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बुधवार, 22 जनवरी 2014

भुल्लर मामले में दिए अपने ही फैसले को पलटा सुप्रीम कोर्ट ने


नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फांसी की सजा पाए दोषियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार दया याचिका पर फैसले में देरी करती है तो इस आधार पर फांसी को उम्रकैद में बदला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 कैदियों की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने खालिस्तानी आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर के मामले में दिए अपने ही फैसले को भी पलट दिया है।
कोर्ट ने 12 अप्रैल 2013 को कहा था कि दया याचिका पर फैसले में देरी फांसी माफ करने का आधार नहीं हो सकता। मई 2011 में भुल्लर की दया याचिका खारिज हुई थी। फैसले से भुल्लर को भी राहत मिल सकती है। जिनको राहत मिली उनमें हरियाणा के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया के बेटी-दामाद के अलावा चंदन तस्कर वीरप्पन के बड़े 4 सहयोगी भी हैं।सबसे ज्यादा सात कैदी कर्नाटक के हैं। वहीं, उत्तरप्रदेश के चार, हरियाणा के दो और मध्यप्रदेश व उत्तराखंड के एक-एक कैदी शामिल हैं।
भुल्लर को भी मिल सकती राहत
26 मई 1965 को जालंधर में जन्मे और लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई का कोर्स करने वाले खालिस्तानी आतंकी दविंदरपाल सिंह भुल्लर की तमाम याचिकाएं खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2013 को फांसी देने का आदेश दिया था।
1993 में विस्फोट
1993  में दिल्ली में भुल्लर पर ब्लास्ट का आरोप। धमाके में 9 लोगों की मौत। जर्मनी भाग गया था भुल्लर। 199४ में भारत लाया गया। 2001 में फांसी की सजा सुनाई गई। 2003 में दया याचिका लगाई जो 2011 में खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2013 को फांसी देने का आदेश दिया था।

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