बठिंडा। जो आचरण पशु करते है, कमोबेश ऐसा ही आचार व्यवहार मनुष्यों का रहता है। जैसे आहार, निद्रा, मैथुन, और भय प्रेम आदि। मनुष्यों में जगत के रचियता ने सबसे जुदा विशेषता दी है, ज्ञान, जिसको बूते ही मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह प्रवचन शिव शक्ति योग मिशन बठिंडा की तरफ से स्थानीय न्यू शक्ति नगर में आयोजित छह दिवसीय धार्मिक सम्मेलन में स्वामी आत्मनंद पुरी जी महाराज ने कहें। स्वामी ने बताया कि मानव योनि की श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए पशुओं की भंति आहार, निद्रा, भय व मैथुन आदि में सदैव लिप्त न रहकर अपने कल्याण के लिए प्रयास करने होगे। एक दूजे के काम आना, सुख-दुख सांझा करना और यह सब नसीहत भरी बातें सत्संग व धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से आचरण में समाएंगी। स्वामी ने बताया कि मनुष्य देह बहुत दुर्लभ है जोकि चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त हुई है। इसे यू ही जाया न करके भगवान प्रप्ति एवं अपनी मुक्ति के लिए भजन कीर्तन व भक्ति में समय लगाना चाहिए। इस दुनिया में आए हो तो सद्कर्म करो, दीन दुखी लाचार व बेसहारा के लिए कुछ करो, अपने लिए तो सभी जीते है पर किसी लाचार व दुखी के काम आओ तो प्रभु का सिमरन करते रहें। भगवान भक्तों को सब कुछ दे सकते हैं पर मन नहीं क्योंकि मन तो भक्तों के पास पहले से ही है और अगर भगवान को कुछ अर्पण की इच्छा है तो अपना मन अर्पित करें। जन्मजात पोलियों विकलांगो के आपरेशन व सर्वमुखी पुनार्वास के सेवाभावी कामों में जुटी नारायण सेवा उदयपुर में सहयोग राशि देने वालों को सम्मानित किया गया। इस धार्मिक सम्मेलन को करवाने के लिए शिव शक्ति योग मिशन के प्रधान बंटी धुन्नीके व चेयरमैन अमरदीप सिंह जौड़ा, सुरेंद्र देवी, वेदप्रकाश, राज बंसल, विनोद कुमार, एमएल गुप्ता, सुरेंद्र गर्ग, विनोद गोयल, राजिंद्र राजू, रमणीक वालिया, कस्तूरी लाल अग्रवाल आदि ने विशेष सहयोग दे रहे हैं।
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Kako hitro dvigniti denar z Vavade po igranju slotov Pri Vavada hitrost
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2 हफ़्ते पहले
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