बठिंडा. नगर निगम चुनावों के नजदीक आते ही जहां राजनीतिक उठापटक तेज हो रही है वही टिकट नहीं मिलने से नाराज बागी सोशल मीडिया की तरफ रुख कर रहे हैं। इसी बीच अब शहर में नए राजनीतिक समीकरण व घटनाक्रम चर्चा का विषय बन रहे हैं। इन दिनों सर्वाधिक राजनीतिक सर्गमी कांग्रेस के अंदर चल रही है। कांग्रेस नगर निगम चुनावों में सत्तारुढ होने के चलते अना मेयर बनाने की स्थिति में है व राजनीतिक तौर पर हमेशा से ही सत्ताधारी दल ही नगर निगम व नगर काउंसिल में अपना कब्जा जमाती रही है। इसके पीछे एक कारण लोग निकायों में सत्ताधारी दलों को जीताकर शहर के विकास की उम्मीद करते हैं जबकि विरोधी को जिताने पर उन्हें शहर के विकास के लिए फंड हासिल करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शहर में कांग्रेस की मजबूती का लाभ मिलेगा यही सोचकर हर कोई उसकी टिकट हासिल करने की दावेदारी भी कर रहा है। वर्तमान में कांग्रेस ही अब तक अधिकतर वार्डों में अपने उम्मीदवार घोषित करने में सफल रही है। इस स्थिति मेें जिन लोगों को उम्मीदवारी की टिकट नहीं मिली उन्हें निराशा होना भी संभाविक है। कई सब्र का घूट पीकर पार्टी के कर्मठ वर्कर बन काम में जुट गए तो कई अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा पूरी करने के लिए दूसरे दलों की तरफ रुख कर रहे हैं। इस स्थिति में बगावती तेवर ज्यादा न हो इसके लिए हर दल अपने स्तर पर प्रयास भी कर रहा है। जब प्रयास होंगे तो नए घटनाक्र भी ाए दिन घटित होंगे।
इसी क्रम में बुधवार को पहला घटनाक्र उस समय चर्चा का कारण बना जब मार्किट कमेटी के चेयरमैन मोहन लाल झुंबा को मिली सरकारी सुरक्षा वापिस ले ली गई। इसे लेकर पुलिस प्रशासन ने तर्क दिया कि जब चेयरमैन झुंबा को सरकारी तौर पर सुरक्षा मिली ही नहीं तो वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता है। वही मोहन लाल झुंबा ने कहा कि उनकी सुरक्षा वापिस लेने के बाद अगर किसी तरह की अनहोनी होती है तो उसके लिए जिला पुलिस जिम्मेवार होगी। फिलहाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व में शहरी प्रधान व वर्तमान में कांग्रेस के ही कोटे से मार्किट कमेटी के चेयरमैन बनने वाले मोहन लाल झुंबा को लंबे समय से सुरक्षा मिली हुई थी। इसमें कांग्रेस प्रधान रहते उनकी तरफ से सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद करने व उन्हें कुछ लोगों की तरफ से धमकिया मिलने के बाद उनकी जान को खतरा बताया जा रहा था व इसी कारण से उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई थी। पहले चार व बाद में दो व अब एक सुरक्षा कर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात था लेकिन उसे भी बुधवार को वापिस बुला लिया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व वर्तमान चेयरमैन की सुरक्षा वापिस लेना वह भी नगर निगम चुनाव के नजदीक कई तरह से सवालों को जन्म दे रहा है। इसमें सूत्र खुलासा करते हैं कि कांग्रेस में अपने करीबियों को टिकट दिलवाने की कोशिश कई नेता कर रहे हैं। इसमें कुछ लोगों को टिकट मिल रही है जबकि कई लोगों को टिकट नहीं मिलने के बाद नेता हाईकमान या फिर उच्च स्तर पर शिकायते भी कर रहे हैं। पिछले दिनों तो रातों रात पूर्व विधायक हरमंदर सिंह जस्सी के समर्थकों ने अपना गुस्सा दिखाते शहर में उनके बैनर व बोर्ड लगा दिए। इसे लेकर भी कांग्रेस में काफी गहमा गहमी रही कि आखिर यह सब कौन कर रहा है क्योंकि हरमंदर सिंह जस्सी बठिंडा से विधायक रहे हैं व काफी समय से शहर की राजनीति से दूर होकर तलवंडी साबों में राजनीति जमीन तैयार कर रहे हैं।
वही इसमें कई नेता तो कांग्रेस का दामन छोड़ सोशल मीडिया ग्रुप में शामिल होकर चुनाव लड़ने की घोषणा कर रहे हैं। पिछले दिनों बठिडा सोशल ग्रुप ने नगर निगम चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद कांग्रेस छोड़ने वाले चार नेता इस ग्रुप में शामिल हो गए व अब अपने वार्डों से सोशल ग्रुप की तरफ से आजाद चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। ग्रुप में शामिल होने वाले नेताओं में हरमेश कुमार बासंल पक्का, पूर्व पार्षद राजा सिंह, राजिदर कुमार गोल्डी व हरविदर सिंह चहल शामिल थे। इनमें हरमेश कुमार बांसल पक्का को बुधवार को पुलिस ने साल 2014 के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पिछले छह साल से उक्त मामला लंबित चल रहा था व चुनाव से पहले उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इन नेताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रति गत दिनों आयोजित प्रेसवार्ता में गुस्सा प्रकट किया था। फिलहाल बुधवार को घटित दो घटनाक्रमों ने संकेत दे दिए है कि आने वाले दिनों में नगर निगम के चुनाव कांग्रेस ही नहीं बल्कि सभी दलों के लिए काफी हेरफेर वाले होंगे। इसमें आए दिन नए घटनाक्रम भी घटित होंगे क्योंकि कोई भी दल नहीं चाहता है कि बागी चुनाव के दौरान उनका खेल बिगाड़े।
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