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शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

बठिंडा में ग्रीन सिटी वासी व्यापारी दविंदर गर्ग के मौत का सच-गैरकानूनी बिटकॉइन और क्रिप्टोकरैंसी के चक्रव्यूह में फंसकर करोड़ों रुपए गवा रहे हजारों लोग



 

बठिंडा. ग्रीन सिटी बठिंडा में दो बच्चों व पत्नी की गोली मारकर हत्या करने व बाद में खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाले व्यापारी व ट्रैडर दविंदर गर्ग के मामले में कैंट पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन इसमें फोरन बिटकॉइन और ऐसी ही क्रिप्टोकरैंसी के मक्कडजाल को भेंदने के लिए पुलिस को काफी मत्थापेंची करनी पड़ रही है। आरंभिक जांच में पुलिस के पास जानकारी मिली है कि रातों-रात करोड़पति बनने चले बठिंडा के हजारों लोग देश में गैरकानूनी बिटकॉइन और ऐसी ही क्रिप्टोकरैंसी (आभासी मुद्रा) के चक्रव्यूह में फंसकर करोड़ों रुपए अटकाए बैठे हैं। कोरोना काल में मार्च से लेकर अब तक इस करंसी के रेट में बेहताशा कमी आने के बाद लोगों के अंदर पैसे की वसूली को लेकर कश्माकश चल रही है मेहनत की गाढ़ी कमाई डूबने की आशंका से अब लोग एजेंटों से रुपए का तकादा कर रहे हैंवे उन्हें इंतजार की सलाह दे रहे हैं। वही लोग इस मामले में एजेंटों पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वह उनके पैसे दिलवाएं। बठिंडा में टैंडर्स दविंदर गर्ग की तरफ से परिवार की हत्या करने व स्वयं आत्महत्या करने की घटना भी इसी चक्रव्यूह का हिस्सा है। वर्तमान में बिटकॉइन और ऐसी ही क्रिप्टोकरैंसी में बठिंडा जिले में ही लोगों ने 500 करोड़ से अधिक की राशि इन्वेस्ट कर रखी है।


बिटकॉइन में रुपए लगाने वालों में आमजन से लेकर नेताव्यापारीकर्मचारीपुलिसवकीलडॉक्टर हर तबका शामिल है। गैरकानूनी काम कर रहे एजेंटों ने लोगों को इस आभासी मार्केट में अच्छे कमिशन का भरोसा देकर निवेश करवाया। किसी ने जमा पूंजी लगा दी तो किसी ने जमीन बेचीकिसी ने पर्सनल लोन लिया तो किसी ने एफडी तुड़वाकर इस हवाई कारोबार में पैसा फंसा दिया। कुछ लोग इस धंधे में मालामाल हो गएजिनके पास शौचालय बनवाने के रुपए नहीं थेवे फाइव स्टार होटल्स में स्विमिंग पुल का आनंद उठाने लगे। बठिंडा में बिटकॉइन का गोरखधंधा दो साल पहले परवान चढ़ा। बिटकॉइन मार्केट में बठिंडा के कई चर्चित चेहरे हैं। चेन शहर से गांवों तक फैल गई। शुरू-शुरू में लोगों के पास पैसा आया भीपर फिर ब्रेक लग गए। कितने लोग इस गोरखधंधे से जुड़े हैं और उनका कितना पैसा अटका हुआ हैइसके आंकड़े पुलिस-प्रशासन के पास नहींपर इस धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक से हजार लोग इससे जुड़े हैंजिनका 500 करोड़ों रुपया फंस गया है। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार की पाबंदियों के बाद बिटकॉइन के भाव जमीन पर आ गए। बिटकॉइन बाई-सैल कर डॉलर को रुपयों में बदलने वाला एक्सचेंजर जेब-पे एप पर पाबंदी लगा दी गई है। लोगों का पैसा अटक गया। साल 2018 के अक्टूबर-नवंबर में एक बिटकॉइन की कीमत 14.50 लाख रुपए पहुंच गई थीलाकडाउन से पहले इसकी 5.20 लाख रुपए कीमत बताई जा रही थी।

भारतीय रिजर्व बैंक बठिंडा की मेन शाखा के एक अधिकारी के मुताबिक बठिंडा में बिटकॉइन के नाम पर दूसरा ही खेल चल रहा है। बूंदी में बिटकॉइन के नाम से बीटीसी एडप्रो जैसी अनधिकृत एमएलएम कंपनी चल रही है। बिटकॉइन में इन्वेस्ट के नाम से लोगों से पैसा वसूला जा रहा है। रिजर्व बैंक ने क्रिप्टोकरैंसी के सेटलमेंट को बैन कर दिया है। पीड़ितों को क्रिप्टोकरैंसी बेचकर इससे बाहर आने के लिए तीन महीने का वक्त साल 2018 में दिया । बिटकॉइन को लेकर रिजर्व बैंक चार-पांच साल में सात-आठ बार एडवाइजरी भी जारी कर चुका है। फर्जी कंपनियोंं में पैसा लगाने से बचने की सलाह देने के लिए रिजर्व बैंक जगह-जगह वर्कशॉप लगा। ग्रामीण इलाकों में भी फर्जी कंपनियां अनधिकृत चिटफंडचैन सिस्टमएमएलएम जैसी पॉजी स्कीम चला रही हैं।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी और कैसे काम करती हैकंप्यूटरों से ट्रांजेक्शन

क्रिप्टोकरेंसी नेट पर चलने वाली वर्चुअल करेंसी है। इसकी शुरुआत जनवरी 2009 में बिटकॉइन के नाम से हुई। अब बिटकॉइन के अलावा लिटकॉइनइथरलिटकॉइन कैसरिपल जैसी 950 क्रिप्टोकरैंसी मार्केट में है। ऐसी बहुत सी कंपनियां हैंजो बिटकॉइन की माइनिंग करती हैं। इस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कर दुनिया के किसी कोने में किसी व्यक्ति को पेमेंट किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस भुगतान के लिए किसी बैंक को माध्यम बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। बिटकॉइन का इस्तेमाल पीयर टू पीयर टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसका मतलब कि बिटकॉइन से ट्रांजेक्शन दो कंप्यूटरों के बीच होता है। इसके लिए किसी गार्जियन अथवा बैंक की जरूरत नहीं पड़ती। बिटकॉइन से जुड़े लोगों ने बताया कि शुरुआत में इस तरह का प्रलोभन दिया जाता है कि कोई भी व्यक्ति चक्कर में आ सकता है। लाखों कमाने के फिराक में लोग फंसते हैं। इसके बाद अब पछताने के सिवा कुछ नहीं बचा है।

रकम कई गुना करने का वादा किया थालेकिन अटक गई पूंजी

बीटीसी एड प्रो कंपनी से जुड़े एक शख्स ने बताया कि उसकी जमा पूंजी फंस गई है। इस कंपनी ने आईडी लगाने के बदले रकम का ढाई गुना रुपए देने का लालच दिया। अगर 15 दिन में दो आईडी और लगवाने पर गुना देने की बात कही गई। दो महीने बाद पहले तो 10 परसेंट टैक्स काट कर पेमेंट किया गयाफिर डॉलर की रेट भी कम बताकर आईडी खोलने के भी अतिरिक्त 10 परसेंट लेने लगी। महीने बाद शॉपिंग मॉल चलाने की बात कही गई। उसमें आईडी का 10 परसेंट पैसा काटा जाने लगा। एक महीने बाद कहा गया कि माल बंद कर दिया गया। फिर आईडी भी खुलना बंद हो गई। डॉलर भी बंद। फिर कहा गया जिसकी ईडी जितने की हैउसका डेढ़ गुना कंपनी वापस देगी। बाकी नई आईडी लगाओ। 1.40 लाख की आईडी पर बैंकॉक टूर कराने की बात कही गई। जिसने भी आईडी लगाईतारीख पर तारीख देते गए और अब जाकर टूर पर लेकर गए। वो भी एजेंट अपने खर्च परताकि लोगों का विश्वास बना रहे और नई आईडी लगती रहे। पुरानी आईडी ना तो खुल रही है और ना ही अटका पैसा आ रहा है।

फिलहाल रिजर्व बैंक के मुताबिक आपके पास बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी है तो इसकी जानकारी रखे कि आरबीआई ने वर्चुअल करेंसी पर प्रतिबंध लगा रखा है। नए फैसले के तहत अब आप बैंक या ई वॉलेट के जरिए बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी नहीं खरीद पाएंगे। यह फैसला रिजर्व बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी के चलते ग्राहकों के हित में उठाया है।

इन तमाम खुलासों के बावजूद बठिंडा में ग्रीन सिटी बठिंडा में रहने वाले ट्रैडर दविंदर गर्ग को शहर के नामी लोगों ने इस करंसी में पैसा लगाने का प्रलोभन दिया। उन्होंने शुरू में पैसा कमाया भी लेकिन सरकार की तरफ से इसमें पाबंदी लगाने के बावजूद गौरखधंधा दो नंबर में चलता रहा। शहर के सैकड़ों लोगों को उन्होंने इसके साथ जोड़ा व करंसी के नाम पर धंधा राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासकीय व व्यापारिक गलियारे में चलने लगा। एक स्थिति यह आ गई कि कोरोना के दौरान लोगों ने पैसा लगाना बंद कर दिया तो गैरकानूनी ढंग से चल रही मूवमेंट भी बंद हो गई। अब कुछ लोगों ने रातों रात पैसा इकट्ठा कर अपना घाटा पूरा कर लिया जबकि लोगों की देनदेरी दविंदर गर्ग के सिर पर डाल दी। हालात यह हो गए कि करोड़ों की देनदारी में मानसिक तनाव में आए दविंदर गर्ग ने दो बच्चों व पत्नी की गोली मारकर हत्या करने व बाद में खुद को गोली मारकर आत्महत्या करनी पड़ी। उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले आरोपियों में महिला सहित एक ही परिवार के तीन लोगों पर लाकडाउन में हुए घाटे को पार्टनरों में बाटने की बजाय प्रोफिट निकालकर घाटा मृतक के ऊपर डालने से जुड़ा। इसमें करोड़ों रुपए की देनदारी मृतक दविंदर गर्ग के सिर पर डाल दी गई। यही नहीं सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि आरोपी लोग उन्हें सत्तापक्ष के साथ जुड़ा होने की बात कर मानसिक तौर पर परेशान करते थे व पैसे नहीं देने पर पुलिस कारर्वाई करवाने व जान से मारने तक की धमकियां देते थे। इन्हीं सभी बातों से दविंदर गर्ग पिछले छह माह में पूरी तरह से टूट चुका था व इस बाबत उसने सारा मामला इपने पिता व भाई के साथ भी सांझा किया था। परिजन उसे हौसला देते थे लेकिन वह पैसे लेने के लिए डाले जा रहे जबाव व कारर्वाई की धमकियों से इस कदर परेशान हो गया कि उसने पहले अपनी पत्नी को गोली मारी व बाद में दोनों बच्चों के सिर पर गोली मारकर खुद को मौत के घाट उतार लिया। बठिंडा में घटी यह घटना किसी बड़े खौफ से कम नहीं है जबकि उस मामले में पुलिस ने आरोपी लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लाकडाउन मार्च में लगा तो बीटकान करंसी के रेट कम हो गए। इस दौरान करोड़ों रुपए इसमें लगे थे। वही कुछ दूसरे पार्टनरों ने भी इसमें पैसा लगाया था। बठिंडा के राजू कोहनूर उसके भाई बब्बू कालड़ा व पत्नी अमन कोहनूर ने करंसी में लगाया पैसा प्रोफिट सहित निकाल कर अपने पास रख लिया व जो पैसा लोगों का देना था वह दविंदर गर्ग पर डाल दिया। यह राशि करोड़ों में थी जिसके चलते कुछ पैसा तो दविंदर ने किसी तरह दे दिया लेकिन इसी दौरान मनजिंदर सिंह हैप्पीप्रवीण बांसलसंजय जिंदल बाबीमनी बांसल सबी वासी बठिंडाअशोक कुमार वासी रामा मंडीअभिषेक जौहरी ने उस पर पैसा जल्दी देने के लिए दबाब बनाना शुरू कर दिया वही ऐसा नहीं करने पर उसे राजनीतिक रोब डालकर बर्बाद करने व पुलिस के पास केस दर्ज करवाने की धमकियां देना शुरू कर दी। उक्त लोग राजू कोहनूर से मिलकर उसे सत्ता पक्ष में पहचान होने व उसके खिलाफ कानूनी कारर्वाई करने की लगातार धमकियां दे रहे थे। कांग्रेसी नेता मनजिंदर सिंह धालीवाल के साथ राजू केहनूरअमन केहनूरबब्बू कालड़ासंजय जिंदलप्रवीण बांसलअभिषेक जौहरीअशोक कुमार वासी रामा मंडी के साथ मन्नी बांसल पैसे के लेनदेन को लेकर दविंदर गर्ग को परेशान कर रखा था व उसे बर्बाद करने व उसके खिलाफ मामले दर्ज करवाने की धमकियां देते थे। इसी बात से परेशान दविंदर गर्ग ने गत वीरवार की दोपहर अपने ग्रीन सिटी स्थित किराये की कोठी में पहले पत्नी व बाद में दो बच्चों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया व बाद में स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

कृषि कानून का विरोेध:किसानों ने अर्धनग्न होकर मुल्तानिया पुल से अनाज मंडी तक निकाला रोष मार्च

बठिंडा15 घंटे पहले
  • 31 किसान संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार के खेती कानूनों के प्रति किसानों को किया जागरूक, कपास की सरकारी खरीद शुरू न होने का जताया विरोध

सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए अर्धनग्न किसानों के इस अनोखे प्रदर्शन देखकर इलाका निवासियों ने हैरानी जताई, वहीं किसानों के ऐसे हालात के लिए सरकार को दोषी ठहराया। किसानों का काफिला अनाज मंडी पहुंचा जहां मार्केट कमेटी दफ्तर के सामने नरमे की ढेरी पर नारेबाजी की।

आज किया जाएगा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का घेराव
भाकियू सिद्धूपुर के नेता बलदेव सिंह ने बताया कि उनका रेल चक्का जाम व कार्पोरेट घरानों का घेराव जारी रहेगा। कीरती किसान यूनियन के नेता अमरजीत हनी ने कहा कि बंद कमरों में बैठकर नीतियां बनाने वाले खेत में कड़ाके की ठंड व चिलचिलाती गर्मी में काम करते किसान का दर्द नहीं जानते और किसानी को भी व्यापार ही समझते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से धान की पराली जलाने से रोकने को बनाई नीतियों में जमीन में रेड एंट्री व कंबाइनों पर सुपर एसएमएस का विरोध जताते हुए 6 अक्टूबर को पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मानसा रोड आईटीआई इंडस्ट्रियल एरिया में घेराव किया जाएगा।
पांचवें दिन भी बंद रहे रिलायंस पंप व टोल प्लाजा
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से 31 किसान संगठनों के संघर्ष से तालमेल करके कारपोरेट कारोबार का घेराव निरंतर जारी है, सोमवार को पांचवें दिन भी रिलायंस व एस्सार के पेट्रोल पंप, वॉलमार्ट का बेस्ट प्राइज शॉपिंग माल्स, जीदा व लहराबेगा टोल प्लाजा का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। किसानों की ओर से बनांवाली के प्राइवेट थर्मल प्लांट का भी घेराव किया हुआ है। किसान नेताओं ने कहा कि रामपुरा में रिलायंस कंपनी के पेट्रोल पंप, भुच्चो खुर्द व संगत मंडी में एस्सार कंपनी के पेट्रोल पंप के अलावा बठिंडा-भुच्चो स्थित वालमार्ट के बेस्ट प्राइज माल को बंद तथा लहराबेगा व जीदा में टोल प्लाजा पर पर्चियां कटवाना बंद करके इन कारपोरेट घरानों की ओर से की जा रही लूट को बंद करवाया है।

वहीं बनांवाली थर्मल प्लांट के आगे भी अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है केंद्र सरकार की ओर से लाए जा रहे आर्डिनेंस सीधे तौर पर कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाले हैं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शॉपिंग माॅल्स से छोटे कारोबारियों को खत्म कर देंगे, वहीं रिलायंस व एस्सार के पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा और प्राइवेट थर्मल बढ़ने से कारपोरेट घरानों की वर्चस्व बढ़ेगा और आने वाले दिनों में मनमर्जी से आम जनता को लूट सकेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि वे खेती आर्डिनेंस को वापस करवाकर ही दम लेंगे और वे पंजाब में कारपोरेट घरानों के कारोबार को बढ़ने नहीं देंगे।

कमेटी की रिपोर्ट लीक:बीटीओ व दो कर्मियों की लापरवाही आई सामने एक्शन के लिए हेल्थ सेक्रेटरी को भेजी रिपोर्ट

 


बठिंडा। सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक की ओर से एक महिला और एक 7 साल के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को एचआईवी पॉजिटिव ब्लड चढ़ाने के मामले में सोमवार को करीब 8 घंटे तक चली जांच के बाद जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सेहत विभाग के उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेज दी है। तीन सदस्यीय कमेटी एसएमओ डा. मनिंदरपाल सिंह, डा. गुरमेल सिंह व डा. सीमा गुप्ता की रिपोर्ट में ब्लड बैंक की बीटीओ, एक महिला एमएलटी व एक पुरुष एमएलटी की लापरवाही सामने आ रही है। आरजी फारिग कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट हेल्थ सेक्रेटरी को भेज दी गई है।

डॉ. मयंक को अब बीटीओ का चार्ज दिया गया है। बीटीओ डा. करिश्मा को गोनियाना मंडी के सरकारी अस्पताल में, एमएलटी रिचा को सरकारी अस्पताल घुद्दा व सीनियर एमएलटी बलदेव रोमाणा को तलवंडी साबो अस्पताल में आरजी तौर पर लगा दिया गया है। उधर देर शाम जांच कमेटी की रिपोर्ट सोशल मीडिया में लीक होने के बाद वायरल हो गई, जिसके बारे में अधिकारियों को मीडिया से ही पता चला। बता दें कि बच्चे और महिला मरीज को एचआईवी ब्लड चढ़ाने के मामले का खुलासा भास्कर ने सोमवार के अंक में प्रमुखता से किया था।

जिसके बाद एसएमओ ने जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि ब्लड बैंक में एचआईवी किट के प्रयोग में गड़बड़ मिली है। उधर श्री गणेश वेलफेयर सोसायटी के प्रधान आशीष बांसल ने ईमेल के जरिए सेहतमंत्री पंजाब को शिकायत भेजी है। वहीं डीसी बठिंडा व सीएमओ बठिंडा को भी शिकायत भेजी है। नौजवान सोसायटी के प्रधान सोनू माहेश्वरी व खूनदानी बीरबल बांसल ने भी आरोपी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

ये है रिपोर्ट : मामला छिपाने की कोशिश की, अधिकारियों को अंधेरे में रखा
कमेटी ने जांच के बाद जो रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है, उसके मुताबिक एचआईवी पॉजिटिव डोनर ने दो बार अपना ब्लड सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में दान किया। सबसे पहले छह मई 2020 को ब्लड बैग नंबर 2765 के जरिए एमएलटी रिचा गोयल ने एक महिला मरीज को एचआईवी पॉजिटिव का ब्लड जारी किया। जबकि दूसरी बार उसी एचआईवी ब्लड डोनर का ब्लड सात साल की थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची को तीन अक्टूबर को जारी किया गया।

इस बार भी एमएलटी रिचा गोयल ने यह ब्लड जारी किया। जांच में सामने आया कि ब्लड बैंक की इंचार्ज बीटीओ डा. करिश्मा गोयल ने भी अपनी ड्यूटी में घोर लापरवाही दिखाई है। उन्होंने उच्च अधिकारियों को भी मामले में अंधेरे में रखा। कमेटी के मुताबिक बीटीओ डॉ. करिश्मा को मई 2020 में ब्लड डोनर के एचआईवी पॉजिटिव के बारे में पता चल गया था और उसे यह भी पता चल गया था कि उसका ब्लड एक महिला मरीज को चढ़ा दिया गया है, लेकिन उसने मामले को छिपाने की कोशिश की, जबकि उसने ब्लड डोनर को भी एचआईवी होने के बारे में जानकारी नहीं दी।। इसके अलावा एमएलटी रिचा गोयल के काम की भी कोई जरूरी पड़ताल नहीं की।

सीनियर एमएलटी की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जांच कमेटी ने ब्लड बैंक के सीनियर एमएलटी बलदेव राेमाणा की भूमिका पर भी संदेह जताया है। जांच कमेटी के मुताबिक सीनियर एमएलटी ने निजी रंजिश निकालने के लिए एक अक्टूबर 2020 की सुबह ब्लड डोनर को ब्लड देने के लिए सिविल अस्पताल बुलाया था और सब कुछ जानते हुए उसने किसी कुछ भी नहीं बताया और उसका ब्लड सात वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची को जारी होने दिया।

इतना ही नहीं उसने बच्ची को ब्लड लगने के बाद अचानक चिल्ड्रन अस्पताल में जाकर स्टाफ नर्स से कहा कि बच्ची को एचआईवी पॉजिटिव मरीज का ब्लड लग गया है और उसने बिना किसी जिम्मेवार अधिकारी के आदेशाें के वहां से ब्लड बैग हासिल किया और खुद ही चिल्ड्रन अस्पताल की लैब में एचआईवी के लिए रेपिड टेस्ट लगवाया, जोकि पॉजिटिव आया। इसके बाद उसने एसएमओ दफ्तर आकर मामले की जानकारी दी। कमेटी का मानना है कि सीनियर एलटी ने एक बच्ची की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया।

एचआईवी किट के प्रयोग नहीं करने पर उठे सवाल
पड़ताल में यह भी सामने आया है कि सिविल अस्पताल बठिंडा के ब्लड बैंक में एचआईवी किट का प्रयोग में गड़बड़ी हो रही है, जोकि अलग से जांच का एक विषय हैं। कमेटी ने किट रखने वाली अलमारी खुलवाने के लिए एसएमओ ने ताला तोड़ने के आदेश दिए, तो सीनियर एमएलटी ने 600 एचआईवी टेस्ट करने के लिए किट बाहर से लाई गई ताकि स्टॉक पूरा किया जा सके। इस दौरान बीटीओ ने बताया कि इस कर्मचारी की तरफ से कभी भी किट का स्टाक चेक करने के लिए परमिशन नहीं दी गई।