बठिंडा. शुक्रवार को एक ओर कोरोना पाजिटिव मरीज की मौत हो गई। बठिंडा जिले के मौड़ मंडी के रहने वाले 33 वर्षीय व्यक्ति की गत 14 दिसंबर को कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। इसके बाद उसे उपचार के लिए लुधियाना सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन गत 18 दिसंबर को कोरोना कारण मौत हो गई। जिला प्रशासन द्वारा सूचना मिलने पर मृतक का शव पैक करके मौड़ मंडी लाया गया। जहां सहारा जनसेवा की लाइफ सेविंग टीम के सदस्य जग्गा सिंह, सुमीत ढींगरा, संदीप गिल ने मौड़ मंडी पहुंचकर शमशान भूमि पीपीई किटें पहनकर परिजनों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार पूर्ण सम्मान सहित किया गया। वहीं शुक्रवार को फरीदकोट मेडिकल कालेज की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में आठ लोगों की रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव मिली है। इसमें एक केस सेट्रल यूनिवर्सिटी आफ पंजाब गर्ल्स, एक सुर्खपीर रोड, एक पक्का कलां, एक एमआईजी 707 माडल टाउन फेस वन, एक कोठी नंबर 215 माडल टाउन फेस तीन, एक केस बठिंडा कैंट, एक केस एनएफएल प्लाट बठिंडा व एक रामा मंडी नजदीक बस स्टैंड से मिला है, जबकि 21 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव मिली है। ऐसे में अभी तक 8866 रोगी मिल चुके हैं, जिनमें से 7506 स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण से अब तक 216 मरीजों की इलाज दौरान मौत हो चुकी है। वहीं 17 नए कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई, जबकि 44 स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर घर भेज दिए गए। फिलहाल जिले में 232 मरीज एक्टिव हैं।
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020
एड्स के साथ ओएसटी सेंटरों में लोगों को जागरुक करने के लिए बठिंडा को मिला तीसरा पुरस्कार
-सेहत मंत्री ने बठिंडा सिविल अस्पताल की टीम को ट्राफी व प्रशंसा पत्र देकर किया सम्मानित
-सेहत मंत्री ने टीम की प्रशंसा करते कोरोना में होने वाली मौतों को रोकने के लिए दिन रात एक करने का अहवान
बठिंडा. विश्व एड्स जागरुकता दिवस पर पंजाब के विभिन्न जिलों की तरफ से एड्स कंट्रोल के साथ नशा रोकने को लेकर चलाई मुहिम व इसमें मिले सार्थक परिणामों के बाद विभिन्न जिलों को बेहतर कारगुजारी के लिए ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। इसमें बठिंडा ने प्रदेश भर में तीसरा स्थान हासिल किया। विश्व एड्स जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में लुधियाना के फिरोजपुर रोड के एक रिसोर्ट में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बतौर मुख्य मेहमान पहुंचे राज्य के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बठिंडा सेहत विभाग की टीम को प्रशंसा पत्र व ट्राफी देकर सम्मानित किया वही जिला टीम की तरफ से पिछले एक साल में नामुराद बीमारी को रोकने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। राज्य भर में एड्स जागरुकता को लेकर तीसरा स्थान हासिल करना इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि बठिंडा जिला इस साल कोरोना वायरस से प्रबावित जिलों में शामिल था व पूरी सेहत विभाग की टीम पहले कोरोना व बाद में मौसमी बीमारी, डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों को रोकने में जुटी रही। इसी बीच टीम की तरफ से प्रदेश व केंद्र स्तर पर मिले विभिन्न कार्यक्रमों में भी अहम भूमिका निभाई व राज्य के 22 जिलों में तीसरा स्थान हासिल किया। पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की तरफ से करवाए समांगम में सेहत मंत्री ने कहा कि भारत में एड्स के पहले केस का पता लगने के बाद अब 39 साल बीत गए हैं, उस समय कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि यह विश्वव्यापी समस्या बन जाएगी। एक दशक पहले भी एचआइवी और एड्स गंभीर समस्या के तौर पर जाने जाते थे। इस समय एड्स विकास के लिए विपदा बन गई है। स्वास्थ्य और परिवार भलाई विभाग के विशेष सचिव -कम- प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी अमित कुमार ने बठिंडा जिले की सेहत टीम को बधाई देते उनके कार्य की सराहना की व उम्मीद जताई कि वह आगे भी इसी तरह अपने कर्तव को पूरा करते लोगों को सेहत के प्रति जागरुक करने के साथ उन्हें बीमारियों से बचाने के लिए दिन रात एक करेंगे। सिविल सर्जन डा. अमरिक सिंह सिद्दू ने टीम को बधाई देते कहा कि युवाओं में नशे के लिए इंजेक्शन के साथ दवाइयों के सेवन की आदत बढ़ रही है। पिछले चार-पांच साल से नशा करने वाले नशीली गोली या फिर इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं जो चिंता का विषय है। उन्होंने इस तरह तेजी से काम करने की जरूरत पर बल दिया। राज्य में इस दौरान 18 जिलों में 35 ओएसटी केंद्र कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में एड्स जागरूकता में अहम रोल निभाने वाले डाक्टरों, स्टाफ सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने जिला टीम का अहवान किया कि वह कोरोना के एक्टिव केस कम पर मौत के आंकड़ों पर भी काबू पाने के लिए काम करे। सरकारी अस्पतालों में सीमित साधन होते हुए भी कोरोना पर काबू पाया गया है। दिल्ली और हरियाणा के मुकाबले पंजाब में कोरोना की सेकेंड वेव को रोकने में हम काफी सफल हुए हैं। राज्य भर की बात करें तो अब कोरोना के एक्टिव केस कम रह गए हैं और मौत के बढ़ रहे आंकड़ों पर भी काबू पाना बाकी है। उन्होंने कहा कि अब 70 साल से अधिक उम्र के कोरोना संक्रमित आने वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जाएगा ताकि मृत्यु दर कम हो सके।
यहां बताना जरूरी है कि भारत में स्थापित ओएसटी सेंटरों के मुकाबले बठिंडा, जालंधर व लुधियाना सिविल अस्पताल के ओएसटी सेंटर में मरीजों (आइडीयू) की संख्या अधिक है। मतलब सेंटर द्वारा लोगों को अधिक जागरूक किया गया। इसी कारण सेंटर को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। एक ओर तो ओएसटी सेंटर को मरीज ज्यादा होने के कारण सम्मानित किया, वहीं दूसरी और देखा जाए तो पंजाब में नशे का सेवन दूसरे जिलों के मुकाबले अधिक है व प्रतिदिन 60 से 100 लोगों की ओपीडी बठिंडा के सेंटरों में नशा छोड़ने वाले लोगों की है। ओएसटी सेंटर में नशा करने वाले मरीजों की गिनती हर माह 1500 से ऊपर रहती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अभी भी नशे की चुंगल में है। जानकारों की माने तो सेंटर में मरीज ज्यादातर वह है जो नशा खरीदने में असमर्थ होकर वहां पहुंचते हैं। सेंटर में मरीजों का नशा छुड़ाने के अलावा काला पीलिया, टीबी व एचआइवी का भी इलाज किया जाता है ताकि मरीजों को एक ही जगह में सभी समाधान मिल सके और उनके अंदर नशे को त्यागने की ललक भी बरकरार है।
किसानों को मनाने का नमो मंत्र:पीएम बोले- MSP न बंद होगी, न खत्म होगी; कुछ लोग किसानों को डराकर राजनीति चमका रहे
प्रधानमंत्री ने कहा कि 35 लाख किसानों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं, इसमें किसी बिलौलिए की भूमिका नहीं है।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे हैं। इधर सरकार, किसी न किसी बहाने नए कानूनों के फायदे गिना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के किसानों के सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। 53 मिनट के भाषण में मोदी ने किसानों की सबसे बड़ी चिंता न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर एक बार फिर कहा कि MSP न बंद होगी, न खत्म होगी। उन्होंने कहा कि किसान उन लोगों से बचकर रहें, जो कृषि सुधारों पर झूठ का जाल फैला रहे हैं।
MSP पर मोदी की 3 अहम बातें
1. MSP न बंद होगी, न खत्म होगी
एक झूठ बार-बार बोला जा रहा है। मैंने कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने का काम हमारी सरकार ने किया। सरकार MSP को लेकर इतनी गंभीर है कि बुआई से पहले इसकी घोषणा करती है। किसानों को पता चल जाता है कि किस फसल पर कितनी MSP मिलने वाली है। ये कानून 6 महीने पहले लागू हो चुके थे। MSP की घोषणा पहले की तरह हुई, खरीद उन्हीं मंडियों में हुई। कानून बनने के बाद MSP की घोषणा हुई, इसी MSP पर फसलों की खरीद हुई। मैं कहना चाहता हूं कि MSP न बंद नहीं होगी, न खत्म होगी।
2. किसानों को गुमराह किया जा रहा
2014 से पहले की सरकार के 5 साल में किसानों से सिर्फ डेढ़ लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी गई। हमने किसानों को दाल की पैदावार के लिए प्रोत्साहित किया। हमने 112 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी। उन्होंने दाल पैदा करने वाले किसानों को 650 करोड़, तो हमने 50 हजार करोड़ दिए। आज दाल के किसान को ज्यादा पैसा मिल रहा है। जो लोग न किसानों को ढंग से MSP दे सके, न MSP पर ढंग से खरीदी कर सके, वे किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
3. हमने किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया
पहले वालों को लगा कि सरकार को किसानों पर ज्यादा खर्च न करना पड़े, इसलिए स्वामीनाथन रिपोर्ट को 8 साल तक दबाकर रखा। हमारी सरकार किसानों को अन्नदाता मानती है। हमने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट निकाली। किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया। किसानों के साथ धोखाधड़ी का उदाहरण कर्ज माफी का वादा है। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कहा गया कि कर्ज माफ कर देंगे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। राजस्थान के लाखों किसान आज भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। मैं यही सोचता हूं कि कोई इस हद तक भोले-भाले किसानों के साथ छल-कपट कैसे कर सकता है।
कृषि कानूनों पर 4 अहम बातें
1. नए कानूनों की चर्चा बहुत हो रही है
समय हमारा इंतजार नहीं कर सकता। तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत का किसान सुविधाओं के अभाव में पिछड़ता जाए, ये ठीक नहीं है। जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वे अब हो रहे हैं। पिछले 6 साल में सरकार ने किसानों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं। नए कानूनों की चर्चा बहुत हो रही है। ये कानून रातों-रात नहीं आए। 20-22 साल से देश की और राज्यों की सरकारों, किसान संगठनों ने इस पर विमर्श किया। कृषि अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक इस क्षेत्र में सुधार की मांग करते आए हैं।
2. नए कानून बनने से किसान अपनी मर्जी का मालिक
70 साल से किसान सिर्फ मंडी में अनाज बेच सकता रहा था। नए कानून में सिर्फ इतना कहा है कि जहां फायदा हो वहां अनाज बेचें। चाहे मंडी में उपज बेचें या फिर बाहर जाकर। सब कुछ किसान की मर्जी पर है। नए कानूनों के तहत किसान ने उपज बेचना शुरू भी कर दी है। बीते दशकों में किसानों के साथ जो पाप किया गया है, हम कानून बनाकर सिर्फ इसका प्रायश्चित कर रहे हैं। पता नहीं क्यों झूठ फैलाया जा रहा है।
3. कोई नया फार्मिंग एग्रीमेंट लागू नहीं कर रहे
APMC बंद करने की बात कहां से आ रही है? एक और झूठ चल रहा है- फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर। हम कोई नया फार्मिंग एग्रीमेंट लागू नहीं कर रहे। कई राज्यों में पहले से ऐसे एग्रीमेंट चल रहे हैं। देश में फार्मिंग एग्रीमेंट से जुड़े जो तौर-तरीके थे, उनमें बहुत रिस्क था। हमने तय किया कि फार्मिंग एग्रीमेंट में सबसे बड़ा हित किसान का देखा जाएगा। किसान के साथ जो वादा किया जाएगा, उसे पूरा करना होगा। अगर एग्रीमेंट में कम पैसे थे, पर मुनाफा बढ़ गया तो किसान को इसमें से भी पैसा मिलेगा। नए कानून में सख्ती स्पॉन्सर पर दिखाई गई है, किसान पर नहीं। स्पॉन्सर को एग्रीमेंट खत्म करने का अधिकार नहीं है।
4. कृषि सुधारों पर शक की कोई वजह नहीं
हम अन्नदाता को ऊर्जा दाता बनाने के लिए काम कर रहे हैं। मधुमक्खी, पशु और मछली पालन को महत्व दे रहे हैं। पहले 76 हजार टन शहद का उत्पादन होता था, आज 1.76 लाख टन शहद का उत्पादन हो रहा है। मत्स्य संपदा योजना भी शुरू की गई है। मैं विश्वास से कहता हूं कि कृषि सुधारों पर अविश्वास का कोई कारण ही नहीं है।
विपक्षियों पर 3 वार
1. सारा क्रेडिट ले लीजिए, लेकिन किसानों को आसानी से रहने दीजिए
किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो लोग अपने घोषणापत्र में सुधारों के वादे तो करते रहे, पर मांगों को टालते रहे, क्योंकि किसान प्राथमिकता में नहीं था। पुराने घोषणापत्र देखे जाएं, पुराने बयान सुने जाएं तो आज जो कृषि सुधार किए गए हैं, वे वैसे ही हैं, जो बातें कही गई थीं। उनको पीड़ा इस बात की है कि जो हमने कहा, वो मोदी ने कैसे कर दिया। मोदी को क्रेडिट कैसे मिला? मैं कहता हूं कि सारा क्रेडिट अपने पास रख लीजिए, लेकिन किसानों को आसानी रहने दीजिए। अब अचानक झूठ का जाल फैलाकर किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वॉर किए जा रहे हैं।ट
2. कुछ लोग किसानों को डर दिखाकर राजनीति चमका रहे
सरकार बार-बार पूछ रही है कि किस क्लॉज में दिक्कत है, बताइए। इन दलों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। किसानों की जमीन चली जाएगी, इसका डर दिखाकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। जब उन्हें सरकार चलाने का मौका मिला था, तब उन्होंने क्या किया, ये याद रखना जरूरी है। उनका कच्चा चिट्ठा आपके सामने खोलना चाहता हूं। किसानों की बातें करने वाले लोग, झूठे आंसू बहाने वाले लोग कैसे हैं, इसका सबूत स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट है। ये लोग इस रिपोर्ट को 8 साल दबाकर बैठे रहे।
3. किसानों को तबाह करने में कुछ दलों ने कसर नहीं छोड़ी
हमारी सरकार ने गेहूं और धान की खरीद पर किसानों को 8 लाख करोड़ से ज्यादा दिए। पहले की सरकार में दाल विदेश से मंगाई जाती थी। जिस देश में दाल की सबसे ज्यादा खपत है, वहां के किसानों को तबाह करने में इन लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। किसान परेशान थे, ये लोग मौज ले रहे थे। ये सच है कि कभी प्राकृतिक आपदा या संकट आने पर विदेश से मदद ली जा सकती है, लेकिन हमेशा तो ऐसा नहीं कर सकते।
किसानों को मोदी का भरोसा
शंका दूर करने के लिए बातचीत को तैयार, 25 को फिर बात करेंगे
जिन थोड़े से किसानों में नए कानूनों को लेकर जो आशंका बची है, वे समझें और भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें। मेरे कहने के बाद, सरकार के प्रयासों के बाद अगर आपके मन में शंका है, तो हम सिर झुकाकर, विनम्रता से बात करने के लिए तैयार हैं। किसान का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 25 दिसंबर को अटल जी के जयंती के मौके पर फिर इस विषय पर किसानों से बात करूंगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 35 लाख किसानों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं, इसमें किसी बिलौलिए की भूमिका नहीं है।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे हैं। इधर सरकार, किसी न किसी बहाने नए कानूनों के फायदे गिना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के किसानों के सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। 53 मिनट के भाषण में मोदी ने किसानों की सबसे बड़ी चिंता न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर एक बार फिर कहा कि MSP न बंद होगी, न खत्म होगी। उन्होंने कहा कि किसान उन लोगों से बचकर रहें, जो कृषि सुधारों पर झूठ का जाल फैला रहे हैं।
MSP पर मोदी की 3 अहम बातें
1. MSP न बंद होगी, न खत्म होगी
एक झूठ बार-बार बोला जा रहा है। मैंने कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने का काम हमारी सरकार ने किया। सरकार MSP को लेकर इतनी गंभीर है कि बुआई से पहले इसकी घोषणा करती है। किसानों को पता चल जाता है कि किस फसल पर कितनी MSP मिलने वाली है। ये कानून 6 महीने पहले लागू हो चुके थे। MSP की घोषणा पहले की तरह हुई, खरीद उन्हीं मंडियों में हुई। कानून बनने के बाद MSP की घोषणा हुई, इसी MSP पर फसलों की खरीद हुई। मैं कहना चाहता हूं कि MSP न बंद नहीं होगी, न खत्म होगी।
2. किसानों को गुमराह किया जा रहा
2014 से पहले की सरकार के 5 साल में किसानों से सिर्फ डेढ़ लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी गई। हमने किसानों को दाल की पैदावार के लिए प्रोत्साहित किया। हमने 112 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी। उन्होंने दाल पैदा करने वाले किसानों को 650 करोड़, तो हमने 50 हजार करोड़ दिए। आज दाल के किसान को ज्यादा पैसा मिल रहा है। जो लोग न किसानों को ढंग से MSP दे सके, न MSP पर ढंग से खरीदी कर सके, वे किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
3. हमने किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया
पहले वालों को लगा कि सरकार को किसानों पर ज्यादा खर्च न करना पड़े, इसलिए स्वामीनाथन रिपोर्ट को 8 साल तक दबाकर रखा। हमारी सरकार किसानों को अन्नदाता मानती है। हमने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट निकाली। किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया। किसानों के साथ धोखाधड़ी का उदाहरण कर्ज माफी का वादा है। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कहा गया कि कर्ज माफ कर देंगे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। राजस्थान के लाखों किसान आज भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। मैं यही सोचता हूं कि कोई इस हद तक भोले-भाले किसानों के साथ छल-कपट कैसे कर सकता है।
कृषि कानूनों पर 4 अहम बातें
1. नए कानूनों की चर्चा बहुत हो रही है
समय हमारा इंतजार नहीं कर सकता। तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत का किसान सुविधाओं के अभाव में पिछड़ता जाए, ये ठीक नहीं है। जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वे अब हो रहे हैं। पिछले 6 साल में सरकार ने किसानों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं। नए कानूनों की चर्चा बहुत हो रही है। ये कानून रातों-रात नहीं आए। 20-22 साल से देश की और राज्यों की सरकारों, किसान संगठनों ने इस पर विमर्श किया। कृषि अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक इस क्षेत्र में सुधार की मांग करते आए हैं।
2. नए कानून बनने से किसान अपनी मर्जी का मालिक
70 साल से किसान सिर्फ मंडी में अनाज बेच सकता रहा था। नए कानून में सिर्फ इतना कहा है कि जहां फायदा हो वहां अनाज बेचें। चाहे मंडी में उपज बेचें या फिर बाहर जाकर। सब कुछ किसान की मर्जी पर है। नए कानूनों के तहत किसान ने उपज बेचना शुरू भी कर दी है। बीते दशकों में किसानों के साथ जो पाप किया गया है, हम कानून बनाकर सिर्फ इसका प्रायश्चित कर रहे हैं। पता नहीं क्यों झूठ फैलाया जा रहा है।
3. कोई नया फार्मिंग एग्रीमेंट लागू नहीं कर रहे
APMC बंद करने की बात कहां से आ रही है? एक और झूठ चल रहा है- फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर। हम कोई नया फार्मिंग एग्रीमेंट लागू नहीं कर रहे। कई राज्यों में पहले से ऐसे एग्रीमेंट चल रहे हैं। देश में फार्मिंग एग्रीमेंट से जुड़े जो तौर-तरीके थे, उनमें बहुत रिस्क था। हमने तय किया कि फार्मिंग एग्रीमेंट में सबसे बड़ा हित किसान का देखा जाएगा। किसान के साथ जो वादा किया जाएगा, उसे पूरा करना होगा। अगर एग्रीमेंट में कम पैसे थे, पर मुनाफा बढ़ गया तो किसान को इसमें से भी पैसा मिलेगा। नए कानून में सख्ती स्पॉन्सर पर दिखाई गई है, किसान पर नहीं। स्पॉन्सर को एग्रीमेंट खत्म करने का अधिकार नहीं है।
4. कृषि सुधारों पर शक की कोई वजह नहीं
हम अन्नदाता को ऊर्जा दाता बनाने के लिए काम कर रहे हैं। मधुमक्खी, पशु और मछली पालन को महत्व दे रहे हैं। पहले 76 हजार टन शहद का उत्पादन होता था, आज 1.76 लाख टन शहद का उत्पादन हो रहा है। मत्स्य संपदा योजना भी शुरू की गई है। मैं विश्वास से कहता हूं कि कृषि सुधारों पर अविश्वास का कोई कारण ही नहीं है।
विपक्षियों पर 3 वार
1. सारा क्रेडिट ले लीजिए, लेकिन किसानों को आसानी से रहने दीजिए
किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो लोग अपने घोषणापत्र में सुधारों के वादे तो करते रहे, पर मांगों को टालते रहे, क्योंकि किसान प्राथमिकता में नहीं था। पुराने घोषणापत्र देखे जाएं, पुराने बयान सुने जाएं तो आज जो कृषि सुधार किए गए हैं, वे वैसे ही हैं, जो बातें कही गई थीं। उनको पीड़ा इस बात की है कि जो हमने कहा, वो मोदी ने कैसे कर दिया। मोदी को क्रेडिट कैसे मिला? मैं कहता हूं कि सारा क्रेडिट अपने पास रख लीजिए, लेकिन किसानों को आसानी रहने दीजिए। अब अचानक झूठ का जाल फैलाकर किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वॉर किए जा रहे हैं।ट
2. कुछ लोग किसानों को डर दिखाकर राजनीति चमका रहे
सरकार बार-बार पूछ रही है कि किस क्लॉज में दिक्कत है, बताइए। इन दलों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। किसानों की जमीन चली जाएगी, इसका डर दिखाकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। जब उन्हें सरकार चलाने का मौका मिला था, तब उन्होंने क्या किया, ये याद रखना जरूरी है। उनका कच्चा चिट्ठा आपके सामने खोलना चाहता हूं। किसानों की बातें करने वाले लोग, झूठे आंसू बहाने वाले लोग कैसे हैं, इसका सबूत स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट है। ये लोग इस रिपोर्ट को 8 साल दबाकर बैठे रहे।
3. किसानों को तबाह करने में कुछ दलों ने कसर नहीं छोड़ी
हमारी सरकार ने गेहूं और धान की खरीद पर किसानों को 8 लाख करोड़ से ज्यादा दिए। पहले की सरकार में दाल विदेश से मंगाई जाती थी। जिस देश में दाल की सबसे ज्यादा खपत है, वहां के किसानों को तबाह करने में इन लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। किसान परेशान थे, ये लोग मौज ले रहे थे। ये सच है कि कभी प्राकृतिक आपदा या संकट आने पर विदेश से मदद ली जा सकती है, लेकिन हमेशा तो ऐसा नहीं कर सकते।
किसानों को मोदी का भरोसा
शंका दूर करने के लिए बातचीत को तैयार, 25 को फिर बात करेंगे
जिन थोड़े से किसानों में नए कानूनों को लेकर जो आशंका बची है, वे समझें और भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें। मेरे कहने के बाद, सरकार के प्रयासों के बाद अगर आपके मन में शंका है, तो हम सिर झुकाकर, विनम्रता से बात करने के लिए तैयार हैं। किसान का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 25 दिसंबर को अटल जी के जयंती के मौके पर फिर इस विषय पर किसानों से बात करूंगा।
खुदकुशी करने वाले किसान परिवारों को मिलने वाले मुआवजे पर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 13 मीटिग में सिर्फ 42 केस पास, 248 रद
बठिडा : साढ़े तीन साल बाद भी खुदकुशी करने वाले किसान परिवारों को मिलने वाले मुआवजे के केसों को बड़ी गिनती में रद कर दिया है। बठिडा जिले में प्रशासनिक अधिकारियों ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक कुल 13 मीटिग की हैं। इसमें 42 खुदकुशी करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की सिफारिश कर दी गई, मगर 248 किसानों मजदूरों के केसों को रद कर दिया गया। इसमें मजेदार बात यह है कि साल 2019 में पीड़ित किसान परिवारों को मुआवजा देने के लिए बनी कमेटी की एक ही मीटिग फरवरी में हुई तो 2020 में कोरोना के कारण एक भी मीटिग नहीं हुई।
उक्त मीटिगों में जिन केसों को रद किया गया है, उनमें 102 केस तो ऐसे हैं, जिन्होंने परनोट पर कर्ज लिया है और वह संबंधित एसडीएम से मार्क नहीं हुए। वहीं 72 केस ऐसे हैं, जिनमें पूरे सुबूत नहीं है। यहां तक कि ज्यादातर केसों को पोस्टमार्टम की रिपोर्ट न होने के कारण रद किया गया। इस कारण इनको मुआवजा देने की पालिसी के अधीन कवर नहीं किया जाता। इसके अलावा बीमारी के कारण मरने वाले सात किसानों के केस रद किए गए, जिसमें तीन किसानों की मौत तो कैंसर के कारण हुई। इसी प्रकार सात केसों को रद करने पर सिर्फ यही तर्क दिया कि यह पालिसी के अधीन कवर नहीं होते। इसके अलावा एक केस को सिर्फ एग्रीकल्चर विभाग द्वारा रिपोर्ट देने, तीन केसों को न किसान न मजदूर होने, 11 केसों को किसानों पर कर्ज न होने, 3 केसों को जहरीली चीज खाने, 1 केस को पहले सरकारी नौकरी करने, 1 केस को आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करने पर रद कर दिया गया।दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार बनने के साढ़े तीन साल के दौरान जिले में 179 किसानों व मजदूरों ने कर्ज व आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर ली थी।
तीन सालों में ऐसे किए केस रिजेक्ट
खुदकुशी करने वाले किसानों व मजदूरों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए डीसी की प्रधानगी में बनी कमेटी द्वारा जांच के बाद मुआवजा देने के लिए पंजाब सरकार को सिफारिश की जाती है। इसके तहत साल 2017 में इस कमेटी की 4 मीटिग हुई। जिसमें 9 खुदकुशी पीड़ित किसान परिवारों को मुआवजा देने की सिफारिश की गई। वहीं 89 किसान मजदूर परिवारों को मुआवजा देने से इंकार कर दिया। इसी प्रकार साल 2018 में कमेटी की छह मीटिग हुई, जिसमें 32 किसानों मजदूरों के परिवारों को मुआवजा देने की सिफारिश की तो 119 पीड़ित परिवारों के आवेदनों को कोई न कोई बहाना लगाकर रिजेक्ट कर दिया। इसके अलावा 2019 में कमेटी की एक ही मीटिग हुई, जिसमें एक परिवार को मुआवजा देने की सिफारिश की तो बाकी के केस रिजेक्ट कर दिए। वहीं 2020 में कोई मीटिग नहीं हुई।
मुआवजा देने पर सरकार की नाकामियां
कमेटी की हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2018 के दौरान खुदकुशी पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की सिफारिश करने वाली कमेटी की दो मीटिग तो ऐसी हुई, जिसमें किसी भी किसान परिवार को मुआवजा देने की सिफारिश नहीं की गई। इन दोनों मीटिग के दौरान 32 पीड़ित परिवारों के आवेदनों को रद्द कर दिया। इसके तहत दो अगस्त 2018 को हुई मीटिग में किसान परिवारों के पांच तो दो नवंबर 2018 की मीटिग में 27 आवेदक रद किए गए।
बीड़ तालाब मिनी जू लोगों के लिए खोला, थर्मल स्क्रीनिग के बाद होगी एंट्री
बठिडा : लोगों के मनोरंजन का साधन बठिडा का बीड़ तालाब मिनी जू आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। जंगलात विभाग ने सरकार से आदेश मिलने के बाद कोरोना के नियमों को ध्यान में रखते हुए यहां पर लोगों की एंट्री की इजाजत दे दी है। जू में जाने से पहले थर्मल स्क्रीनिग से होकर गुजरना पड़ेगा। अगर इसमें किसी के शरीर का तापमान ज्यादा आ जाता है तो उसको वापिस भेज दिया जाएगा। यहीं नहीं जू में टिकट काउंटर से लेकर पिजरों में कैद जानवरों को देखने के लिए सर्कल बनाए गए हैं।
बीड़ तालाब जू में पहले दिन 40 के करीब लोगों ने आनंद लिया। सर्दियों के मौसम में जू खुलने से आए बच्चों ने भी झूलों का काफी आनंद लिया। मिनी जू 22 मार्च से कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लाकडाउन के चलते बंद कर दिया गया था। यहां तक कि बठिडा के मिनी जू कम डियर सफारी के लिए हर हफ्ते एक हजार के करीब टिकटों की बिक्री होती थी। इसमें सोमवार से शुक्रवार तक तो रोजाना 50 से 60 टिकेट ही बिकते थे। लेकिन शनिवार व रविवार को यहां पर टिकटों की बिक्री 400 से भी बढ़ जाती थी। इसके अलावा डियर सफारी के लिए अलग से 30 रुपये टिकट है। इसमें एक बात यह भी है कि तेंदुए आने से पहले तो यहां पर शनिवार व रविवार को भी बहुत ही कम लोग आते थे। मगर अब लोगों की गिनती काफी बढ़ गई थी।
टाइगर सफाई की योजना फिर से शुरू करने की तैयारी
दूसरी तरफ बीड़ तालाब स्थित मिनी जू में टाइगर सफारी बनाने की चल रही योजना को एक बार फिर से शुरू करने की तैयारी हो गई है। इसके लिए फाइलों को तैयार कर मंजूरी के लिए चंडीगढ़ छत्तबीड़ जू में भेज दिया गया है। 2017 में मिनी जू में टाइगर सफारी का प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका था तो लोगों को आकर्षित करने के लिए तेंदुए लाए गए थे। उस समय दो मेल व एक फीमेल तेंदुआ लाया गया था। मगर कुछ समय पहले फीमेल तेंदुए की मौत हो गई तो उसकी जगह पर जंगल से मेल तेंदुआ ही लाया गया। इसके बाद बीड़ तालाब मिनी जू में लोगों का आना जाना काफी बढ़ गया। वहीं अब टाइगर सफारी बनाने की तैयारी की जा रही है। मिनी जू में फिलहाल तीन मेल तेंदुए होने के बाद अब फीमेल तेंदुए को लेकर आने की भी तैयारी हो गई है। इसके लिए छत्तबीड़ जू चंडीगढ़ से मंजूरी भी मिल गई है।
इस समय बीड़ तालाब जू में ईमू, उल्लू, बजरीगर, मोर, बंदर, तोते, कबूतर जैसे जंगली पशु- पक्षी हैं। वहीं डियर सफारी अलग से बनाई गई है। यहां पर विभिन्न नस्लों के 234 हिरण हैं, जिनको सफारी में खुला छोड़ा गया है। इनको देखने के लिए टाय ट्रेन से घुमाया जाता है। यहां तक कि हर जानवर की खुराक भी अलग अलग है। इसमें अकेले तेदूंए ही हर रोज 12 किलो मास खाते हैं। इसको सहारनपुर से मंगवाया जाता है। यहीं नहीं वहीं अब टाइगर सफारी बनने के बाद विभाग को उम्मीद है कि दर्शक काफी बढ़ जाएंगे। जबकि टाइगर सफारी को ओपन बनाया जाएगा, जिसमें घूमने के लिए लोगों को एक कवर वैन में बिठाकर घुमाया जाएगा।
जू को लोगों के लिए खोल दिया गया है : डीएफओ स्वर्ण सिंह
डीएफओ स्वर्ण सिंह का कहना है कि जू को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। मगर अब यहां पर आने वालों के लिए हर प्रकार के कोरोना को लेकर जारी हुए नियमों का ध्यान रखा जाएगा।
फाजिल्का की फर्म ने 18.36 लाख का कोयला मंगवाकर नहीं दी पेयमेंट, दो नामजद
बठिंडा. अबोहर की एक फर्म के खिलाफ 18 लाख 36 हजार 332 रुपए का कोयला मंगवाकर उसकी पेयमेंट नहीं करने पर नथाना पुलिस ने केस दर्ज किया है। इसमें दो लोगों को केस में नामजद किया गया है। नथाना पुलिस के पास अमनदीप बांसल वासी भुच्चों मंडी ने लिखित शिकायत दी कि वह पंजाब में अलग-अलग फर्म को कोयला सप्लाई करने का काम करता है। पिछले दिनों लवकेश सिंगला, कपिल सिंगला वासी तारा एस्टेंट जिला फाजिल्का ने अपनी फर्म के लिए करीब छह ट्राला कोयला उनके मार्फत मंगवाया था। इस कोयले की कुल कीमत करीब 18 लाख 36 हजार 332 रुपए बनती थी। इस कोयले की सप्लाई देने के बाद फर्म को पैसे देने के लिए कहा तो वह मुकर गए व पैसे देने से इंकार कर दिया। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस के पास दी गई। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया है लेकिन अभी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
सात किलोग्राम भुक्की सहित एक गिरफ्तार
बठिंडा. संगत पुलिस ने एक व्यक्ति को सात किलोग्राम भुक्की के साथ गिरफ्तार किया है। संगत पुलिस के सहायक थानेदार चरणजीत सिंह ने बताया कि जसप्रीत सिंह वासी पथराला को गांव में सात किलोग्राम भुक्की के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी पर नशा निरोधक एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
मिशन फतेह में विशेष सहयोग देने वाले यशवीर गोयल को मिला डायमंड पुरस्कार
बठिंडा. शहर का तेजस्वी व प्रतिभा से भरे दिव्याग युवा यशवीर गोयल को राज्य सरकार ने मिशन फतेह में जागरुकता के लिए डायमंड पुरस्कार व बैच देकर सम्मानित किया है। बठिंडा शहर के विशेष रूप से विकलांग युवा जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए एक राष्ट्रीय पुरस्कार और दो राज्य पुरस्कार पहले भी जीते हैं। पंजाब सरकार द्वारा शुरू किए गए मिशन फतेह कार्यक्रम में डायमंड अवार्ड प्राप्त करने के साथ अपनी उपलब्धी में एक और पंख जोड़ा है। उक्त युवा कोरोना से बचने के लिए सभी क्षेत्रों से संबंधित लोगों को शिक्षित करके कोविड -19 महामारी का मुकाबला करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
डायमंड अवार्ड प्राप्त कर यशवीर ने उन व्यक्तियों की सूची में अपना नाम दर्ज करवाने में कामयाबी हासिल की, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा अपने मिशन फतेह कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रतियोगिता में भारी अंक हासिल करने के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया है। वह अब तक पंजाब के एकमात्र विशेष रूप से विकलांग युवा हैं, जो यह सम्मान पाने में कामयाब रहे हैं।
इससे पहले, यशवीर ने मिशन फतेह कार्यक्रम में स्वर्ण पदक प्राप्त किया, जिसमें पंजाब के लगभग 3.5 लाख लोगों ने भाग लिया। उन्होंने लगभग 24932 अंक बनाए। यशवीर विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों और निजी संगठनों द्वारा कोरोना काल में उत्पन स्थिति से निपटने के लिए कई तरह के अभियान शामिल है। इसमें गरीबों को मुफ्त राशन का वितरण, पंफलेट्स का वितरण, पोस्टरों को चिपकाना, कविता और नारों को कलमबद्ध करना, पिछले आठ महीनों से कोविड-19 के संबंध में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रमों और पोस्टर कार्यक्रम शामिल है। यशवीर ने अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, शतरंज और बैडमिंटन खेल, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, फोटोग्राफी और भाषण प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीते हैं।
वह आज तक पंजाब के एकमात्र युवा हैं, जिन्होंने 2017 में हनोई (वियतनाम) में आयोजित सूचना प्रौद्योगिकी में विश्व चैंपियनशिप में उपलब्धि पुरस्कार जीता है और वह आज तक पंजाब से एकमात्र युवा हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक और समग्र ट्रॉफी जीती है। उन्हें भारत के चुनाव आयोग द्वारा यूथ आइकन के रूप में चुना गया है, ताकि लोगों को उन्हें मतदाता के रूप में पंजीकृत करने के लिए प्रेरित करने के लिए एक अभियान शुरू किया जा सके और फिर चुनावी प्रक्रिया में भाग लिया जा सके। यशवीर ने 2019 में मिले नकद पुरस्कार से लॉक डाउन पीरियड के दौरान जरूरतमंदों को हजारों रुपये का राशन वितरित किया है। यशवीर कहते है कि वह कोरोना से बचने के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में लोगों को शिक्षित करने का काम जारी रखेगा। यशवीर, जो कि 100 प्रतिशत श्रवण बाधित हैं और रोल मॉडल श्रेणी में राष्ट्रीय मॉडल जीत चुके हैं, जिले में घूम-घूम कर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें सामाजिक दूरी बनाए रखने, मुखौटा का उपयोग करने और नियमित रूप से हाथ धोने के लिए शिक्षित कर रहे हैं।
विजिलेंस विभाग ने ब्लड बैंक में गलत रक्त चढ़ाने के मामले में तलब किया रिकार्ड, तीन सदस्यों की टीम जांच में हुई शामिल
सिविल अस्पताल में चार थेलेसीमिया पीड़ित बच्चों के साथ एक महिला को चढ़ाया गया है संक्रमित रक्त
-राज्य सेहत विभाग के आदेश पर विभिन्न सवालों के जबाव तलाशने के लिए चल रही है आधा दर्जन जांच
बठिंडा. बठिंडा के शहीद भाई मनी सिंह सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में थेलेसीमिया पीड़ित मरीजों को संक्रमित एचआईवी पोजटिव रक्त चढ़ाने के मामले में विजिलेंस विभाग की तरफ से 10 दिन पहले जांच शुरू करने के बाद अब मामले की तह तक जाने के लिए डाक्टरों के बयान लामबंद किए। शुक्रवार को सिविल अस्पताल की तरफ से गठित की गई जांच टीम के एक सदस्य व दो डाक्टरों की टीम ने विजिलेंस अधिकारियों के सामने पेश होकर पूरे मामले की जानकारी दी व मामले में अब तक सेहत विभाग की तरफ से की गई कारर्वाई व जांच के विभिन्न तथ्यों के बारे में जानकारी दी। इस मामले में राज्य सेहत विभाग ने विभागीय व सरकारी एजेंसी के मार्फत पूरे मामले की जांच करवाने की हिदायत दी थी। वही राज्य के बाल सुरक्षा कमिशन की तरफ से भी सरकार को पत्र लिखकर मामले की गहराई से जांच करवाने व इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ बनती कानूनी कारर्वाई करने के निर्देश दिए थे व 17 दिसंबर तक पूरी जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपने के लिए कहा था। आयोग की हिदायत के अनुसार सिविल अस्पताल प्रबंधन व सरकार की तरफ से मामले की जांच आयोग को 17 दिसंबर को सौंपनी थी लेकिन इसमें 14 दिसंबर को जांच टीम का गठन किया गया था जिसमें संभावना जताई जा रही है कि आयोग के पास पूरी रिपोर्ट 26 दिसंबर तक ही जमा हो सकेगी। इससे पहले ड्रग कंट्रोल आथार्टी की तरफ से ब्लड़ बैक स्टाफ, उनके अनुभव व तैनाती को लेकर 7 दिसंबर को मांगी रिपोर्ट भी पेश नहीं हो सकी थी व इसमें भी सेहत विभाग ने आथार्टी से सात से 10 दिन का समय और देने के लिए कहा था। फिलहाल सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों व कर्मियों की लापरवाही को लेकर सेहत विभाग के अधिकारियों की तरफ से जांच को धीमी गति से चलाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं व बाल सुरक्षा आयोग भी इसमें कड़ी टिप्पणी कर सेहत विभाग को फटकार लगा चुका है लेकिन जमीनी स्तर पर इस फटकार का विभाग के अफसरों पर कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है।
कर्मचारियों द्वारा एक महिला और चार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित ब्लड इश्यू करने का तीन अक्टूबर 2020 से लेकर सात नवंबर 2020 के मध्य खुलासा होने के बाद अब जहां विजिलेंस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई है वही पिछले पांच साल में ब्लड बैंक में कितने लोगों को रक्त चढ़ाया गयाव किन लोगों ने रक्त दान किया की विस्तृत रिपोर्ट भी पांच सदस्यों की टीम बना रही है। उक्त टीम को हिदायत दी गई है कि रक्तदान करने व रक्त लेने वाले लोगों लोगों के ब्लड सैंपल लेकर एचआईवी टेस्ट करने के साथ बैंक में बरती गई किसी तरह की अनियमियतता की विस्तर से जांच करने की हिदायत है। इसमें जांच की जरुरत इसलिए भी पड़ी कि ब्लड बैंक कर्मचारियों द्वारा उक्त संक्रमित ब्लड मरीजों को जानबूझकर इश्यू किया गया या फिर यह लापरवाही के चलते हुआ, इन सब सवालों के जवाब विजिलेंस के साथ पांच सदस्यों की टीम करेगी। सेहत विभाग के सेक्रेटरी हेल्थ हुस्न लाल द्वारा उक्त मामले की जांच विजिलेंस से करवाए जाने के एलान के बाद अब विभाग इसकी बारीकी से जांच करेगा जिसके बाद पूरे मामले के पटाक्षेप होने की उम्मीद बढ़ गई है। विजिलेंस जांच मामले में एचआईवी किट मुद्दे को शामिल किया गया है जिसमें अस्पताल कमेटी की ओर से अपनी आरंभिक जांच के दौरान शक जताया गया था कि लॉकडाउन के दौरान ब्लड बैंक कर्मचारियों द्वारा ब्लड इश्यू करते समय एचआईवी किट का प्रयोग ही नहीं किया गया। वही कीटों को बाहर किसी व्यक्ति व संस्था को देने के आरोप भी लगाए गए। इसमें पहले चरण की जांच में तत्कालीन ब्लड बैंक कर्मियों की तरफ से 600 टेस्ट कीटों को बाहर से मंगवाने का खुलासा हुआ था। मामले की जांच कर रहे विजिलेंस विभाग ने सिविल अस्पताल प्रबंधन से ब्लड बैंक का पूरा रिकार्ड तलब किया है। वहीं अब तक की जांच रिपोर्ट भी विभाग को जमा करवाने के लिए कहा गया है। इस जांच में राज्य बाल सुरक्षा आयोग की तरफ से सेहत विभाग की तरफ से की गई जांच में उठाए सवालों की बारीकी से तलाश की जाएगी। अस्पताल टीम की जांच में पूर्व बीटीओ बलदेव सिंह रोमाणा की तरफ से कथित तौर पर 600 एचआईवी टेस्ट किट जोकि बाहर से मंगवाकर बैंक के स्टाक रूम में रखी गई थी, उसकी भी जांच विजिलेंस करेगी। इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि उक्त किट कहां से लाई गई थीं व सेहत विभाग के पास जो स्टाक था, वह कहां गया क्योंकि अभी तक इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिल पाया है। इस जांच के बाद ब्लड बैंक में चल रहे बड़े घपले की आशंका से भी पर्दा पूरी तरह हट जाएगा। फिलहाल विजिलेंस विभाग को ब्लड बैंक बठिंडा में पिछले पांच साल के रिकार्ड को देखने व इसमें किसी तरह की अनियमितता की जांच के लिए भी कहा है। सिविल अस्पताल प्रबंधन पर भी इस मामले को दबाने व असली आरोपियों को बचाने के आरोप थैलेसीमिया एसोसिएशन व अन्य एनजीओ लगाते रहे हैं।
ढाई माह में थैलेसीमिया पीड़ित चार बच्चों सहित पांच लोगों को चढ़ाया गया था एचआईवी संक्रमित खून
तीन अक्टूबर 2020 से लेकर अब तक करीब ढाई माह में बठिंडा के सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक से जारी हुए संक्रमित खून से पांच लोग एचआईवी संक्रमित हो चुके हैं। इसमें सबसे चिंताजनक व अमानवीय पहलू यह है कि एचआईवी पॉजिटिव रक्त चार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को भी चढ़ाया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद स्टेट कमेटी के साथ एड्स कंट्रोल सोसायटी के पदाधिकारियों द्वारा भी जांच की गई थी। इसमें अक्टूबर माह में ब्लड बैंक में तैनात तीन कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था व उनके खिलाफ पुलिस के पास आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसमें एक रेगुलर कर्मी बलदेव सिंह रोमाणा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं हाल ही में बाल आयोग की सिफारिश पर बठिंडा पुलिस ने महिला लैब टेक्नीशियन रिचा गोयल को भी मामले में आरोपी बनाया है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं पूर्व बीटीओ करिश्मा गोयल पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं 7 नवंबर, 2020 को सेहत विभाग सेहत मंत्री के आदेश पर चार लैब टेक्नीशियनों को इसी केस में डिसमिस किया जा चुका है।
बठिडा-डबवाली रोड जमीन अधिग्रहण मामले में सुनाया अवार्ड तो जमीनों के मालिकों ने किया विरोध वही एसडीएम का तबादला
-जमीन के मालिकों ने अब मामले में अदालत जाने का लिया फैसला, सोमवार को दायर होगी याचिका
बठिंडा, 18 दिसंबर(जोशी). बठिडा डबवाली रोड को सिक्स लेन करने संबंधी की जाने वाली जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर प्रशासन व जमीन मालिकों के बीच पैदा हुआ विवाद में अब कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला लिया गया है। पंजाब सरकार ने बठिडा के एसडीएम अमरिदर सिंह टिवाणा का तबादला कर उनकी जगह पर नए एसडीएम को तैनात किया है। इसके बाद वीरवार से पक्का धरना लगाने वाले जमीन के मालिकों ने अपना प्रदर्शन स्थगित कर सोमवार को कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला लिया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन कमर्शियल जगह का भी रिहायशी रेट दे रहा है।
इससे पहले लोगों ने बुधवार को बठिडा-डबवाली रोड को दो घंटे के लिए ब्लाक भी किया था। जमीन मालिक कुलदीप सिंह ने बताया कि सड़क को चौड़ा करने के लिए प्रशासन की ओर से जमीन को एक्वायर किया जा रहा है। इसका उनको रेट सिर्फ 18.5 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जा रहा है, जो मार्केट रेट से भी काफी कम है। जबकि यहां पर इस समय कमर्शियल रेट दो करोड़ के लगभग है। लेकिन प्रशासन उनको रिहायशी रेट दे रहा है, जिसके विरोध में वह संघर्ष कर रहे हैं। इसी के चलते अब एसडीएम बठिडा का तबादला हो गया है तो वह कोर्ट में जाएंगे, जिसकी तैयारी को पूरा कर लिया गया है। इस मौके पर जमीन मालिक विनोद बांसल, जेके गर्ग, मोहित गुप्ता, गुरदीप सिंह, गहरीब बुट्टर, रशपाल सिंह, कृष्ण सिगला आदि उपस्थित थे।
गौरतलब है कि बठिडा डबवाली रोड को सिक्स लेन करने के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर प्रशासन व जमीन मालिकों के बीच विवाद चल रहा है। जमीनों के मालिक मुआवजा कम देने के आरोप लगा रहे हैं तो अधिकारी सारा कुछ नियमों के अनुसार होने की बात कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कामर्शियल जमीन का भी रिहायशी रेट दिया जा रहा है। जमीन मालिक कुलदीप सिंह ने बताया कि सड़क को चौड़ा करने के लिए प्रशासन की ओर से जमीन को एक्वायर किया जा रहा है। इसका रेट सिर्फ 18.5 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जा रहा है, जो मार्केट रेट से भी काफी कम है। यहां पर कामर्शियल रेट 2 करोड़ के लगभग है। जमीन मालिक विनोद बांसल, जेके गर्ग, मोहित गुप्ता, गुरदीप सिंह, गहरीब बुटर, रशपाल सिंह, कृष्ण सिगला ने बताया कि बठिडा डबवाली रोड को नेशनल हाईवे की ओर से सिक्स लेन किया जा रहा है। इस संबंध में 3ए नोटिफिकेशन के बाद 3डी नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। अब अवार्ड सुनाकर 3जी नोटिफिकेशन ही आना है। लोगों ने आरोप लगाया कि इससे पहले बठिडा-श्री अमृतसर साहिब रोड को फोरलेन करने के समय 40 हजार रुपये प्रति गज का मुआवजा गांव गिलपत्ती के पास दिया जा चुका है। उनको यहां पर सिर्फ 250 रुपये प्रति गज के दिए जा रहे हैं।
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