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सोमवार, 4 जनवरी 2021

बठिंडा नगर निगम चुनावों में हर दल चिंतित- कांग्रेस को सत्ता के विरोध का डर तो अकाली दल शहरी वोट खिसकने से चिंतित

-आप के हौसले बुलंद वही भाजपा शहरी वोटरों में सेधमारी के लिए लगा रही ऐड़ी चोटी का जोर 

-सोशल मीडिया व सामाजिक संगठनों के गुट ने भी की निगम चुनावों में इंट्री, बदल सकते हैं समीकरण 


बठिडा.
नगर निगम चुनावों की तिथि जनवरी माह के मध्य में किसी भी समय घोषित हो सकती है इसके लिए राज्य चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। चुनाव आचार संहिता 15 दिन तक ही रहने की उम्मीद है, भाव चुनाव तिथि घोषित होने के बाद उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए ज्यादा समय मिलने की उम्मीद नहीं है। इस स्थिति में प्रमुख सियासी दल 10 जनवरी से पहले अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है जबकि कांग्रेस व अकाली दल के साथ सामाजिक संगठनों के ग्रुप ने अपने उम्मीदवारों की घोषमा करने का सिलिसला शुरू कर दिया है। इन तमाम हलचल के बीच चुनावों में जहां सामाजिक संगठनों व सोशल मीडिया ग्रुप राज्य में प्रमुख राजनीतिक दलों के खिलाफ चल रही लहर का फायदा उठाने की फिराक में है वही भारतीय जनता पार्टी किसान आंदोलन के बीच उत्पन हुई स्थिति में शहरी अग्रवाल समाज व दलित वोट बैंक को अपने खेमे में लाने की भरसक कोशिश में जुटी है। इस बीच सबसे पेंचिदा स्थिति अकाली दल के लिए बनी हुई है। अकाली दल के प्रधान व सुप्रीमों सुखबीर सिंह बादल व बठिंडा लोकसभा क्षेत्र की सांसद हरिसमरत कौर बादल की तरफ से चुनाव से पहले अपने वर्करों को किसानी के मुद्दे में मुखर होने व मीडिया में दिखने की नसीहत दी है इससे स्पष्ट हो रहा है कि अकाली दल किसान आंदोलन में जिस गति से विरोध में उतरा व मंत्रीपद से इिस्तफा देने व एनडीए से नाता तोड़ सुर्खियों में आया वह गति धीरे-धीरे धीमी हो गई। इसमें आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस ने राजनीतिक तौर पर किसान आंदोलन में स्वयं को दिखाने की कोशिश की व कई मामलों में दोनों दल दिखाई भी दिए जिसका उन्हें सियासी फायदा मिलने की संभावना भी जताई जा रही है लेकिन इस बीच अकाली दल पिछले डेढ़ माह में खासकर दिल्ली आंदोलन में सुर्खियां बटोरने में नाकाम रही। इसकी कसर पिछले दिनों पार्टी प्रधान के समागम में विरोध प्रदर्शन से भी देखने को मिला। इसके बाद अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल ने पहले बठिंडा में वर्करों की बैठक व बाद में तख्त श्री दमदमा साहिब में आयोजित धार्मिक समागम में अपने वर्करों को सीधे तौर पर हिदायत दी कि वह किसानों को सहयोग करने के साथ उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर गतिविधियों में हिस्सा ले। इस दौरान अकाली दल कुछ करता है तो वह लोगों को दिखाई भी देना चाहिए। फिलहाल इस चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि फरवरी में राज्य भर में निकाय चुनाव होने हैं व इन चुनावों में ग्रामीण व शहरी वोटर हार-जीत का फैसला बराबर करता है। शहरों में हिंदु बहुल वोट है तो ग्रामीण इलाकों में जाट वोट की अधिकता है। वर्तमान स्थिति में अकाली दल का भाजपा के साथ गठजोड़ नहीं है। वही भाजपा शहरी वोटरों को अपने खेमे में करने के लिए पूरा जोर लगा रही है व कई स्थानों में वह उन्हें अपने पक्ष में करने में सफल भी रही है। अब अकाली दल को वोट बैंक किसान व जाट माना जाता रहा है। इस स्थिति में अकाली दल के लिए चिंता करना लाजमी भी है कि किसान आंदोलन में जिस तरह से कांग्रेस व आप किसानों के समर्थन में प्रत्यक्ष तौर पर आए व उन्होंने अखबारों व मीडिया में समर्थन भी हासिल किया तो अकाली दल को अपने वोट बैंक में सेधमारी दिखाई देने लगी है।  

तिथि घोषित होने का सभी को इंतजार  

फिलहाल नगर निगम चुनाव में पहली बार कुछ चीजें अलग होती दिख रही हैं। शिअद व भाजपा गठबंधन से बाहर अलग-अलग चुनाव लड रहे हैं तथा पार्टियों वार्डों में सर्वे करवा टिकटें वितरण का दावा कर रहीं हैं, लेकिन पहली बार सामाजिक सेवा कार्य करते लोग एक बैनर तले इकट्?ठा होकर निगम चुनाव में उतर रहे हैं तथा बाकायदा शनिवार को बठिंडा सोशल ग्रुप ने शहर के 8 वार्डों में उम्मीदवारों को उतार दिया है तथा इससे राजनीतिक हलचल जरूर तेज होगी।

ग्रुप के अनुसार शहर के 50 वार्डों में ग्रुप उम्मीदवार उतारेगा तथा अधिकतर लोगों की बैकग्राउंड समाजसेवा की है तथा ग्रुप का मकसद शहर में साफ छवि के लोगों को सामने लाना है। हालांकि ग्रुप के पास राजनीतिक अनुभव नहीं है, लेकिन ग्रुप ने वार्ड नंबर 37 में कांग्रेस नेता इंदरजीत सिंह भाऊ को उतारकर सभी को चौका दिया है। अगले कुछ दिनों में ग्रुप बाकी रहते 42 उम्मीदवारों का एलान करेगा। पहले ही सत्तापक्ष में अंदरखाते वर्कर व नेताओं में नाराजगी के भाव के मध्य दावेदारों के बागी होने के खतरे के बीच एनजीओ का सदस्यों को उतारना राजनीतिक दलों की चिंता बढा सकता है।

बठिंडा सोशल ग्रुप का गठन कुछ माह पहले ही किया गया है। काफी बढी संख्या में एनजीओ चलाते व काम करते लोगों ने एक मंच पर आकर निगम चुनाव लडने का एलान किया, लेकिन सत्ता के दबाव में काफी लोग पीछे भी हटे, लेकिन बठिंडा सोशल ग्रुप ने शनिवार को पहले 8 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर इरादे साफ कर दिए हैं यानी की ग्रुप चुनाव लडने से कतई पीछे नहीं हटेगा तथा शहर के सभी 50 वार्डों में उम्मीदवार उतारे जाएंगे।

सत्तापक्ष में बैठी कांग्रेस के विरोध में राजनीतिक दल, बागी व अब ग्रुप के लोग मैदान में आ गए हैं। कांग्रेस के विपक्ष में खडा ग्रुप काफी बंटा हुआ नजर आ रहा है। शिअद व भाजपा अलग-अलग चुनाव मैदान में हैं, ऐसे में गठबंधन की ताकत कहीं न कहीं कमजोर हुई है। वोट बंटने से विपक्ष को नुकसान हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ सत्ता के बागी हो रहे लोग नाराज लोगों को उनके साथ ला सकते हैं। वहीं एनजीओ बैकग्राउंड के लोग भी कहीं न कहीं वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं।


बठिडा में होने वाले नगर निगम के 50 वार्डों के चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने 26 व शिअद ने 23 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस के 24 व शिअद के 27 उम्मीदवारों की घोषणा होनी अभी बाकी है। वहीं आम आदमी पार्टी, भाजपा व समाजसेवी संगठनों के ग्रुप बठिडा सोशल ग्रुप ने अभी तक किसी भी वार्ड से अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस व अकाली दल ने भले ही करीब आधे उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है लेकिन अभी तक मेयर पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। 


आप ने 10 को उम्मीदवारों की घोषणा करने का किया है एलान

आम आदमी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी अभी तक 50 वार्डों में से एक के लिए भी अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं कर पाई है। आम आदमी पार्टी ने गत दिवस आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान 10 जनवरी को उम्मीदवारों की घोषणा करने का एलान किया था। भाजपा के जिला प्रधान विनोद कुमार बिटा का कहना है कि बहुत जल्द उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।



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