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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

Bathinda-सरकारी अस्पतालों से बाहर निकल डाक्टरों ने शहर में विरोध प्रदर्शन कर वेतन आयोग की सिफारिशों पर जताया विरोध


-पिछले 11 दिनों से एनपीए बंद करने व भत्तों में कटोती करने का जता रहे हैं सरकारी अस्पतालों के डाक्टर व कर्मी विरोध 

बठिंडा. छठे वेतन आयोग की सिफारिशों और उसमें नान प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) घटाने के विरोध में सरकारी डॉक्टरों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी रहा। लैब टेक्नीशियन समेत अन्य सेहत कर्मियों ने अफनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते जहां सेहत सेवाएं बंद रखी वही शहर में विरोध प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों को लेकर अपना विरोध जताया। इस दौरान शहर में बस स्टेंड सहित कई स्थानों में चक्का जाम भी किया गया। वीरवार को पीसीएमएस डॉक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सब डिवीजन अस्पतालों के अलावा अन्य सेवाओं केंद्रों पर ओपीडी समेत अन्य सेहत सेवाएं पूरी तरह बंद कर पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर अपनी जमकर भड़ास निकाली।


डाक्चरों व समूह कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता व वेतन आयोग की सिफारिशों को संशोधित कर उसमें उनकी मांग अनुसार भत्ते नहीं जोड़े जाते उनका आंदोलन जारी रहेगा व आने वाले समय में इस आंदोलन को तेज किया जाएगा। वर्तमान में जिले के सभी सिविल अस्पताल व सेहत केंद्रों में मेडिकल सेवाएं पूरी तरह ठप रखी गई है। वहीं अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। पिछले 11 दिनों से लगातार डाक्टरों की हड़ताल चल रही है। जिसका कारण एनपीए में कटौती का विरोध हैं। पीसीएमएस के प्रधान डा. गुरमेल सिंह व महासचिव खुशदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि रोष व्यक्त करने के लिए केवल ओपीडी तथा मेडिको लीगल केस बंद किए गए हैं।

कोविड व अन्य आपातकालीन  सेवाएं जारी हैं। अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो इमरजेंसी सेवाएं और कोरोना से संबंधित सभी कार्य भी ठप कर दिए जाएंगे। डा. उमेश गुप्ता, डा. रविकांत गुप्ता, डा. सतीश जिंदल ने कहा कि डाक्टरों के एनपीए में कटौती को वापस लेने की जायज मांग है। कोरोना काल के दौरान मरीजों की सेवा करने पर सरकार ने उनका वेतन बढ़ाने के बजाय एनपीए में 5 फ़ीसदी कटौती कर दी है, जोकि पूरी तरह गलत है। पंजाब सरकार की ओर से लागू किए गए 6वें पे कमीशन में एनपीए को 25 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही इसे प्राथमिक वेतन से डि-लिंक किया गया है। डाक्टरों ने एनपीए 33 प्रतिशत करने की मांग की। इस मौके पर डा. धीरज गोयल, डा. सतीश जिंदल, डा. जगरूप सिंह, डा. उमेश गुप्ता, डा. अंजली, डा. अमित कंबोज, डा. गुरजीवन सिंह, डा. हरमीत सिंह, डा. साहिल गर्ग, डा. जोबन, डा. रूपिंदर कौर, डा. पुनीत, एसएमओ डा. मनिंदरपाल सिंह, डा. गुरिंदर कौर, डा. विशेषभर चावला, डा. मनु गुप्ता, डा. प्रिंयका सिंगला, डा. गगनदीप सिंह और डा सर्बजीत सिंह रंधावा आदि उपस्थित थे।

फोटो सहित- वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में डाक्टरों ने अस्पताल से बाहर निकल सड़कों में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया व कई स्थानों में चक्का जाम कर अपना विरोध जताया। 

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