही खुद को तैयार बताया, वैसे ही राहुल की भूमिका बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। 117 जनवरी को कांग्रेस कार्यकारिणी में परदा उठेगा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष से पदोन्नत कर उनकी ताजपोशी कार्यकारी अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में होगी या फिर प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जाएगा। हालांकि, भाजपा ने कांग्रेस के वंशवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि राहुल की बड़ी भूमिका से भी चुनावी नतीजों में कोई फर्क नहीं आने वाला है। जनवरी, 2013 में भी कांग्रेस महासचिव से कांग्रेस उपाध्यक्ष घोषित होने से पहले भी ठीक यही माहौल था। 1पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार कह रहे थे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाद नंबर दो राहुल गांधी ही हैं। ऐसे में उन्हें किसी पद और अन्य किसी घोषणा की जरूरत नहीं है, लेकिन जयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान राहुल की ताजपोशी उपाध्यक्ष के पद पर हुई।1 |
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ब्रिटिश मदद से हुआ था ऑपरेशन ब्लू स्टार
नई दिल्ली : चुनावी मौसम में ऑपरेशन ब्लूस्टार और सिख दंगों का
जिन्न एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की मुश्किलें बढ़ा
सकता है। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लूस्टार के लिए
ब्रिटेन सरकार की मदद का सनसनीखेज दावा सामने आया है। इंदिरा गांधी सरकार
के आग्रह पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर के सैन्य मदद मुहैया कराने
की बात कथित ब्रिटिश सरकारी दस्तावेजों में सामने आई है। सिख धार्मिक
संवेदनाओं से जुड़े इस मासले पर एक ब्रिटिश सांसद के उठाए सवालों पर
प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जांच के आदेश दिए हैं। भारत ने ताजा दावों की
रोशनी में ब्रिटेन सरकार से तथ्य साझा करने को कहा है। हालांकि ऑपरेशन में
शामिल रहे सैन्य अधिकारियों ने सैन्य अभियान में किसी विदेश मदद से इन्कार
किया है। गोपनीयता कानून की तीस सालों की मियाद खत्म होने के 1ल्लशेष
पृष्ठ 2 कालम 1 पर1जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : चुनावी मौसम में ऑपरेशन
ब्लूस्टार और सिख दंगों का जिन्न एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग
सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के
ऑपरेशन ब्लूस्टार के लिए ब्रिटेन सरकार की मदद का सनसनीखेज दावा सामने आया
है। इंदिरा गांधी सरकार के आग्रह पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर के
सैन्य मदद मुहैया कराने की बात कथित ब्रिटिश सरकारी दस्तावेजों में सामने
आई है। सिख धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े इस मासले पर एक ब्रिटिश सांसद के
उठाए सवालों पर प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जांच के आदेश दिए हैं। भारत ने
ताजा दावों की रोशनी में ब्रिटेन सरकार से तथ्य साझा करने को कहा है।
हालांकि ऑपरेशन में शामिल रहे सैन्य अधिकारियों ने सैन्य अभियान में किसी
विदेश मदद से इन्कार किया है।
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