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सोमवार, 9 मई 2022

देश के विभिन्न कोनों से छिपे टैलेंट को ढूंढने और तराशने की जरुरत

कपूरथला (राजेश तलवाड़). खेल हमारे सर्वांगीण विकास के लिए बहुत ही बेहतरीन टाॅनिक है।बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खेल बहुत ही आवश्यक हैं।बच्चा जब बहुत छोटा होता है,तब वह चारपाई पर लेटा हुआ अपने हाथों और पैरों को चलाता रहता है,जिससे उसकी वर्जिश होती है और उसका दूध पच जाता है।खेल-खेल में वह अपने-आपको तंदुरूस्त रखता है।खेल हमारे जीवन में शारीरिक,मानसिक, मनोवैज्ञानिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।खेल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।यदि हम प्रतिदिन खेल खेलते हैं तो वह हमारे मानसिक कौशल को विकसित करता है।वह हमारे मनोवैज्ञानिक कौशल में भी सुधार लाता है।खेल से हमें प्रेरणा,साहस,अनुशासन और एकाग्रता मिलती है।खेल एक शारीरिक क्रिया है जो विशेष तरीके और शैली से की जाती है और सभी के उसी के अनुसार खेलों के नाम भी होते हैं।नियमित रूप से खेल खेलना हमें बहुत सी शारीरिक बीमारियों,विशेष रूप से अधिक वजन,मोटापा और हृदय रोगों से सुरक्षित रखता है। खेल हमारे शारीरिक और मानसिक व्यायाम केे लिए सबसे आसान और आरामदायक तरीका है।सरकार द्वारा बच्चों और विद्यार्थियों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के अलावा इसके माध्यम से लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए खेलों का आयोजन राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है।प्राचीन खेलों की तुलना में आधुनिक युग में खेलों में एक बेहतर भविष्य का सपना देखा जाने लगा है।बेहतर खेल प्रदर्शन करने पर खिलाड़ी को अनेक प्रकार के सुविधाजनक समानों के अलावा अच्छी नौकरी भी मिलती है।

खेल से राजनीति को हटाना होगा-दीपक सलवान 

ब्लाक कांग्रेस के प्रधान दीपक सलवान ने कहा कि भारत में हर खेल ऑर्गनाइजेशन में महत्वपूर्ण पदों पर पॉलिटिकल लीडर्स बैठे हुए हैं जिनकी खेल की समझ बिल्कुल जीरो है।उनको सिर्फ अपनी जेबें भरने से मतलब है,खिलाड़ियों को कोई सुविधा उपलब्ध कराने में उनकी खास दिलचस्पी नहीं रहती।अगर इन ऑर्गनाइजेशन्स में राजनेताओं की जगह पूर्व खिलाड़ियों को रखें तो हर खेल की स्थिति में सुधार होगा।क्योंकि एक खिलाड़ी की मानसिकता और जरूरतों को उस दौर से गुजर चुका या उससे लगाव रखने वाला व्यक्ति ही बेहतर समझ सकता है।

ग्राउंड लेवल से हो ट्रेनिंग की व्यवस्था-राजीव वालिया 

स्पोर्ट्स सेल के पंजाब प्रधान राजीव वालिया ने कहा कि चाहे चीन हो,ऑस्ट्रेलिया हो या अमेरिका इन सभी देशों में ग्राउंड लेवल से बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है।वहां प्रॉपर एकेडेमीज बनाई गई हैं।लेकिन हमारे देश में टैलेंटेड खिलाड़ियों को ना सही ट्रेनिंग मिलती है ना ही अपने यहां ढंग की एकेडेमीज हैं।अगर देश के हर कोने में विशेष एकेडमियां बनाई जाएं जहां ग्राउंड लेवल से बच्चों को प्रॉपर ट्रेनिंग दी जाए तो निश्चित ही हालात सुधरेंगे।और स्कूलों में ऐसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं जिससे बच्चे खेल को करियर के रूप में लेने की सोचें।

तकनीक का बेहतर प्रयोग हो-राहुल बजाज

समाज सेवक राहुल बजाज ने कहा कि अब हर खेल में टेक्नोलॉजी की दखलंदाजी काफी बढ़ गई है।क्रिकेट,फुटबॉल,हॉकी हर खेल में आज ज़रूरत ऐसी कोचिंग की है जिसमें तकनीक का बेहतर प्रयोग हो।हर खेल से जुड़ी टेक्नोलॉजी हमारे खिलाड़ियों और कोचों को उपलब्ध कराई जाए।यूरोपीय देशों में टेक्निकल ट्रेनिंग पर बहुत ज्यादा प्रेशर दिया जाता है।जिसके दम पर वो देश आज हर खेल में चैम्पियन हैं।इसके साथ ही कुश्ती,फुटबॉल,हॉकी,बॉक्सिंग जैसे खेलों के लिए उचित टर्फ की भी व्यवस्था होनी चाहिए।

स्पोर्ट्स बजट का सदुपयोग हो-राकेश भार्गव 

समाज सेवक राकेश भार्गव ने कहा कि स्पोर्ट्स बजट के नाम पर जो पैसा सरकार हर साल देती है उससे यूथ एकेडमी बनाने के साथ ही देश के विभिन्न कोनों से छिपे टैलेंट को ढूंढने और तराशने में लगाया जाए तो निश्चित रूप से हमारी स्थिति सुधरेगी।भारत सरकार को खेल बजट में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए क्योंकि बेहतरीन खिलाड़ियों के निर्माण के लिए जिन सुविधाओं की ज़रूरत है।उनको पाने के लिए ज्यादा पैसा चाहिए।खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें बेहतर सुविधाएं देनी ही होंगी।देश के युवा खिलाड़ियों को बेहतर फॉरेन खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलना चाहिए ताकि वो अपने खेल को और बेहतर कर सकें।

खिलाड़ियों की सुविधाओं का ख्याल रखें-अनिल शुक्ला

समाज सेवक अनिल शुक्ला ने कहा कि ने कहा कि खिलाड़ी बहुत मुश्किल और संघर्ष के बाद बढ़ता है।एक खिलाड़ी का खेल करियर बहुत लंबा नहीं होता,लेकिन अपने बहुमूल्य समय खेल को देने के बाद राज्य के जियादातर खिलाड़ियों को निराशा ही मिली है।राज्य में खेलों का ऐसा वर्गीकरण होना चाहिए,जिससे ओलंपिक और विश्वस्तर पर खेले जाने वाले खेलों के खिलाड़ियों को सुविधाएं मिल सकें।यदि एक खिलाड़ी के खाते में बड़ी उपलब्धि हो तो उसे नौकरी मिलनी ही चाहिए।सभी राज्यों में ऐसे ही नियम होने चाहिए।

खेल संघों को मजबूत करने की नीति बने-दर्शन बहल

समाज सेवक दर्शन बहल ने कहा कि खिलाड़ियों की आजीविका के लिए सरकार को सोचना होगा।खेल नीति में इसका ध्यान विशेष रूप से रखा जाना चाहिए।एक खिलाड़ी की लाइफ कम होती है। उसे उपलब्धि के अनुसार रोजगार मिलना चाहिए।खेल संघों को मजबूत करने की नीति होनी चाहिए।  जिला,राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का निबंधन खेल विभाग को करना चाहिए,ताकि एक रिकॉर्ड हो कि हमारे खिलाड़ियों के लिए क्या करना है।नियुक्ति एजेंसियों में खेल के विशेषज्ञ को भी रखना चाहिए।खेल संघों के साथ सरकार का समन्वय हो।

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