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रविवार, 10 अप्रैल 2022

गोवा में 17 हस्तियों को मिला राष्ट्रीय I.P.C. अवार्ड, शानदार तरीके से सम्पन्न हुआ 17 वां राष्ट्रीय आईपीसी अवार्ड , ब्रह्मकुमारी शोभा बहन व टीम के अति उत्कृष्ट प्रवचन व गीत से हुआ कार्यक्रम का आगाज


गोवा, 9 अप्रैल (डॉ.ऋतेश श्रीवास्तव).
शनिवार को शाम  ब्रिगेजा हाल पंजीम गोवा मे 17 वें राष्ट्रीय आईपीसी अवार्ड का भव्य व रंगारंग आयोजन किया गया। कार्यक्रम मे 7 क्षेत्र से 17 राष्ट्रीय आईपीसी रत्न अवार्ड दिए गए गए। आईपीसी अवार्ड से सम्मानित होने वाले शिक्षा रत्न में नवनीत जयपुरियर नवी मुंबई, श्रीमती विंदिया गायश : गोवा, श्रीमती गीता खेरा : दिल्ली, मिस सबीना हुर्कडली गोवा व समाजसेवा रत्न के तौर पर पियूष गाँधी जळगाव महाराष्ट्र, श्रीमती शिल्पा गाँगुली गोवा के नाम रहे। जबकि चिकित्सा रत्न के तौर पर डॉ. अमित दायस गोवा और डॉ. सुरेंद्र पाण्डेय ठाणे, महाराष्ट्र ( देश में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति पर देश की पहली पीएचडी हासिल करने वाले ) को मिला। इसी तरह पत्रकारिता रत्न के तौर पर अशद बी. शेख इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पालघर महाराष्ट्र, प्रेम बाबू अम्बेश आज, प्रिंट मीडिया मैनपुरी उप्र के हिस्से अवार्ड आया। 

इस दौरान कला रत्न  बिपिन पाणिग्राही एक्टर फ़िल्म गोदाम मुंबई महाराष्ट्र, सागर मुले कलाकार, गोवा, संजय हामलकर पेंटिंग गोवा को अवार्ड दिया। साहित्य रत्न में श्रीमती जयश्री राय गोवा को सम्मान दिया गया। आईपीसी रत्न के तौर पर कृष्ण केशव  पाण्डेय गोवा, कल्पनाथ शुक्ल थाने महाराष्ट्र ने अपना अवार्ड हासिल किया। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आयोजन टीम गोवा  के. के. पाण्डेय, श्रीमती ज्योति राव, डॉ. संदीप प्रभुगाकर, श्रीमती सुनीता त्रिवेदी ने जी तोड़ मेहनत की। ब्रह्मकुमारी शोभा बहन व टीम के अति उत्कृष्ट प्रवचन व गीत से कार्यक्रम का आगाज किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री एडवोकेट रमाकांत घोलप मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। उन्होंने इस बेजोड़ आयोजन की भूरी भूरी प्रशंसा की। गोवा के भविष्य  उत्पल परीकर को युवा यंग लीडर सम्मान दिया गया। इस मौके बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष  सदानंद तनावड़े  उपस्थित रहे। अंत में इंटरनेशनल प्रेस कम्युनिटी के अध्यक्ष डॉ परमिंदर एस. पांडेय ने सभी साथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. परमिंदर पाण्डेय के अलावा महासचिव कृष्णा पाण्डेय, जळगाव अध्यक्ष  रिकेश जैन, इंजीनियर मनोज पाण्डेय, इंजीनियर पूजा पाण्डेय, अकोला आईपीसी अध्यक्ष हेमेंद्र राजगुरु, मुंबई महिला अध्यक्ष श्रीमती सारु बेन भोकिया, वरिष्ठ समाज सेवक डॉ. नीरज दुबे, फ़िल्म डिवीज़न आईपीसी अध्यक्ष अजय कश्यप और आईपीसी प्रतिनिधि अवधेश कुमार ने अपनी बखूबी सेवा निभाई। 




अंग्रेजों की तरफ से लागू अप्रत्यक्ष टैक्स निति को समाप्त करे सरकार-जसपा प्रधान सुरेश गोयल


बठिंडा, 9 अप्रैल (हरिदत्त जोशी ).
बठिंडा, 10 अप्रैल(जोशी). जरनल समाज पार्टी के संस्थापक व राष्ट्रीय प्रधान सुरेश गोयल ने अप्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने अप्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली द्वारा आम-जन को अंधेरे में रखकर उसकी अंधा धुंध लूट करने की भरपूर कोशिश की थी। लेकिन समाज के व्यापारी वर्ग द्वारा जनता के सहयोग से  जबरदस्त विरोध के चलते उन्हें यह इरादा छोड़ना पड़ा। हम उन्हें समझाने में सफल रहे कि अप्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली भ्रष्टाचार व काले धन की जननी साबित होगी। वही आजादी के बाद अपने नेताओं ने जनता के भारी विरोध के चलते भी जबर से 1956 में यह विदेशी टैक्स प्रणाली लागू कर दी। इसमें पहले सेल टैक्स बाद में वैट और अब जीएसटी के रूप में अप्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली जारी रखे हुए हैं। इससे व्यापार असुरक्षित होता गया और व्यापारी भ्रष्ट तंत्र की जंजीरों में जकड़ा गया। आजाद देश में गुलामी का जीवन वसर करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि  अंग्रेजों ने 1922 में प्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली लागू कर व्यापारी की स्थिति अनुसार एक मुश्त 22-44-71-105-211 के पांच ग्रेड व दर्जे वार्षिक वसूली के लिए बना दिए। इसे लोग खुशी से भरने लगे। राजाओं के समय राजा व्यापारी की स्थिति अनुसार हुण्डी भेजते थे जिसे लोग अदा करना अपना धर्म समझते हुए खुशी से भरते थे लेकिन विकटतम अप्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली ने  व्यापारी को चोर ना होते भी चोर कहलाने पर मजबूर कर दिया। नतीजा व्यापारी लाखों करोड़ों का व्यापार होते भी अपने इकलौते बेटे को दूर नौकरी के लिए भेजने को मजबूर है जबकि पहले वो धन को हाथों की मैल (गंदगी)समझते थे। इसे समाज हित में शिक्षा और चकित्सा मुफ्त देने की व्यवस्था के अलावा धर्मशालाएं, कुएं आदि पर धन खर्च करने में गौरवान्वित महसूस किया जाता था। महाराजा अग्रसेन जी ने राज का त्याग कर अपनी संतान को व्यापार व्यवस्था शुद्ध करने तथा आर्थिक तौर पर कमजोर हुए व्यक्ति को हर घर से एक ईंट एक रुपये देने की व्यवस्था से समाज में एकरसता बनाए रखने का अनोखा तरीका भी हमें दिया। उन्होंने कहा कि  देश को पुनः विश्व गुरू बनाने हेतु प्रत्यक्ष टैक्स प्रणाली लागू करें और समाज को पूर्व की तरह शिक्षा एवं चिकित्सा बिलकुल मुफ्त सबको बराबर देने की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाए। इससे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार खत्म होगे व बराबरता का समाज सिर्जन होगा। वही देश को तोड़ने वाली आरक्षण नीति समाप्त हो जाएगी वही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि देशहित में केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे जहां देश का व्यापारी संपन्न होगा व उसे वर्तमान टैक्स प्रणाली से होने वाली दिक्कतों से राहत िमलेगी वही देश में तरक्की के नए रास्ते बनेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर अपनी बात को सार्वजनिक मंच पर रखने के साथ इसे लेकर किसी भी तरह का तर्क व बहस अपनी टीम के साथ करने के लिए तैयार है। सुरेश गोयल देश में सामान्य वर्ग की समस्याओं को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं व आरंक्षण को लेकर भी आंदोलन खड़ा करने का काम किया।  



हेल्थ एवेयरनेस सेमीनार-इलेक्ट्रो होम्योपैथी से हर क्रोनिक डिसीज का इलाज संभव: डॉ. प्रो. हरविंदर


बठिंडा, 9 अप्रैल (पंजाब का सच न्यूज ).
देश की प्रसिद्ध अलकेमी रिर्सच लैब व फार्मा की ओर से इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा को प्रफुल्लित करने के लिए बठिंडा के एक निजी होटल में एक दिवसीय साईंटीफिक रिर्सच सैमीनार काआयोजन किया गया। इसमें दूर दराज से आए डाक्टरों ने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। अलकेमी के एमडी और इलेक्ट्रो होम्योपैथी फाउंडेशन के नेशनल वाईस प्रेसीडेंट प्रो. डा. हरविंदर सिंह ने इस दौरान इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा की गंभीर बीमारियों के निदान पर प्रकाश डाला। उन्होंन कहा कि कैंसर, ओवरियन सिस्ट, गाल ब्लैडर स्टोन, हैपाटाईटिस सी, डायबिटीज, कब्ज, सायटिका, अस्थमा, नशा छुड़ाना, किडनी, लीवर आदि की गंभीर बीमारियों में उक्त पैथी से इलाज के सार्थक परिणाम निकले हैं। बस डैल्यूशन और फारमूला सही होना चाहिए। उन्होंने कहा दर्जनों डाक्टरों की ओर से विभिन्न क्रोनिक डिसीज पर मरीजों की पेश की गई केस हिस्ट्री से इस बात के पुख्ता परिणाम मिले हैं। इस दौरान सीसीएम इंस्टीट्यूट व हास्पिटल की डायरेक्टर  डा. वरिंदर कौर, सीईओ डॉ. परमिंदर सिंह ने दर्जनों उदाहारण पेश किए। इस मौके डॉ. बलजीत सिंह, डॉ. आत्मा सिंह लुधियाना, डॉ.जसवीर सिंह जस्सी, डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. राजविदरसिंह, डॉ. ईशू जिंदल, डॉ. जगजीत सिंह हनुमानगढ़, डॉ. सुखजिंदर सिंह फिरोजपुर, डॉ. सिमरन कौर लुधियाना आदि ने अपने एक्सपीरियंस खास तौर पर शेयर किए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि 114 पेड़-पौधों के अर्क(स्पेजरिक एसेंस) पर आधारित उक्त इलेक्ट्रो होम्योपैथी शरीर में रक्त और रस में आई अशुद्धीयों को दूर कर रोग का जड़ से निदान करती है। 1865 में इटली के डाक्टर काउंट सीजर मैटी की ओर से उक्त पैथी की खोज की गई थी। देश में तकरीबन पांच लाख डाक्टर उक्त पैथी से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। पंजाब में इनकी तादात 25 हजार से ज्यादा है। इस मौके ई.एच.एफ.के नेशनल मीडिया कोआर्डिनेटर डॉ ऋतेश श्रीवास्तव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और केन्द्र सरकार के हैल्थ व फैमिली वैल्फेयर की ओर से अंडर न्यू साईंस के तहत उक्त पैथी की प्रेक्टिस, प्रमोशन, स्टडी पर किसी तरह की रोक नहीं है। इस की दवाऐं अन्य पैथियों से सस्ती है। उक्त पैथी की मान्यता को लेकर केंद्र सरकार के हैल्थ डिपार्टमेंट आधीन गठित आईडीसी की पांच बैठकें हो चुकी है। उम्मीद है कि जल्द रेकोनाइजेशन की मांग पूरी होगी। सेमिनार में हाजिर डाक्टरों ने  इलेक्ट्रो होम्योपैथी से उपचार को जहां   आधुनिक विज्ञान  की एक सुगम उपटार की विधि बताया वही इसके प्रसार के लिए काम करने पर जोर दिया।