बठिंडा। जल ही जीवन है लेकिन इन दिनों एक बार फिर से धान की खेती के लिए पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल शुरू हो गया है, जिससे जमीनी पानी का स्तर दो से तीन फुट तक नीचे गिर रहा है। सितंबर माह तक जिले के कई हिस्सों में यह स्तर पांच फुट तक पहुंचने की आशंका है। पिछले सात साल में जिले का जमीनी पानी इसी रफ्तार से निरंतर नीचे गिर रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जहां पिछले साल जमीनी पानी की स्तर 40 से 45 फुट तक था वहीं यह 45 से 50 फुट तक चला गया है। पर्यावरण विशेषज्ञ डा. उमेंद्र दत्त शर्मा इस स्थिति को गंभीर मानते हुए खुलासा करते हैं कि अगर चार से पांच फुट तक पानी हर साल इसी तरह नीचे गिरता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में जिले में रेगिस्तान जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। पानी का स्तर नीचे गिरने का सबसे बड़ा कारण खेती में विशेषकर धान की बिजाई के दौरान होने वाली अत्यधिक दोहन है। दूसरी तरफ पिछले कुछ साल से औसत से कम बरसात हो रही है जिससे पानी का स्तर बरकरार रखने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में बेशक जमीनी पानी को क्लोराइड व रासायनिक तत्वों की अधिक मात्रा से प्रदूषित करार दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद जिले की 60 फीसदी आबादी नहरी पानी के अभाव में नलकूपों व ट्यूबवेलों पर निर्भर है। वर्तमान में जिले भर में डेढ़ लाख घर ऐसे हैं जहां नलकूपों से लोग पीने का पानी हासिल करते हैं। निगम व नगर कौंसिल मात्र 70 हजार घरों को पाइपों से स्वच्छ नहरी पानी दिलाती है। कृषि विभाग के एक अनुमान के अनुसार सामान्य तौर पर पांच फुट तक पानी का नीचे की तरफ जाना चिंताजनक पहलु है, इससे जहां किसानों को नए ट्यूबवेल पर हर साल लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं वही शहरी क्षेत्र में हैडपंपों को नए सिरे से खुदवाने के लिए एक व्यक्ति को पांच से दस हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। वर्तमान में हर साल 15 से 20 हजार हैंडपंप जमीनी पानी नीचे जाने से पानी छोड़ देते हैं। इससे उसे फिर से खुदवाने की जरूरत पड़ती है। यही नहीं कई स्थान तो ऐसे हैं जहां पानी का स्तर दस फुट तक नीचे चला गया है, ऐसे में हैंडपंप की नए सिरे से खुदाई करने व पाइपें डालने में 15 से 20 हजार रुपये प्रति खर्च आ रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी एसएस गिल का कहना है कि उन्होंने किसानों को धान की अग्रीम खेती करने से मना कर रखा है जिसमें एक समय सीमा निर्धारित होने से ट्यूबवेलों से पानी का दोहन कम हुआ है। दूसरी तरफ वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में लोग नगर निगम व नगर कौंसिल के भेजे जाने वाली पानी के टैंकरों पर निर्भर है, जो कई बार बिजली कट से मोटर न चलने या फिर तकनीकी खराबी से लोगों तक पहुंचने में असफल रहते हैं। ऐसे में लोगों के पास जमीन का दूषित पानी पीना ही एकमात्र हल होता है। इसमें भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पानी के लिए लोगों की लंबी कतारें लगना सामान्य घटना बन रही है। इस मामले में नगर निगम कमिश्नर रवि भगत का कहना है कि पानी की सप्लाई आम लोगों तक बिना रुकावट पहुंचे इसके लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। पानी की सप्लाई पूरी करने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। इससे लोगों को काफी हद तक राहत मिलेगी।
Kako hitro dvigniti denar z Vavade po igranju slotov
-
Kako hitro dvigniti denar z Vavade po igranju slotov Pri Vavada hitrost
dviga denarja po igranju slotov ni odvisna od sreče, temveč od treh
preverljivih de...
2 हफ़्ते पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें