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सोमवार, 2 मार्च 2020

सिविल अस्पताल बठिंडा की प्रबंधकीय व्यवस्था बेहाल, एक ही समय में चार डाक्टर पहुंचे डीसी की बैठक में

  • मरीजों को झेलनी पड़ी पूरा दिन परेशानी, डाक्टरों के कमरे के बाहर लोगों की लगी लंबी कतार



बठिंडा. सिविल अस्पताल में दोपहर बाद चार डाक्टरों के गैरहाजिर रहने से मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। इस दौरान डाक्टरों से जांच करवाने के लिए लोगों की लंबी कतारे लग गई। करीब दो घंटे तक लोग डाक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। दरअसल जिला प्रशासन की तरफ से डैपो और करोना वायरस को लेकर सोमवार को जिला कांम्प्लेक्स में बैठक रखी गई थी। इस बैठक में सिविल अस्पताल में तैनात चार डाक्टरों को बुलाया गया था। इसमें डैपो की बैठक में जहां मनोरोग विशेषज्ञ डा. अरुण बांसल शामिल थे वही करोना वायरस को लेकर हुई बैठक में डा, मनु गुप्ता व डा. प्रियंका सिंगला बैठक में पहुंची थी। 
वही डा.जयंत करोना वायरस को लेकर मुक्तसर में चल रहे जागरुकता अभियान में हिस्सा लेने के लिए गए हुए है। इस स्थिति में एक ही समय में चार प्रमुख डाक्टरों के अस्पताल में नहीं रहने से मरीजों का काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसमें बताते चले कि सिविल सरज्न अमरिक सिंह भी छुट्टी पर चल रहे हैं जबकि एसएमओ डा, सतीश गोयल के सेवानिर्वित होने के कारण प्रबंधकीय व्यवस्था का काम भी विकल्पिक तौर पर डाक्टरों को दिया गया है। इसके चलते अस्पताल में किसी डाक्टर के हाजिर नहीं रहने या फिर किसी अन्य काम में व्यस्त रहने पर पीछे से काम कौन देखेंगा इसकी रुटेशन सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इस अव्यवस्था का खामियाजा दूर दराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए पहुंचने वाले सैकड़ों मरीजों व उनके परिजनों को भुगतान पड़ रहा है। 
अस्पताल में मनोचिकित्सक डा. अरुण बांसल के पास प्रतिदिन डेढ़ सौ से लेकर दो सौ मरीजों की ओपीडी रहती है जिसमें नशा छोड़ने के इच्छुक लोग ज्यादा पहुंचते हैं जबकि मानसिक समस्या से ग्रस्त लोगों का उपचार भी उनके पास ही होता है। रविवार की छुट्टी होने के चलते सोमवार को अस्पताल में अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा भीड़ भी रहती है। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे रोशन लाल, राजू व मंजू ने बताया कि वह दोपहर 12 बजे से डाक्टर के आने का इंतजार कर रहे हैं पहले कहा गया कि डाक्टर है लेकिन वह जरूरी काम में व्यस्त है। इसमें कुछ समय बाद वहां बैठे सहायक ने बताया कि डाक्टर अरुण डीसी दफ्तर में मिटिंग करने गए है और कब तक वापिस आएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता है।


इस दौरान कई मरीज तो डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद वापिस लौट गए लेकिन कई मरीज डाक्टर के आने का इंतजार काफी समय तक करते रहे। यही स्थिति ईएनटी स्पेसलिस्ट प्रियंका सिंगला व डा. मनु गुप्ता के कमरे के बाहर की थी जहां मरीजों की लंबी लाइनें लगी थी व उन्हें अटेंड करने वाला कोई नहीं था। इस बारे में डाक्टर अरुण बांसल का कहना था कि डीसी दफ्तर में बुलाई जाने वाली बैठक में जाना भी जरूरी है। इससे पहले पूरा रिकार्ड भी इकट्ठा करना पड़ता है जिसे आगे दफ्तर में देना पड़ता है। इस स्थिति में बैठक के दौरान उनका ज्यादातर समय तैयारी में ही निकल जाता है। उन्होंने माना कि इस दौरान उपचार के लिए आने वाले मरीजों का खासा परेशानी का सामना करना पड़ता है लेकिन वह इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। वही एडीशनल एसएमओ का कार्यभार देख रही डा. सीमा गुप्ता का कहना है कि डीसी दफ्तर की तरफ से डैपो व करोना वायरस को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सेहत विभाग के संबंधित विभागों के डाक्टरों का जाना लाजमी होता है क्योंकि बैठक में आगामी योजना बनने के साथ पुरानी कारगुजारी का ब्योरा देना होता है। इस स्थिति में जहां जरूरत पड़ती है उसमें अस्पताल में व्याप्त साधनों के अनुसार विकल्प के तौर पर दूसरे डाक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है।


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