बठिंडा। विधानसभा सीट बठिंडा शहरी क्षेत्र में जहां अकाली दल-बसपा गठजोड़ व कांग्रेस ने चुनाव प्रचार जोरशोर से शुरू कर तीन चरणों का प्रचार पूरा कर शहर की हर गली मुहल्ले में लोगों से संपर्क मुहिम पूरी कर ली है वही दूसरी तरफ भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवार चुनाव प्रचार में लगातार पिछड़ रहे हैं। भाजपा के सहारे अपनी नैया पार लगाने के लिए मैदान में उतरे राज नंबरदार चुनाव को लेकर उम्मीद से अधिक विश्वसनीय दिखाई दे रहे हैं। पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान बसंत पंचमी के बाद शहर की हवा बदलने का दावा करने वाले राजनंबरदार के पास जहां वर्करों की कमी खल रही है वही चुनावी योजना व सोशल मीडिया पर प्रचार में लगातार पिछड़ रहे हैं। चुनाव आयोग की कोरोना को लेकर सख्ती के चलते बेशक चुनाव प्रचार के लिए कुछ नियम व शर्ते है जिसके चलते इस बार का चुनाव पूरी तरह से सोशल मीडिया के सहारे चल रहा है। इस स्थिति में कांग्रेस, अकाली दल ने लोगों तक पहुंच बनाने के लिए फेसबुक, वट्सएप व दूसरे प्लेटफार्म पर लगातार अभियान चला रखा है जिसमें वह वर्करों के साथ बैठकों से लेकर विभिन्न वार्डों में की जाने वाली गतिविधियों को लगातार अपडेट करने के साथ पब्लिक से राबता कायम कर रहे हैं। वही भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवार इसमें फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इसके चलते मैदान में जी जान से जुटे भाजपा वर्कर का उत्साह भी निरंतर कम हो रहा है। चुनाव प्रचार में अब दस दिन बचे हैं जिसमें शहरी क्षेत्र के लाखों मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए हर दल का उम्मीदवार जी जान से जुटा है ताकि वह हर वोटर तक पहुंच बना सके व उनका समर्थन हासिल कर सके। बठिंडा शहरी सीट से भारतीय जनता पार्टी पहली बार एक मत से उम्मीदवार के पक्ष में जुटी है लेकिन वर्करों के अंदर भाजपा उम्मीदवार की तरफ से चुनाव अभियान को लेकर समुचित योजना की कमी जोश भरने में नाकाम हो रही है। बठिंडा सीट कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी के खाते में है जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी नई होने के चलते वर्करों की संख्या न के बराबर है इस स्थिति में राज नंबरदार ने भाजपा के सिंब्बल से चुनाव लड़ने की जिद्द रखी व इसे हाईकमान ने मान भी लिया। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भाजपा का नाम व उसके पास वर्करों की अच्छी खासी टीम भी था लेकिन इन वर्करों को जमीनी स्तर पर काम में लगाने में उम्मीदवार की ढिली नीति रुकावट बन रही है। इसके चलते विधानसभा चुनावों में भाजपा गठजोड़ को मैदान में पहले से डटे दो दिग्गज कांग्रेस के मनप्रीत सिंह बादल व अकाली दल के सरुपचंद सिंगला को मात देने के लिए किसी भी तरह का बड़ा प्लान नहीं है। इसका खामियाजा भाजपा गठजोड़ को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022
बठिंडा में अकाली दल व कांग्रेस के मुकाबले पिछड़ी भाजपा गठजोड़ राज नंबरदार की चुनाव मुहिम, -मैदान में डटे भाजपा वर्करों को नहीं मिल रहा बूस्टर, शहर के कई हिस्सों में अभी भी नहीं पहुंचे उम्मीदवार
बठिंडा। विधानसभा सीट बठिंडा शहरी क्षेत्र में जहां अकाली दल-बसपा गठजोड़ व कांग्रेस ने चुनाव प्रचार जोरशोर से शुरू कर तीन चरणों का प्रचार पूरा कर शहर की हर गली मुहल्ले में लोगों से संपर्क मुहिम पूरी कर ली है वही दूसरी तरफ भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवार चुनाव प्रचार में लगातार पिछड़ रहे हैं। भाजपा के सहारे अपनी नैया पार लगाने के लिए मैदान में उतरे राज नंबरदार चुनाव को लेकर उम्मीद से अधिक विश्वसनीय दिखाई दे रहे हैं। पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान बसंत पंचमी के बाद शहर की हवा बदलने का दावा करने वाले राजनंबरदार के पास जहां वर्करों की कमी खल रही है वही चुनावी योजना व सोशल मीडिया पर प्रचार में लगातार पिछड़ रहे हैं। चुनाव आयोग की कोरोना को लेकर सख्ती के चलते बेशक चुनाव प्रचार के लिए कुछ नियम व शर्ते है जिसके चलते इस बार का चुनाव पूरी तरह से सोशल मीडिया के सहारे चल रहा है। इस स्थिति में कांग्रेस, अकाली दल ने लोगों तक पहुंच बनाने के लिए फेसबुक, वट्सएप व दूसरे प्लेटफार्म पर लगातार अभियान चला रखा है जिसमें वह वर्करों के साथ बैठकों से लेकर विभिन्न वार्डों में की जाने वाली गतिविधियों को लगातार अपडेट करने के साथ पब्लिक से राबता कायम कर रहे हैं। वही भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवार इसमें फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इसके चलते मैदान में जी जान से जुटे भाजपा वर्कर का उत्साह भी निरंतर कम हो रहा है। चुनाव प्रचार में अब दस दिन बचे हैं जिसमें शहरी क्षेत्र के लाखों मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए हर दल का उम्मीदवार जी जान से जुटा है ताकि वह हर वोटर तक पहुंच बना सके व उनका समर्थन हासिल कर सके। बठिंडा शहरी सीट से भारतीय जनता पार्टी पहली बार एक मत से उम्मीदवार के पक्ष में जुटी है लेकिन वर्करों के अंदर भाजपा उम्मीदवार की तरफ से चुनाव अभियान को लेकर समुचित योजना की कमी जोश भरने में नाकाम हो रही है। बठिंडा सीट कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी के खाते में है जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी नई होने के चलते वर्करों की संख्या न के बराबर है इस स्थिति में राज नंबरदार ने भाजपा के सिंब्बल से चुनाव लड़ने की जिद्द रखी व इसे हाईकमान ने मान भी लिया। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भाजपा का नाम व उसके पास वर्करों की अच्छी खासी टीम भी था लेकिन इन वर्करों को जमीनी स्तर पर काम में लगाने में उम्मीदवार की ढिली नीति रुकावट बन रही है। इसके चलते विधानसभा चुनावों में भाजपा गठजोड़ को मैदान में पहले से डटे दो दिग्गज कांग्रेस के मनप्रीत सिंह बादल व अकाली दल के सरुपचंद सिंगला को मात देने के लिए किसी भी तरह का बड़ा प्लान नहीं है। इसका खामियाजा भाजपा गठजोड़ को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।


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