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बुधवार, 22 जनवरी 2014

नशा करने में लड़कियां भी किसी से कम नहीं


Meerut : क्या आपको पता है कि शहर की महिलाएं भी नशे की आदी हो रही हैं. अगर नहीं पता तो हमसे जान लीजिए. सिटी की युवतियों को भी नशे का चस्का चढऩे लगा है. अभी तक तो केवल युवाओं में नशे की बात सामने आई थी. इस खबर से आप चौंक जाएंगें कि युवतियां भी अब नशे की आदी हो रही हैं. पिछले पांच सालों की बात करें तो मेरठ में ही सौ से भी अधिक महिलाएं नशे के दम पर अपना जीवन गुजारने लगी हैं. नशा मुक्ति केंद्रों के अनुसार यह महिलाएं भी यंग एज की ही हैं.
साफ बताते हैं आंकड़े जागृति नशा मुक्ति केंद्र पर ही अब तक पचास से भी अधिक युवतियां रजिस्टर्ड हो चुकी हैं. वहीं, प्राइवेट नशा मुक्ति सेंटर शताब्दी नगर स्थित परिवर्तन और बाईपास नवोदय में भी अब तक पचास के आसपास युवतियों को नशे के लिए काउंसलिंग दी गई है.

कैसे लगती है लत यह लत कहीं और से नहीं लगती बल्कि इसकी शुरूआत अपने ही घर से होती है. घरेलू कलह और तनाव आने पर महिलाएं नशा करने लगती हैं. वहीं सोसाइटी में हाई दिखने के लिए भी नशा करना महिलाओं का शौक बनने लगा है.

कहां से होती है शुरुआतशुरुआती दौर में खुद नशा टेंशनमुक्त करने के लिहाज से हल्के तौर पर किया जाता है. तनाव में नींद नहीं आने के कारण महिलाएं नींद की गोलियां खाने लगती हैं. फिर धीरे-धीरे यहीं गोलियां इतनी आदत में आ जाती है. इसके बाद एक या दो गोलियों से काम नहीं चलता है.

इंजेक्शन व शराब का नशानशा मुक्ति केंद्रों के अनुसार महिलाएं इंजेक्शन और शराब से भी नशा करने में पीछे नहीं है. लेट नाइट पार्टी में युवतियां अब इंजेक्शन से लेकर शराब तक का नशा भी करने लगी हैं. पिछले दो तीन सालों में यह बात सामने आई है कि अब सिटी की दस प्रतिशत युवतियां हाई सोसाइटी में ढालने के लिहाज से डिं्रक तक करने लगी है.

25 उम्र की युवतियों को है चस्का सिटी की महिलाओं में नशा करने वाली सबसे कम उम्र की युवती 25 वर्ष की है. 25 वर्ष से 30 की उम्र में हाई सोसाइटी और घरेलू कलह के कारण नशे की आदत में आ जाती है. वहीं 30 से 40 वर्ष में नशे की आदी महिलाओं का मेन रीजन घरेलू कलह ही होता है.

नशे से खतरा नींद की गोलियां जो एक तरह से ड्रग्स का ही काम करती हैं. इनको अधिक खाने से डिप्रेशन की समस्या भी आ जाती है. वहीं शराब से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है.
थिनर और बाम से भी नशा
नशा मुक्ति केंद्रों के अनुसार अब तो थिनर और बाम से भी नशा किया जाने लगा है. यह नशा तो हर घर में ही खुलेआम यूज किया जाता है.

दवाओं से इलाज सिटी से अक्सर नशे की शिकार महिलाएं भी काउंसिलिंग के लिए आती रहती हैं. जागृति नशा मुक्ति केंद्र के डायरेक्टर हसनैन जैदी ने बताया कि महिलाओं को काउंसिलिंग और दवाओं के जरिए ठीक करने का प्रयास किया जाता है. अगर मरीज एक परसेंट भी ठीक नहीं हो पाता तो दुबारा से इलाज किया जाता है.

"नशे की आदी महिलाओं को यह गोलियों का नशा डिपे्रशन तक का शिकार बना देता है. इंजेक्शन से नशा करना तो इससे भी भयंकर परिणाम देता है. इंजेक्शन से नशा करने पर शरीर पर घाव के निशान पड़ जाना और गु्रपिंग इंजेक्शन से नशा करने से एड्स तक की संभावना आ सकती है."
शालू, काउंसलर, नशामुक्ति केंद्र

"अधिकतर नशे की आदी महिलाएं नींद की दवाओं और इंजेक्शन से नशा करती पाई गई है."
हुसनैन जैदी, डायरेक्टर जागृति नशा मुक्ति केंद्र

"महिलाओं में भी नशे की शुरुआत हो चुकी है. अक्सर महिलाएं गोलियों का नशा करती है."
मनोज, परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र

"नशे से संबंधित अनेक तरह के जागरुकता कैंप व रैलियों का आयोजन किया गया है."
आलोक कुमार, जिला मद्यनिषेध अधिकारी क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान विभाग

"इस तरह की महिलाएं खुद को अकेला महसूस करने लगती हैं. नींद नहीं आने के कारण वह गोलियां खाने लगती हैं. धीरे धीरे यह आदत बन जाती है."
अनिता बजाज, काउंसलर

http://www.jagran.com/entertainment/controversy-biggest-films-of-the-year2014-10975384.html

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