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सोमवार, 15 जून 2020

सीएम गहलोत का ऐलान / पड़ोसी राज्यों की मदद करेगा राजस्थान, दिल्ली-मप्र-यूपी-पंजाब-हरियाणा के 5 हजार सैंपल की रोज जांच होगी

  • दिल्ली ने जहां दूसरे राज्यों के मरीजों के इलाज से मना कर दिया था, वहीं राजस्थान आगे आया
  • दिल्ली के बाद कोरोना टेस्ट करने में दूसरे नंबर पर है राजस्थान

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)जयपुर. काेराेना संकट के बीच जहां दिल्ली ने दूसरे राज्यों के मरीजों का इलाज करने से इनकार किया था, वहीं राजस्थान अपने पड़ोसी राज्यों के कोरोना मरीजों की जांच के लिए आगे आया है।
मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने ऐलान किया है कि महामारी के इस विकट समय में आवश्यकता होने पर पड़ोसी राज्य यूपी, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा और गुजरात रोज 5 हजार टेस्ट तक राजस्थान में करवा सकेंगे।
जिला अस्पतालों में पाइप लाइन से होगी ऑक्सीजन सप्लाई
सीएम ने यह भी ऐलान किया कि अब प्रदेश के सभी जिला अस्पतालाें में जुलाई अंत तक सिलेंडर के बजाय पाइप लाइन के जरिए मरीजाें काे ऑक्सीजन सप्लाई हाेगी। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर काेराेना संक्रमण की समीक्षा काे लेकर उच्च स्तरीय बैठक में गहलाेत ने कहा कि कोरोना की शुरुआत में हमारी टेस्ट क्षमता शून्य थी, जो अब बढ़कर रोज 15 हजार से अधिक हो गई है।
ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने, गंभीर बीमारियों से पीड़ित हाई रिस्क वाले लोगों की निरंतर माॅनिटरिंग एवं लगातार स्क्रीनिंग के कारण कोरोना से हमारी रिकवरी रेट राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही।
संक्रमितों की रिकवरी और टेस्टिंग में देश में दूसरे नंबर पर राजस्थान
कोरोना काल के दौरान राजस्थान की ओर से लिए गए कई फैसले देश भर में चर्चित रहे। जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं। कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट में राजस्थान पंजाब के बाद देश में दूसरे पायदान पर पहुंच गया है।
मरीजों की टेस्टिंग के मामलाें में भी दिल्ली के बाद दूसरे नंबर पर बना हुआ है। राजस्थान सोमवार को टेस्टिंग करने में छह लाख का आंकड़ा पार कर जाएगा, जबकि प्रदेश में कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट 75% से अधिक पहुंच गई है।
काेराेना के योद्धाओं काे पुरस्कृत करने के लिए 25 कराेड़ रु. का अलग से फंड
काेराेना खत्म हाेने के बाद वॉरियर्स को पुरस्कृत करने के लिए 25 करोड़ रु. का अलग से फंड बनाया गया है। इसके अलावा इस जंग में शामिल हर सरकारी कर्मचारी, अधिकारी का 50 लाख रु. तक का बीमा कराया गया। इनमें संविदा कर्मी सहित अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
700 माेबाइल एंबुलेंसाें से प्रतिदिन अन्य बीमारियाें के 25 हजार मरीजाें का इलाज
काेराेना के बीच अन्य बीमारियाें के रोगी परेशान न हाें, इसके लिए 700 मोबाइल एंबुलेंस चलाईं। इनसे रोज 25 हजार मरीजों का इलाज हो रहा है। प्रदेश में हर आदमी की तीन से चार बार स्क्रीनिंग हुई। 13 जून को 26 हजार टीमों ने 33 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कर रिकाॅर्ड बनाया। सीएम ने कहा- प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। स्क्रीनिंग की व्यवस्था आगे भी जारी रखी जानी चाहिए।
54 लाख लोगों को दो माह तक फ्री में 5-5 किलो गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा
प्रदेश में कोई भूखा न सोए, राज्य सरकार इसके लिए संकल्पबद्ध है। इसी के तहत भारत सरकार की एनएफएसए स्कीम से वंचित रहे 54 लाख लोगों के लिए गहलोत सरकार बाजार दर से 23 रु. में गेहूं खरीदकर 2 माह तक उन्हें 5-5 किलो गेहूं फ्री उपलब्ध करा रही है। लॉकडाउन में सरकार की ओर से सूखे राशन के करीब 38.69 लाख पैकेट प्रदेश भर में वितरित किए गए।
अस्थि विसर्जन के लिए स्पेशल बसें
लॉकडाउन में लोग परिजनों का निधन होने पर अस्थि विसर्जन के लिए नहीं जा पा रहे थे। सीएम की पहल पर मोक्ष कलश निशुल्क बस सेवा शुरू हुई। ताकि वे अस्थियां विसर्जित कर सकें। इस सेवा से लोगों को भावनात्मक संबल मिला।

पाकिस्तान फिर सैन्य शासन की ओर? / पूर्व डिप्लोमैट बोले- महामारी पर इमरान की नाकामी से फौज नाखुश, मार्शल लॉ का ऐलान ही बाकी

  • वाजिद शम्स-उल हसन पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमैट और वर्तमान में पत्रकार हैं, कई अखबारों में कॉलम लिखते हैं
  • वाजिद के मुताबिक, इमरान सरकार के तमाम बड़े ओहदों पर फिलहाल, फौज के बड़े अफसरों की तैनाती है

पीकेएस न्यूज

Jun 15, 2020, 11:41 AM IST
इस्लामाबाद. पाकिस्तान में महामारी तेजी से पैर पसार रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 लाख 42 हजार संक्रमित हैं। 2 हजार 663 की मौत हो चुकी है। इमरान खान सरकार महामारी रोकने में नाकाम साबित हुई है। देश के पूर्व डिप्लोमैट वाजिद शम्स उल हसन के मुताबिक, सरकार की नाकामी से फौज सख्त नाखुश है। तमाम बड़े ओहदों पर फौज के बड़े अफसरों की तैनाती की जा चुकी है। देश में मार्शल लॉ यानी सैन्य शासन की औपचारिक घोषणा बाकी है। 
प्रशासन के पदों पर लेफ्टिनेंट जनरल
वाजिद डिप्लोमैसी से पत्रकारिता में आए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “फौज महामारी रोकने में सरकार की नाकामी से सख्त नाखुश है। इसलिए सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के तमाम बड़े ओहदों पर 12 से ज्यादा लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अफसरों की तैनाती या तो हो चुकी है, या फिर की जा रही है। हालांकि, अब तक औपचारिक तौर पर मार्शल लॉ का ऐलान नहीं किया गया है। सरकारी एयरलाइंस पीआईए, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ जैसे सबसे बड़े महकमों के प्रमुख फौजी अफसर हैं। यह सब दो महीनों में हुआ है।”
इमरान को कुछ नहीं पता
वाजिद के मुताबिक, प्रधानमंत्री इमरान खान को महामारी से निपटने के मामले में कुछ नहीं पता। हसन कहते हैं, “सिंध प्रांत की सरकार ने लॉकडाउन की मांग की। इमरान ने इसका विरोध किया। हालात बिगड़े तो प्रधानमंत्री स्मार्ट लॉकडाउन की बात करने लगे। अब देखिए मुल्क कहां पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों को ही देख लें। मरने वालों का आंकड़ा 3 हजार के करीब है। संक्रमित भी एक लाख 30 हजार के आसपास हो चुके हैं।” 
डब्ल्यूएचओ की भी नहीं सुनते
पाकिस्तान में महामारी के खतरे को लेकर हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी जारी की थी। संगठन ने कहा था- पाकिस्तान में हालात बहुत बदतर हो सकते हैं। वहां सरकार को फौरन सख्त लॉकडाउन घोषित करना चाहिए। वाजिद कहते हैं- इमरान देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब बता रहे हैं। वो कहते हैं कि अगर लॉकडाउन किया तो लोग भूखे मर जाएंगे। मार्च से यही राग अलापा जा रहा है। जबकि, डब्ल्यूएचओ कह रहा है कि पाकिस्तान ऐसी स्थिति में नहीं है कि कोई शर्त थोप सके। देश की डॉक्टरों की बात भी नहीं मानी जा रही। 
ऐसे चल रही है सरकार
वाजिद कहते हैं- इमरान सरकार कई छोटे दलों के भरोसे चल रही है। यह पार्टियां वास्तव में सेना के इशारे पर चलती हैं। पाकिस्तान में अगर कोई ताकतवर है तो वह फौज है। इमरान हर मोर्चे पर नाकाम रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर लॉकडाउन लगाया तो मुल्क दिवालिया हो जाएगा। हालांकि, सेना का रोल नया नहीं माना जाना चाहिए। पाकिस्तान में शुरू से ही यह होता रहा है। पहले भी सरकारें ऐसे ही चली हैं।
पाकिस्तान में सैन्य शासकों की तानाशाही
भारत और पाकिस्तान दोनों एक ही साल 1947 में आजाद हुए। एक ओर जहां भारत में लोकतंत्र फलता-फुलता रहा, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में सैन्य शासकों की तानाशाही बढ़ती रही। पाकिस्तान के 77 साल के इतिहास में आधे से ज्यादा समय तक सैन्य शासन ही रहा है। आजादी के नौ साल के बाद ही पाकिस्तानी जनरल मोहम्मद अयूब खान ने तत्कालिन राष्ट्रपति इसकंदर मिर्जा का तख्ता पलट दिया था।  
सैन्य शासक (जो राष्ट्रपति बन गए)कार्यकाल
अयूब खान1958-69
याह्ना खान1969-71
जिया उल हक1977-88
परवेज मुशर्रफ2001-08