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शनिवार, 10 जुलाई 2010

गुटबाजी के बीच बटी भाजपा को चाहिए तारनहार

बठिंडा। भारतीय जनता पार्टी के अंदर की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है, फिलहाल इसमें जिला बठिंडा की इकाई भी इससे अछूती नहीं रही है। आपसी गुटबाजी और दल में विभाजित भाजपा के नेता अपने हितों को साधने के लिए एक दूसरे पर आरोप जड़ने में लगे हैं। भाजपा की लडा़ई की स्थिति यह है कि एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए वह मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस हालत से भी भयावह स्थति यह है कि  वर्तमान में  भाजपा के सदस्यों व पदाधिकारियों में आपसी तालमेल ही नहीं है, इसका ताजा उदाहरण वर्तमान में भाजपा की तरफ से घोषित ट्रेडिग सेल के पदाधिकारियों के बारे में स्थानीय नेताओं की किसी तरह की जानकारी न होना है। एक तरफ इस सेल का प्रदेश संयोजक मोहनलाल गर्ग को बनाया गया है लेकिन स्थानीय नेता इस तरह के सेल का गठन होने से ही इंकार कर रहे हैं। जबकि मोहन लाल को २३ जून को इस सेल का प्रदेश संयोजक बनाया था जिसकी बकायदा घोषणा जालंधर में आयोजित भाजपा बैठक में की गई थी। 
इस बाबत गुटबाजी का आलम यह है कि जिला भाजपा में सक्रिय चार गुटों में जिला शहरी प्रधान श्यामलाल बांसल को पदमुक्त करना व बचाना है। इसी रणनीति के तहत सभी गुट अपना प्रधान बनाने के लिए जहां पार्टी की तरफ से उच्च स्तर पर लिए फैसलों को मानने से इंकार कर रहे हैं वही हाईकमान के पास एक दूसरे की शिकायते सरेआम करने में लगे हैं। गौरतलब है कि एक साल पहले पूर्व भाजपा शहरी प्रधान नरिंदर मित्तल को हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोलने पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद शहर में धन संपदा से संपन्न प्रधान के तौर पर श्यामलाल बांसल को चुना गया। वर्तमान में भाजपा के अंदर बांसल की कारगुजारी को लेकर असंतोष तीन गुट जता रहे हैं जबकि बांसल का समथर्न करने वाला एक गुट उनके बचाव में चल रहा है। अब जो गुट उन्हें हटाने की बात करता है उसके खिलाफ प्रधान गुट अपनी मुहिम शुरू कर देता है। इसमें देखा जाए तो वतर्मान में नगर निगम में डिप्टी मेयर तरसेम गोयल, भाजपा के पुराने नेता परमिंदर गोयल, नगर सुधार ट्रस्ट के पू्र्व चेयरमैन मोहन लाल गर्ग, नगर सुधार ट्रस्ट के वतर्मान चेयरमैन अशोक भारती जैसे नेता अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास कर रहे हैं।
 इन लोगों के पास एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए बेतुके तर्क भी बहुत है। मसलन एक हारा एमसी ट्रस्ट का चेयरमैन कैसे बना दिया, एक हारा एमसी ट्रेड विंग का संयोजक कैसे बनाया आदि। इसके साथ ही कुछ भाजपा नेता इस तरह के भी है जिन्हे नई जिला इकाई में स्थान नहीं दिया तो उन्होंने बगावती तेवर दिखाने के लिए प्रधान विरोधी गुटों को संरक्षण देने के साथ उन्हें भड़काने का काम शुरू कर रखा है। फिलहाल इस तरह की स्थित से गुजर रही भाजपा अपनी नैया कैसे पार लगाएगी समझ से परे है। भाजपा में हालात यह है कि केंद्रीय समिति की तरफ से मंहगाई के खिलाफ बंद सफल बनाने के आदेश को भी स्थानीय कुछ नेताओं ने मानने से इंकार कर दिया और बंद वाले दिन घरों में दुबक कर बैठे रहे। एक तरफ भाजपा के नेता गुटबाजी की किसी संभावना से इंकार कर रहे हैं वही अप्रत्यक्ष तौर पर कुछ लोग मीडिया में खबरे उछालने के लिए ऐडी़ चोटी का जोर लगाते हैं। 
इसमें दूसरे को कैसे नीचा दिखाना है यह कला इन नेताओं को भलीभांती आती है। फिलहाल मैं तो इन भाजपा नेताओं को एक ही सलाह दूंगा कि अगर मन की कसक निकालनी है तो खुले मैदान में आ जाओं,  आपने पहले भी तो हाईकमान पर भ्रष्ट्रचार के आरोप लगाने के लिए मान्नीय नरिंदर मित्तल को बली का बकरा बनाया है, बेचारों को भाजपा से बाहर निकलवाने के बाद कभी उनका हाल तक पूंछने नहीं गए अब जब आप के साथ  भेदभाव हो रहा है तो परदे के पीछे छिपकर तीर चला रहे हो? वीर हो तो नरिंदर मित्तल बन जाओं और मन की भडा़स जमकर निकाल लो। कम से कम इस तरह की घुटन से तो छुटकारा मिलेगा। ऐसा नहीं कर सकते तो पहले ही हासिये पर पहुंच चुकी भाजपा का कुछ ख्याल कर उसे मजबूत करने की तरफ ध्यान दो। हाईकमान भी इस हालात में पहुंच चुकी जिला इकाई को कोई तारनहार दे दे ताकि नेतृत्व वहीन भाजपा में नई जान डाली जा सके। 
-हरिदत्त जोशी    

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