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शनिवार, 9 जनवरी 2021

बठिंडा में डेढ़ घंटा देरी से शुरू हुई मोड ड्रिल, 30 फीसद स्टाफ भी नहीं पहुंचा


बठिडा:
कोरोना वायरस की वैक्सीन का लंबे समय से इंतजार है। हालांकि अभी आने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन इसके टीकाकरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इन्हीं तैयारियों को लेकर शुक्रवार को जिले में तीन जगह ड्राई रन की मोक ड्रिल रखी गई थी, लेकिन वह भी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। सेहत विभाग की ओर से मोक ड्रिल के लिए जिन 25 सेहत अधिकारियों व कर्मचारियों को बुलाया गया था, उसमें अधिकतर तो आए ही नहीं। जो थोड़े-बहुत आए, उनके पास रजिस्ट्रेशन के दौरान अटैच किया गया आइडी प्रूफ तक नहीं। ऐसे में यह मोक ड्रिल पूरी तरह से फेल साबित हुई।

सेहत विभाग की ओर से मोक ड्रिल का समय सुबह नौ से दोपहर 11 बजे तक रखा गया था। हालात ये थे कि नौ बजे तक बहुत कम स्टाफ ही पहुंचा था। इसके बाद करीब डेढ़ घंटा मुख्य अतिथि का इंतजार किया गया। इस कारण मोक ड्रिल करीब डेढ़ घंटा देरी से शुरू हुई। तब तक सिर्फ 30 फीसद स्टाफ ही मौके पर पहुंचा था। यह स्थिति शहर में सिविल अस्पताल की थी, जबकि तीन जगह होने वाले इस ड्राई रन ड्रिल में स्वास्थ्य विभाग के 100 से अधिक कर्मचारियों ने हिस्सा लेना था। इस दौरान कर्मी व जिम्मेवार लोगों ने अपने साथ आइडी कार्ड लाना भी मुनासिब नहीं समझा।

 सात जनवरी को सिविल सर्जन डा. तेजवंत सिंह ढिल्लो ने बठिडा सिविल अस्पताल परिसर में वैक्सीनेशन के लिए तैयार किए गए रूम का जायजा लिया था। जहां-जहां जो कमियां नजर आईं थीं, उसे तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने इस अहम कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते आने वाले दिनों, खासकर अगले सप्ताह से शुरू होने वाली वैक्सीन मुहिम को लेकर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। 

गोनियाना मंडी अस्पताल में भी यही रहे हालात

सिविल सर्जन ने ड्राई रन ड्रिल के लिए जिन कर्मचारियों का चयन किया था, उनको आदेश दिए थे कि सिविल अस्पताल में अपना पहचान पत्र जरूर लेकर आएं। शहरी क्षेत्र में बठिडा सिविल अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्र के लिए गोनियाना मंडी सरकारी अस्पताल को वैक्सीन के ड्राई रन के लिए चुना गया था, लेकिन दोनों जगह यही हालात रहे। हालांकि पूरा स्टाफ क्यों मौके पर नहीं पहुंचा, इसका किसी के पास जवाब नहीं था।

वैक्सीनेशन बूथ पर तैयार किए गए हैं तीन कमरे

करीब दो घंटे तक चलने वाले ट्रायल के माध्यम से यह परखा जाना था कि वैक्सीन स्टोरेज प्वाइंट से किस तरह हेल्थ सेंटरों तक पहुंचेगी। वैक्सीनेशन बूथ पर तीन कमरे तैयार किए गए थे। फिलहाल सेहत विभाग ने वैक्सीनेशन के लिए सरकारी और प्राइवेट 12 टीकाकरण सेंटर बनाए हैं। उक्त सेंटरों पर 36 टीमों का गठन किया गया है। पहले चरण में 4359 सरकारी और 4798 निजी अस्पताल के डाक्टर व स्टाफ को टीकाकरण के लिए शामिल किया गया है।

टीकाकरण की तैयारियों को लेकर बढ़ी चिंता

सेहत विभाग टीकाकरण संबंधी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहा है, लेकिन आज जिस तरह से मोक ड्रिल के दौरान सेहत कर्मियों की तरफ से समय व व्यवस्था को लेकर लापरवाही दिखाई गई, उससे इस मुहिम को सफल बनाने के लिए सेहत विभाग व जिला प्रशासन को फिर से माथापच्ची करनी पड़ेगी। टीकाकरण को लेकर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। ऐसे में इस व्यवस्था को फिर से दुरुस्त करने के लिए काम करने पड़ेगा।

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